Ram Kumar
संस्कारी पुत्र
किसान भाई ज़रूर 😊 यहाँ एक छोटी-सी पस्टोरी (हास्य कहानी) है, जिसमें नेता वोट मांग रहा है — लगभग 250 शब्दों में:
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शीर्षक: “वोट का वादा”
गाँव में चुनाव का मौसम था। हर गली में पोस्टर, हर नुक्कड़ पर माइक। उसी बीच हमारे नेता जी पसीने में तर, हाथ में माला और चेहरे पर मुस्कान लिए घूम रहे थे।
नेता जी बोले, “भाइयो-बहनो, इस बार हमें ही वोट देना! हम आपके जीवन में क्रांति लाएँगे!”
रामू काका ने टोपी सीधी की और बोले, “पिछली बार भी यही बोले थे नेता जी — सड़क बनवाएँगे, बिजली दिलवाएँगे। सड़क तो अब भी गड्ढों में और बिजली कुत्तों के नाम जैसी — आती है तो सब खुश, जाती है तो अंधेरा ही अंधेरा।”
नेता जी मुस्कराए, बोले, “इस बार पक्का करेंगे काका! अबकी बार हमारी सरकार आई तो हर घर में बिजली, हर खेत में पानी!”
पास खड़ी मुन्नी बोली, “और हमारे स्कूल की छत? हर साल बारिश में टपकती है।”
नेता जी बोले, “छत भी नई बनेगी, बच्ची! बस तुम्हारे पापा-मम्मी हमारा बटन दबाएँ।”
गाँव वाले आपस में मुस्कराने लगे। एक ने कहा, “नेता जी, इस बार अगर वादा झूठ निकला तो?”
नेता जी ने सीना तानकर कहा, “तो अगली बार दुबारा आने की ज़रूरत ही नहीं पड़ेगी!”
सब हँस पड़े। रामू काका बोले, “चिंता मत करो नेता जी, इस बार हम ही ध्यान रखेंगे कि आपको दुबारा आने की ज़रूरत न पड़े!”
नेता जी का चेहरा उतर गया — पर मुस्कान फिर भी कायम रही। आखिर, चुनाव का मौसम जो था!
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क्या आप चाहेंगे मैं इस पस्टोरी को थोड़ा व्यंग्यात्मक या नाटकीय शैली में बदल दूँ?
बिजली विभाग को
What 🤣
#संस्कारी #न्यू2025 @
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