S Raj Hanu
I love cricket
04/09/2026
मंधाना का रिकॉर्डतोड़ शतक, मिथाली राज को छोड़ा पीछे; हांगकांग के खिलाफ 124 रन की तूफानी पारी से रचा इतिहास
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मंधाना ने हांगकांग के खिलाफ अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से महिला क्रिकेट की रिकॉर्ड बुक में नया अध्याय जोड़ दिया। भारत की स्टार ओपनर ने महज 57 गेंदों में शतक पूरा करते हुए 124 रन की शानदार पारी खेली, जिसमें चौकों और छक्कों की जबरदस्त बरसात देखने को मिली। इस पारी के साथ मंधाना ने अंतरराष्ट्रीय महिला क्रिकेट में अपने शतकों की संख्या 18 तक पहुंचा दी और सर्वाधिक अंतरराष्ट्रीय शतक लगाने वाली बल्लेबाज बन गईं। उन्होंने मेग लैनिंग और लौरा वोल्वार्ड्ट जैसी दिग्गज खिलाड़ियों को पीछे छोड़ दिया।
इतना ही नहीं, मंधाना ने कुल अंतरराष्ट्रीय रनों के मामले में भी ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए मिथाली राज को पीछे छोड़ दिया। अब वह महिला अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सर्वाधिक रन बनाने वाली भारतीय बल्लेबाज हैं। इसके अलावा 50+ स्कोर, T20I में छक्कों और महिला एशिया कप में सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर से जुड़े कई रिकॉर्ड भी उनके नाम हो गए।
57 गेंदों में आया यह शतक भारत के लिए महिला T20I इतिहास के सबसे तेज शतकों में शामिल हो गया। मंधाना की इस रिकॉर्डतोड़ पारी ने न सिर्फ भारत की बल्लेबाजी को मजबूती दी, बल्कि विश्व महिला क्रिकेट में उनकी महानता को एक बार फिर साबित कर दिया।
04/09/2026
दलीप ट्रॉफी टूर्नामेंट 2026
** 2012 के बाद खिताब के
मुहाने पर ईस्ट जोन **
बेंगलुरु के बीसीसीआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में जब लाल गेंद से इतिहास की नई इबारत लिखी जा रही थी, तब सेंट्रल जोन के सिर से न सिर्फ दलीप ट्रॉफी की बादशाहत छिन रही थी, बल्कि क्रिकेट का एक नया दौर आकार ले रहा था। खेल में अक्सर कहा जाता है कि पुराना ताज कई बार नया बोझ बन जाता है, और यही बात इस सेमीफाइनल मुकाबले में भी साबित हुई। दलीप ट्रॉफी के मौजूदा चैंपियन सेंट्रल जोन को चार विकेट से पटकनी देकर ईस्ट जोन ने न केवल फाइनल का टिकट पक्का कर लिया, बल्कि यह भी जता दिया कि बेखौफ जज्बे के आगे किसी भी रिकॉर्ड का गुरूर टूट सकता है।
सेंट्रल जोन ने टॉस जीतकर पहली पारी में 266 रन बनाए। रिंकू सिंह के धैर्यशील 60 रन और आर्यन जुयाल के 46 रनों ने टीम को संभालने की कोशिश की, लेकिन मुकेश कुमार, मोहम्मद शमी और अभिजीत सरकार की कसी हुई गेंदबाजी के आगे चैंपियन टीम बड़ा स्कोर खड़ा करने में नाकाम रही। इसके जवाब में ईस्ट जोन की ओर से मैदान पर उतरा एक ऐसा किशोर, जिसने पूरे मुकाबले की दिशा बदल दी। महज 15 साल और 157 दिन के वैभव सूर्यवंशी ने 81 गेंदों में सात चौकों और सात छक्कों की मदद से 92 रनों की आतिशी पारी खेली। हालांकि वह अपने शतक से आठ रन दूर रह गए, लेकिन 42 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा कर उन्होंने दलीप ट्रॉफी के 57 साल पुराने इतिहास को ध्वस्त कर दिया और इस टूर्नामेंट में पचासा जड़ने वाले सबसे युवा बल्लेबाज बन गए।
इस मैच का रोमांच केवल वैभव के बल्ले तक सीमित नहीं था। जब कप्तान ईशान किशन चोट के कारण कुछ समय के लिए मैदान से बाहर गए, तब उपकप्तान की भूमिका निभा रहे इस 15 साल के खिलाड़ी को पहली बार सीनियर फर्स्ट क्लास क्रिकेट में कप्तानी का जिम्मा संभालना पड़ा। वैभव ने कप्तानी के दबाव में भी अपनी सूझबूझ दिखाई और आर्यन जुयाल के खिलाफ एक सटीक डीआरएस (DRS) लेकर अंपायर का फैसला पलटवाया। इसके बाद ईस्ट जोन की पहली पारी भले ही 266 रन पर सिमट गई और अंतिम पांच विकेट सिर्फ 53 रन के भीतर गिर गए, लेकिन मैच का मनोवैज्ञानिक संतुलन पूरी तरह ईस्ट जोन के पक्ष में झुक चुका था।
दूसरी पारी में सेंट्रल जोन की पूरी टीम महज 158 रन पर ढेर हो गई। पहली पारी के तीन विकेटों के साथ मुकेश कुमार ने दूसरी पारी में चार शिकार करते हुए मैच में कुल सात विकेट चटकाए, जबकि शमी ने दूसरी पारी में तीन अहम सफलताएं हासिल कीं। 159 रन के आसान दिखने वाले लक्ष्य का पीछा करने उतरी ईस्ट जोन की शुरुआत लड़खड़ाई और 6 विकेट गिर जाने से मुकाबले में हल्का तनाव जरूर उभरा। मगर चोट से उबरकर लौटे कप्तान ईशान किशन ने संयम बनाए रखा और टीम को 39.3 ओवर में 162 रन तक पहुंचाकर चार विकेट से यादगार जीत दिला दी।
क्वार्टर फाइनल में नॉर्थ ईस्ट जोन को पारी और 210 रन से रौंदने के बाद, अब चैंपियन सेंट्रल जोन को शिकस्त देकर ईस्ट जोन 2012 के बाद पहली बार ट्रॉफी चूमने से महज एक कदम दूर है। ईशान की कप्तानी, मुकेश और शमी की धारदार गेंदबाजी, अभिमन्यु ईश्वरन का भरोसेमंद अनुभव और वैभव की बेबाक लय—इन सबका अनूठा संगम ईस्ट जोन की इस जीत का असली आधार बना। अब फाइनल का मैदान चेन्नई में सजेगा, जहां ईस्ट जोन नए इतिहास पर अपनी मुहर लगाने उतरेगी। जब क्रिकेट की किताब में कोई नया पन्ना जुड़ता है, तो पुरानी हुकूमतें ऐसे ही ढहती हैं और एक नया सिरमौर उभरता है।
27/08/2026
यह कहानी वाकई दिलचस्प है ✍️
साई सुदर्शन के गाले टेस्ट से पहले चोटिल होते ही देवदत्त पडिक्कल को वह जगह मिल गई, जिसके लिए भारत पिछले 27 टेस्ट में पुजारा के बाद 7 अलग-अलग बल्लेबाजों को आजमा चुका था और उन सभी का संयुक्त औसत सिर्फ 33.33 रहा, गाले में पडिक्कल ने 167 रन ठोक दिए और अब कोलंबो में 117 रन बनाकर उन्होंने यह साबित कर दिया कि उनका टीम में आना महज एक संयोग नहीं था ।
लेकिन इस कहानी की असली शुरुआत तब हुई थी, जब वह सिर्फ 10 साल के थे, केरल के एडप्पल में बड़े हो रहे पडिक्कल के खेल में उनके पिता, जो मेडिकल प्रोफेशन में थे, ने कुछ खास देखा । उन्होंने ऐसा फैसला लिया जिसके बारे में ज्यादातर परिवार कई बार सोचेंगे ,
पूरे परिवार को बेंगलुरु ले गए, सिर्फ इसलिए ताकि देवदत्त को बेहतर क्रिकेट ट्रेनिंग मिल सके, वहां स्थानीय अकादमी में नसीरुद्दीन नाम के कोच मिले और एक ऐसा बच्चा सामने आया, जो 11 साल की उम्र में ही शॉर्ट गेंदों को जिस आत्मविश्वास और शांति से खेलता था, वह बड़े खिलाड़ियों में भी कम ही देखने को मिलता था।
आज वही ठहराव उनकी बल्लेबाजी की सबसे बड़ी ताकत नजर आता है, कोचों ने उनकी तकनीक पर लगातार काम किया, हाथों को शरीर के करीब लाया गया और बैक-लिफ्ट को छोटा किया गया ताकि ऑफ स्टंप के बाहर की गेंदों के खिलाफ कमजोरी कम हो, स्पिन के खिलाफ भी ऐसा खेल तैयार किया गया जिसमें गेंदबाज के जाल में फंसने के बजाय दबाव उन पर डाला जाए ।
गाले में श्रीलंकाई स्पिनरों के खिलाफ उन्होंने अपने करीब 25% रन सिर्फ स्वीप शॉट से बनाए और जरूरत पड़ने पर आगे निकलकर लॉन्ग-ऑन के ऊपर से भी गेंद भेजी ।
और अगर ध्यान से देखें तो यह अचानक मिली सफलता भी नहीं है। पिछले कई महीनों से पडिक्कल लगातार अपनी दावेदारी मजबूत कर रहे थे ।
सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में बड़े स्कोर, पिछले विजय हजारे ट्रॉफी सीजन में 90 की औसत से 725 रन, रणजी ट्रॉफी 2025-26 में 60.33 की औसत से 543 रन और IPL 2026 में 168 के स्ट्राइक रेट से 464 रन - इन सबके बीच कर्नाटक की कप्तानी का अनुभव भी उन्हें मिला ।
इसलिए जब श्रीलंका का मौका आया, तब तक पडिक्कल बाकी हर स्तर पर खुद को साबित कर चुके थे। टेस्ट क्रिकेट बस उस घर का आखिरी कमरा था, जिसके दरवाजे खुलने का इंतजार था ।
एक परिवार ने 10 साल के बच्चे पर भरोसा करके अपना सब कुछ दांव पर लगाया था, कई साल बाद किसी दूसरे खिलाड़ी की चोट ने उस भरोसे को मौका दिया और देवदत्त पडिक्कल ने सुनिश्चित कर दिया कि वह मौका बेकार न जाए ।
27/08/2026
India और Sri Lanka के मैच में बैट के साथ Mind Game भी खूब खेला जा रहा है। 😂
भारत ने पहली पारी 503/9 पर घोषित की थी। Follow-on से बचने के लिए श्रीलंका को 304 रन बनाने थे।
श्रीलंका 290/9 पर था और उसे बचने के लिए सिर्फ 14 रन चाहिए थे। Sonal Dinusha 103 रन पर खेल रहे थे।
विकेट के पीछे से ऋषभ पंत ने कहा - एक छक्का मारो और अपने देश को Follow-on से बचा लो।
दिनुशा ने जवाब दिया - जब मन करेगा तब छक्का मारूंगा, तुम अपना काम देखो।
लेकिन ये कहने के बाद भी दिनुशा छक्का लगाने गए, लेकिन Saransh Jain की गेंद पर केएल राहुल ने कैच लपक लिया..😭😂
Rishabh Pant ने विकेट के पीछे से mind game खेल कर श्रीलंका को Follow-on बचाने नहीं दिया..!
26/08/2026
ईशान किशन ने टेस्ट टीम में वापसी के लिए BCCI से लगाई गुहार, बोले—रेड-बॉल क्रिकेट खेलने में आता है मजा
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दलीप ट्रॉफी 2026 में ईस्ट जोन की कप्तानी करते हुए शानदार जीत के बाद ईशान किशन ने भारतीय टेस्ट टीम में वापसी की इच्छा खुलकर जाहिर की। उन्होंने कहा कि वह 100% टीम इंडिया का हिस्सा बनना चाहते हैं और रन बनाकर अपनी टीम को जीत दिलाना उनका मुख्य लक्ष्य है। 2023 में वेस्टइंडीज के खिलाफ टेस्ट डेब्यू करने वाले ईशान ने अब तक 2 टेस्ट में 78 रन बनाए हैं। वहीं फर्स्ट-क्लास क्रिकेट में उनके नाम 3,897 रन, 9 शतक और 19 अर्धशतक हैं। ऐसे में उनका शानदार प्रदर्शन टेस्ट टीम में वापसी का रास्ता खोल सकता है।
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26/08/2026
पर्थ के वाका स्टेडियम में अपने वनडे डेब्यू मैच में इस युवा भारतीय तेज गेंदबाज ने 30 रन देकर 3 विकेट लिए। इनमें से एक विकेट ब्रायन लारा का था, जो मात्र 14 रन बनाकर विकेटकीपर के हाथों कैच आउट हुए। मैच रोमांचक ड्रॉ पर समाप्त हुआ। एक छोटे से अंतरराष्ट्रीय करियर में यह एक दुर्लभ उज्ज्वल क्षण था, जो उस तरह से सफल नहीं हो पाया जैसा होना चाहिए था। आज कुछ ही लोग इस पल को याद करते हैं।
26/08/2026
दलीप ट्रॉफी की तपती हुई पिच और उस पर कहर बरपाता हमारा वंडर बॉय वैभव सूर्यवंशी! इस हाई-वोल्टेज महासंग्राम में इस युवा शेर ने ऐसा गदर काटा है कि बड़े-बड़े दिग्गजों को दिन में तारे नजर आ गए हैं।
अब तक तो दुनिया सिर्फ इसके बल्ले की गूंज सुन रही थी, लेकिन अब इस धाकड़ खिलाड़ी ने 22 गज की पट्टी पर अपनी कातिलाना गेंदबाजी का जो राजसी रूप दिखाया है, उसने हर किसी को दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर कर दिया है। जरा उस रोंगटे खड़े कर देने वाले जादुई मंजर को महसूस कीजिए... एक ही ओवर, और दो-दो शिकार! वैभव के हाथ से निकली उन आग उगलती गेंदों ने बल्लेबाजों को ऐसे छकाया कि विरोधी खेमे में पल भर में श्मशान जैसा सन्नाटा पसर गया। एक ही झटके में पूरे मैच की स्क्रिप्ट पलट देने वाला वह स्पेल सच में किसी ब्लॉकबस्टर फिल्म के क्लाइमेक्स से कम नहीं था।
दलीप ट्रॉफी जैसे भारी दबाव और प्रतिष्ठा वाले मंच पर, जहां अच्छे-अच्छों के पैर कांप जाते हैं, वहां गेंद और बल्ले दोनों से ऐसा एकतरफा भौकाल काटना कोई आम बात नहीं है। एक ही ओवर में उखड़ी वो दो गिल्लियां चीख-चीख कर गवाही दे रही हैं कि भारतीय क्रिकेट में उठा यह नया तूफान अब किसी के रोके नहीं रुकने वाला। क्या गजब का टैलेंट, क्या गजब का स्वैग... बॉस, इस छोटे पैकेट ने सच में पूरी महफिल लूट ली है!
क्या आपको भी लगता है कि वैभव सूर्यवंशी भारतीय क्रिकेट का अगला सबसे बड़ा सुपरस्टार बनने की राह पर पूरी रफ्तार से निकल चुके हैं?
04/07/2026
वसीम अकरम बनाम जसप्रीत बुमराह: कौन है 'द अल्टीमेट' किंग? हाल ही में मिस्टर 360 यानी एबी डिविलियर्स ने एक पॉडकास्ट में यह कहकर क्रिकेट जगत में खलबली मचा दी है कि जसप्रीत बुमराह, महान वसीम अकरम से भी बेहतर और अधिक काबिलियत रखने वाले गेंदबाज हैं!
जैसे ही यह बयान आया, क्रिकेट फैंस दो गुटों में बंट गए। हालांकि दोनों के खेलने के दौर (Era) में लगभग 15-20 साल का बड़ा अंतर है, जिससे सीधे तुलना करना थोड़ा मुश्किल है। लेकिन अगर हम दोनों की कला और प्रभाव का विश्लेषण करें, तो तस्वीर कुछ ऐसी दिखती है:
'सुल्तान ऑफ स्विंग' वसीम अकरम:
रिवर्स स्विंग के जादूगर: वसीम अकरम उस दौर में खेले जब न तो बल्लेबाजों के पास इतने भारी बल्ले थे और न ही टी-20 जैसी क्रिकेट थी। पुरानी गेंद से जो रिवर्स स्विंग वो कराते थे, वो आज भी अकल्पनीय है।
विविधता के उस्ताद: नई गेंद से अंदर लाना, पुरानी गेंद को बाहर निकालना और सटीक यॉर्कर फेंकना उनकी फितरत थी। उन्होंने वकार यूनिस के साथ मिलकर बल्लेबाजों के मन में खौफ पैदा किया था।
'मॉडर्न डे लीजेंड' जसप्रीत बुमराह:
हर फॉर्मेट का बॉस: बुमराह आज के दौर के सबसे 'कंप्लीट' बॉलर हैं। टेस्ट हो, वनडे हो या टी-20 (जहां बल्लेबाजों के लिए नियम बेहद आसान हैं), बुमराह का इकॉनमी रेट और विकेट लेने की क्षमता अद्भुत है।
अनोखा एक्शन और घातक यॉर्कर: उनका अनोखा रिलीज पॉइंट और बिना रन-अप के 145+ किमी/घंटा की रफ्तार से सटीक यॉर्कर मारना उन्हें दुनिया का सबसे मुश्किल गेंदबाज बनाता है। डिविलियर्स ने शायद उनके इसी 'ऑल-फॉर्मेट इम्पैक्ट' को देखकर उन्हें आगे रखा है।
हमारा विश्लेषण: बेस्ट कौन?
वसीम अकरम उस दौर के शहंशाह थे जब क्रिकेट का मिजाज अलग था, उन्होंने जो स्विंग की कला दुनिया को सिखाई, उसकी कोई बराबरी नहीं है। वहीं दूसरी तरफ, जसप्रीत बुमराह आज के उस दौर में बल्लेबाजों को नचा रहे हैं जहां फ्लैट पिचें, छोटी बाउंड्री और टी-20 का दबाव होता है।
अगर 'स्किल और स्विंग' की बात हो तो वसीम अकरम का पलड़ा भारी दिखता है, लेकिन 'दबाव में निरंतरता और ऑल-फॉर्मेट डोमिनेशन' के मामले में बुमराह इतिहास के किसी भी गेंदबाज को टक्कर दे सकते हैं। दोनों अपने-अपने युग के सर्वकालिक महान (GOAT) हैं!
आपका क्या मानना है? क्या आप एबी डिविलियर्स की बात से सहमत हैं कि बुमराह, वसीम अकरम से बड़े बॉलर हैं? या फिर सुल्तान ऑफ स्विंग का कोई मुकाबला नहीं? कमेंट में अपनी राय बताएं!
03/07/2026
अगस्त का महीना था और इंग्लैंड के हेडिंग्ले मैदान की पिच पर इतनी हरी घास थी कि पिच और आउटफील्ड में फर्क करना मुश्किल हो रहा था। आसमान में काले बादल छाए हुए थे और कंडीशन पूरी तरह से इंग्लैंड के तेज़ गेंदबाज़ों के पक्ष में थी। टॉस हुआ और कप्तान सौरव गांगुली ने टॉस जीत लिया। सबको लगा कि ऐसी खतरनाक पिच पर गांगुली आँख बंद करके पहले बॉलिंग चुनेंगे, क्योंकि विदेशी दौरों पर भारत हमेशा से डरकर खेलता आया था। लेकिन दादा तो दादा थे। उन्होंने एक बेहद निडर और चौंकाने वाला फैसला लिया—हम पहले बैटिंग करेंगे।इंग्लैंड के कप्तान नासिर हुसैन मन ही मन मुस्कुरा रहे थे क्योंकि उनके पास मैथ्यू होगार्ड, एंडी कैडिक और एंड्रयू फ्लिंटॉफ जैसे खतरनाक बॉलर थे जो उस पिच पर आग उगलने वाले थे।
पारी शुरू हुई और वीरेंद्र सहवाग जल्दी आउट हो गए। इसके बाद क्रीज़ पर आए द वॉल राहुल द्रविड़। उस दिन द्रविड़ ने इंग्लैंड के गेंदबाज़ों का सारा गुरूर और जोश तोड़ दिया। गेंद बहुत तेज़ी से स्विंग और सीम हो रही थी, इंग्लिश बॉलर स्लेजिंग कर रहे थे, लेकिन द्रविड़ ने पिच पर मानो अपना खूंटा गाड़ दिया। उन्होंने शरीर पर गेंदे खाईं, हर मुश्किल का सामना किया, लेकिन अपना विकेट नहीं दिया। द्रविड़ ने उस खतरनाक पिच पर 148 रनों की एक ऐसी जुझारू और ऐतिहासिक पारी खेली, जिसने इंग्लैंड के बॉलर्स को पूरी तरह थका दिया।
द्रविड़ के बाद मैदान पर उतरे क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलकर। सचिन ने क्रीज़ पर कदम रखते ही अपने चिर-परिचित अंदाज़ में बैटिंग शुरू की। द्रविड़ जहाँ एक तरफ चट्टान की तरह खड़े थे, वहीं सचिन ने अपनी जादुई तकनीक से इंग्लैंड के हर गेंदबाज़ की बखिया उधेड़नी शुरू कर दी। सचिन ने उस मुश्किल पिच पर 193 रनों की एक शानदार और मैराथन पारी खेली। इन दोनों ने मिलकर स्कोर को एक बहुत ही विशाल और सुरक्षित स्थिति में पहुंचा दिया।
लेकिन असली तबाही और एग्रेशन तो अभी बाकी था। जब राहुल द्रविड़ आउट हुए, तब क्रीज़ पर आए खुद कप्तान सौरव गांगुली।द्रविड़ और सचिन ने जो ज़मीन तैयार की थी, उस पर गांगुली ने आते ही आग लगा दी। गांगुली ने अपने आक्रामक तेवर दिखाए और इंग्लिश स्पिनर्स के साथ-साथ थके हुए तेज़ गेंदबाज़ों को भी बाउंड्री के पार मारना शुरू कर दिया। उन्होंने महज़ 167 गेंदों में 128 रनों की तूफानी पारी खेल डाली।
भारत ने अपनी पहली पारी 628 रनों के विशाल स्कोर पर घोषित कर दी। इंग्लैंड की टीम अपने ही घर में, अपनी ही मनपसंद हरी पिच पर पूरी तरह बेबस हो चुकी थी।इसके बाद भारतीय गेंदबाज़ों (खासकर अनिल कुंबले, हरभजन सिंह और ज़हीर खान) ने अपना कमाल दिखाया और उस विशाल स्कोर के दबाव में इंग्लैंड को उसी पिच पर दो बार ऑलआउट कर दिया। भारत ने वह ऐतिहासिक टेस्ट मैच एक पारी और 46 रनों से जीत लिया।
यह मैच सिर्फ एक आम जीत नहीं थी, बल्कि यह गांगुली की निडर कप्तानी, द्रविड़ के अकल्पनीय संयम, सचिन की बेदाग तकनीक और भारतीय टीम के उस नए एग्रेशन का सबूत था, जिसने विदेशी सरज़मीं पर भारत को राज करना सिखाया।
29/06/2026
Full Video Link in Bio 👆 👆 👆 👆
एक खिलाड़ी जो साल 2026 में 9 बार शून्य (0) पर आउट होने का शर्मनाक रिकॉर्ड बना चुका है... उसे टीम में लगातार मौके पर मौके क्यों मिल रहे हैं?
सवाल तो अब बहुत सारे पूछे जाएंगे और जवाब भी देना ही होगा! आखिर क्यों दूसरे हकदार खिलाड़ियों की प्रतिभा को नजरअंदाज किया जा रहा है? क्यों उन्हें मौका नहीं मिल रहा?
इस बार कुछ तीखे सवाल हेड कोच गौतम गंभीर पर भी उठ रहे हैं। पक्षपात के इन आरोपों का जवाब अब कोच साहब को भी देना पड़ेगा!
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