Meri_Kalam_Se
अल्फ़ाजों से इस कद़र मोहब्ब़त है कि कलम ही इश्क़ है और लफ्ज़ ही आशिक़ी। शाय़र नहीं थी मै, न ही हुनर था शाय़री का, कुछ दर्द मिले जिंदगी में और लिखना सिखा गये।
09/04/2026
ये उन दिनों की बात है!😞
09/04/2026
05/03/2026
वो सब मिला जिसकी थी दरकार हमें,
फिर भी दिल में एक खाली सा घर रहा।
मंज़िलें भी मिलीं, राहें भी आसान हुईं,
पर सफ़र का वो पहला असर रहा।
चाँद भी मिला, सितारे भी हाथ आए,
ख्वाबों का हर एक रंग निखर रहा।
पर जो तलाश थी उस वक्त,
वो ही कहीं दिल में ठहरा रहा।
दुनिया की दौलत, शोहरत, सब पा ली,
हर चाहत का मानो जवाब मिला।
पर जब आई ख़ामोशी की एक शाम,
वो ख़्वाब वो सपने की कसक हर शाम मिला।
वो सब मिला जिसकी थी दरकार हमें,
अब खुद को ढाल लिया इसी संसार में,
सोचा, जो नहीं भी था हमने,
वो सब कुछ हमें बेहिसाब मिला।
बहुत दिनों बाद,
मुझसे ज़्यादा यहाँ कौन हारा होगा,
मेरे जैसे न कोई बेचारा होगा।
मैं घर मे हारी, मैं बाहर भी हारी,
मैं संघर्षो के हाथों गयी मारी।
मैं परीक्षा में हारी, मैं शर्तों में हारी,
मैं अपने ही हाथों की लकीरों से हारी।
मैं रिश्तों में हारी , मैं नातों में हारी,
मैं अपने ही कही गयी बातों में हारी।
मुझे ये हार कैसे गवारा होगा?
मुझसे ज़्यादा यहाँ कौन हारा होगा।
दूर से सब यहाँ मुझे अपने लगे ,
पास आकर के सब सपने लगे।
ढालने लगे सब अपनी तरह ही,
मेरे अपने ख़्वाब सारे बेगाने लगे
मैं ढूंढ़ती फिरी जिन खुशियों को जहाँ में
उन खुशियों में ही ग़मों के ठिकाने लगे।
मुझे अपना ही यहाँ अब सहारा होगा,
मुझसे ज़्यादा यहाँ कौन हारा होगा?
#मुझसेज्यादायहांकौनहाराहोगा।
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