Naim

Naim

Compartir

naim

11/03/2026

"جو لوگ نبی کریم ﷺ سے محبت کرتے ہیں
وہ ابھی چینل کو سبسکرائب کریں
اور کمنٹ میں لکھیں:
ﷺ ❤️"

10/03/2026
21/01/2026

ईदगाह रमजान के पूरे तीस रोजों के बाद आज ईद आयी है कितना मनोहर, किना सुहावना प्रभात है वृक्षों पर कुछ अजीब हरियाली है, खेतों में कुछ अजीब रौनक है, आसमान पर कुछ अजीब लालिमा है आज का सूर्य देखो, कितना प्यार, कितना शीतल है, मानो संसार को ईद की बधाई दे रहा है गँव में कितनी हलचल है ईदगाह जाने की तैयारियँ हो रही है किसी के कुरते में बटन नही है पडोस के घर से सूई धागा लेने दौडा जा रहा है किसी के जूते कडे हो गये है उनमें तेल डालने के लिए तेली के घर भगा जाता है जल्दी जल्दी बैलों को सानी पानी दे दें ईदगाह से लौटते दोपहर हो जायेगी तीन कोस का पैदल रास्ता, फिर सैकडों आदमियों से मिलनाभेटना दोपहर के पहले लौटना असंभव है लडके सबसे ज्यादा प्रसन्न है किसी ने एक रोजा रखा है, वह भी दोपहर तक, किसी ने वह भी नहीं, लेकिन ईदगह जाने है किसी ने एक रोजा रखा है, वह भी दोपहर तक, किसी ने वह भी नहीं, लेकिन ईदगह जाने की खुशी उनके हिस्सेकी चीज है रोजे बडे बूढों के लिए होंगे इनके लिए तो ईद है रोज ईद का नाम रटते थे आज वह आ गयी अब जल्दी पड़ी है कि लोग ईदगाह क्यों नही चलते इन्ह गृहस्थी की चिन्ता ओं से क्या प्रयोजन? सेबँइयों के लिए दूध और शक्कर घर में है या नहीं, इनकी बला से ये रहे है उन्हे क्य खबर कि चौधरी आज आँखे बदल लें तो यह सारी ईद मुहर्रम हो जाय उनकी अपनी जेबों में तो कुबेर का धन भरा हुआ है बार जेब से अपना खजाना निकाल पसा बारह पैसे है। मोहसिन के पास एक, दो, तीन, आठ, नौ, पन्द्ह पैसे हैं इन्हीं अनगिनत पैसों में अनगिनत चीजें लायेंगे-खिलौने, मिठाइयाँ, बिगुल, गेंद और न जाने क्या-क्या ? और सबसे ज्यदा प्रसन्न है हामिद।वया और माँ न जाने क्यों पीली होती-होती एक दिन मर गयी किसी को पता न चला, क्या बीमारी है कहती भी तो कौन सुनने वाला था दिल पर जो कुछ बीतती थी, वह दिल में ही सहती थी और जब न सहा गया तो संसार से विदा हो गयी अब हामिद अपनी बुढ़ि दादी अमीना की गोद में सोता है और उतना ही प्रसन्न है उसके अब्बा जान रुपये कमाने गये है बहुत -सी थैलियाँ लेकर आयेंगे अम्मीजान अल्लाह मियाँ के घर से उसके लिए बडी -राई का पर्वत बना लेती है, इसलिए हामिद के प्रसन्न है और फिर बच्चों की आशा उनकी कल्पना तो रई का पर्वत बना लेती है हामिद के पांँव में जूते नहीं है, सिर पर एक पुरानी -धुरानी टोपी है, जिसका गोट काला पड गया है, फिर भी वह प्रसन्न है अब उसके कब्बजान थैलियाँ और अम्मीजान नियामतें लेकर आयेंगी, तो वह दिल के अरमान निकाल लेगा तब देखेगा महमूद, मोहसिन, नूरे और सम्मी कहाँ से उतने पैसे निकालेंगे अभागिन अमीना अपनी कोठरी में बैठी रो रही है आज ईद का दिन और उसके घर में दाना नहीं आज आबिद होता तो क्या इसी तरह ईद आती और चली जाती इस अन्धकार और निराशा में वह डूबी जा रही थी किसने बुलाया था इस निगोडी ईद को इस घर में उसका काम नहीं है, लेकिन हामिद, उसे किसी के मरने जीये, से क्या मतलब ? उसके अन्दर प्रकाश है, बाहर आशा। विपत्ति अपना सारा दल-बल लेकर आये हामिद की आनन्द -भरी चितवन उसका विध्वंस कर देगी। हामिद भीतर जाकर दादी से कहता -तुम डरना नहीं अम्मा, मैं सबसे पहले आऊँग। बिल्कुल न डरना। अमीना का दिल कचोट रहा है गाँव के बच्चे अपने -अपने बाप के साथ जा रहे हैं। हामिद के बाप अमीना के सिवा और कौन है। उसे कैसे अकेले अकेले मेले जाने दे। उसीभीड-भाड में बच्चा कहीं खो जाय तो क्या हो? नहीं, अमीना उसे यों न जाने देगी। नन्हीं-सी जान। तीन कोस चलेगा कैसे। पैर में छाले पड जायेंगें। जूते भी तो नहीं है। वह थोड़ी दूर पर उसे गोद ले लेगी, लेकिन यहाँ तो घंटों चीजें जमा करते लगेंगे। माँगे का ही तो भरोसा ठहरा। उस दिन फहीमन के कपड़े सिये थे। आठ आने पैसे मिले थे। उस अठन्नी को ईमान की तरह बचाती चली आयी थी इसी ईद केलिए, लेकिन कल ग्वालन सिले थे। उस अठन्नी कोईमान की तरह बचाती चली आयी थी इसी ईद के लिए, लेकिन कल ग्वालन सिर पर सवार हो गयी तो क्या करती? हामिद के लिए कुछ नहीं है, तो दो पैसे का दूध तो चाहिए ही। अब तो कुल दोआने पैसे बच रहे है। तीन पैसे हामिद की जेब में, पाँच अमीना के बदुवे में। गाँव से मेला चला और बच्चों के साथ हामिद भी जा रहा था। कभी सबके सब दौड़ कर आगे निकल जते। फिर किसी पेड़ के नीचे खड़े होकर साथ वालों का इन्तजार करते। ये लोग क्यों इतना धीरे-धीरे चल रहे है। हामिद के पैरों में तो जैसे पर लग गये हैं। वह कभी थक सकता है? शहर का दामन आ गया। बड़ी-बड़ी इमारतें आने लगीं, यह अदालत है, यह काँलेज है, यह क्लब-घर है। इतने बड़े काँलेज में कितने लड़के पढंते होंगें। सब लड़के नहीं हैं जी। बड़े -बड़े आदमी हैं, सच उनकी बड़ी-बड़ी मूँछे हैं। इतने बड़ेहो गये, अभी पढ़ने जाते हैं। न जाने कब तक पढ़ेंगे और क्या करेंगे इतना पढ़ कर। हामिद के मदरसे में दो-तीन बड़े-बड़े लड़के हैं, बिलकुल तीन कौड़ी के, रोज मार खाते हैं, काम से जी चुराने वाले। इस जगह भी उसी तरह के लोग होंगे और क्या? क्लब-घर में जादू होता है सुना है यहाँ मुदेेॅ की खोपड़ियाँ दौड़ती हैं और बड़े-बड़े तमाशे होते हैं, पर किसी को अन्दर नहीं जाने देते।सहसा ईदगाह नजर आया ऊपर इमली के घने वृक्षों की छाया नीचे पक्का फर्श है जिस पर जाजिम बिछा हुआ है और रोजेदारों की पंक्तियां एक के पीछे एक न जाने कहां कहाँ तक चली गयी है पक्के जगत के नीचे तक, जहां जाजिम भी नहीं है नये आने वाले आकर पीछे की कतार में खड़े हो जाते हैं आगे जगह नहीं है यहाँ कोई धन और पद नहीं देखता इस्लाम की नजर में सब बराबर हैं इन villagers ने भी वजू किया और पिछली पंकित में खड़े हो गये कितना सुन्दर संचालन है, कितनी सुन्दर व्यवस्था, लाखों सिर एक सिजदे में झुक जाते हैं, फिर सब‍-के-सब एक साथ खड़े हो जाते हैं, एक सथ झुकते हैं, और एक साथ घुटनों के बल बैठ जाते हैं कई बार यही क्रिया होती हैं, जैसे बिजली की लाखों बत्तियाँ एक साथ प्रदीप्त हों और एक साथ बुझ जायँ, और यहि क्रम चलता रहे कितना अपूर्व दृश्य था, जिसकी सामूहिक क्रियाएँ, विस्तार और अन्ततः हदय को श्रद् धा, गर्व और आत्मानन्द से भर देती थीं, मानों भ्रातृत्व का एक सूत्र इन समस्त आत्मा ओं को एक लड़ी में पिरोये हुए है नमाज़ खत्म हो गयी है लोग आपस में गले मिल रहे हैं तब मिठाई और खिलौने की दुकानों पर धावा होता है ग्रामीणों का यह दल इस विषय में बालकों से कम उत्साही नहीं हैं यह देखो, हिंडोला है एक पैसा देकर चढ़ जाओ कभी आसमान पर जाते हुए मालूम होंगे, कभी जमीन पर गिरते हुए यह चर्खि है, लकड़ी के हाथी, घोड़े, ऊँट छड़ों से लटके हुए हैं एक पैसा देकर बैठ जाओ और पच्चीस चक्करों का मजा लो महमूद और मोबसिन और नूरे और सम्मी इन घोड़ों और ऊँटों पर बैठते के लिए नहीं दे सकता सब चर्खियों से उतरते है अब खिलौने लेंगे इधर दुकानों की कतार लगी हुई है तरह -तरह के खिलौने है-सिपाही और गुजरिया, राजा और वकील, भिश्ती और धोबिन और साधू वाह कितने सुन्दर खिलौने हैं←अब बोलना ही चाहते हैं महमूद सिपाही लेता है, खाकी वर्दी और लाल पगड़ी वाला, कन्धे पर बन्दुक रखे हुए मालूम होता है, अभी कवायद किये चला आ रहा है मोहसिन को भिश्ती पसन्द आया कमर झुकी है, ऊपर मशक रखे हुए है मशक का मुँह एक हाथ से पकड़े हुए है कितना प्रसन्न है ? शायद कोई गीत गा रहा है बस, मशक से पानी उड़ेलन ही चाहता है नूरे को वकील से प्रेम है कैसी विद्रवत्ता है उसके मुख पर ? काला चोंगा, नीचे सफेद अचकन, अचकन के वकील से प्रेम है कैसी विद्रवत्ता है उसके मुख पर ? काला चोंगा, नीचे सफेद अचकन, अचकन केसामने की जेब में घड़ी, सुनहरी जंजीर, एक हाथ में कानून चोंगा, नीचे सफेद अचकन, अचकन के सामने की जेब में घड़ी, सुनहरी जंजीर, एक हाथ में कानून का पोथा लिए हुए मालूम होता है, अभी किसी अदालत से जिरह या बहस किये चले आ रहे हैं यह सब दो -दो पैसे के खिलौने हैं हामिद के पास कुल तीन पैसे हैं, इतने महँगे खिलौने वह कैसे ले? खिलौना कहीं हाथ से छूट पड़े तो चूर- चूर हो जाय जरा पानी पड़े तो सारा रंग धुल जाय ऐसे खिलौने लेकर वह क्या करेगा, किस काम के ? हामिद खिलौने कि निन्दा करता है -- मिद्रटी ही के तो हैं, गिरे तो चकनाचूर हो जायँ, लेकिन ललचायी हुई आँखों से खिलौने को देख रहा है और चाहता है कि जरा देर के लिए उन्हे हाथ में ले सकता उसके हाथ अनायास ही लपकते हैं, लेकिन लड़के इतने त्यागी नहीं होते, विशेषकर जब अभी नया शौक है हामिद ललचाता रह जाता है खिलौने के बाद मिठाइयाँ आती हैं किसी ने रेवड़ियाँ ली हैं, किसी ने गुलाबजामुन, किसी ने सोहनहलु आ मजे से खा रहे हैं हामिद उनकी बिरादरी से पृथक है अभागे के पास तीन पैसे हैं क्यों नही कुछ लेकर खाता? ललचायी आँखों से सबकी और देखता है मोहसिन कहता है -- हामिद रेवड़ी ले जा, कितनी खुशबूदार है हामिद को सन्देह हुआ, यह केवल क्रूर विनोद है, मोहसिन इतना उदार नहीं है, लेकिन यह जानकर भी वह उसके पास जाता है मोहसिन दोने से एक रेवड़ी निकाल कर हामिद की ओर बढा़ता है हामिद हाथ फैलाता है मोहसिन रेवड़ी अपने मुँह में रख लेता है महमूद, नूरे और सम्मी खूब तालियाँ बजा बजाकर हँसते हैं हामिद खिसिया जाता है मोहसिन -- अच्छा, अबकी जरूर देंगे हामिद, अल्ला कसम, लेजाओ हामिद --रखे रहो क्या मेरे पास पैसे नहीं हैं सम्मी --तीन ही पैसे तो हैं तीन पैसे में क्या- क्या लोगे? महमूद -- हमसे गुलाब जामुन ले जाओ हामिद, मोहसिन बदमाश है हामिद -- मिठाई कौन बड़ी नेमत हैकिताब में इसकी कितनी बुराहयाँ लिखी हैं --मोहसिन लेकिन दिल में कह रहे होगे कि मिले तो खा लें अपने पैसे क्यों नहीं निकालते ? महमूद -- हम समझते हैं इसकी चालाकी जब हमारे सारे पैसे खर्च हो जायेंगे, तो हमें ललचा ललचाकर खायेगा मिठाइयों के बाद कुछ दुकानें लोहे की चीजों की हैं कुछ गिलट और कुछ नकली गहनों की लड़कों के लिए यहाँ कोई आकर्षण नहीं था वह सब आगे बढ़ जाते हैं हामिद लोहे की दुकान पर रूक जाता है कई चिमटे रखे हुए थे उसे ख्याल आया, दादी के पास चिमटा नहीं है तवे से रोटियाँ उतारती हैं, तो हाथ जल जाता है, अगर वह चिमटा ले जाकर दादी को दे दे, तो वह कितनी प्रसन्न होंगी फार उनकी उँगलियाँ कभी न जलेंगी घर में एक काम की चीज हो जायेगी खिलौने से क्या फायदा? हामिद के साथी आगे बढ़ गये हैं सबील पर सब - के - सब शरबत पी रहे हैं देखो, सब कितने लालची हैं? इतनी मिठाइयाँ लीं, मुझे किसी ने एक भी न दी उस पर कहते हैं, मेरे साथ खेलो मेरा यह काम करो अब अगर किसी ने कोई काम करने को कहा, तो पूछूँगा खायें मिठाइयाँ आप मुँह सड़ेगा, फोड़े-फुन्सियाँ निकलेंगी, आप ही जबान चटोरी हो जायेगी सब - के- सब खूब हँसेंगे कि हामिद ने चिमटा लिया है हँसें मेरी बला से उसने दुकानदार से पूछ -- यह चिमटा कितने का है? दुकानदार ने उसकी ओर देखा और कोई आदमी साथ न देख कर कहा -- यह तुम्हारे काम का नहीं है जी!
- बिकाऊ क्यों नहीं है? और यहाँ क्यों लाद लाये हैं -
- बिकाऊ है क्यों नहीं ?
- तो बताते क्यों नहीं, कै पैसे का है?
- छह पैसे लगेंगे
हामिद का दिल बैठ गया
- ठीक- ठीक पाँच पैसे लगेंगे, लेना हो तो लो, नहीं चलते बनो हामिद ने कलेजा मजबूत करके कहा -- तीन पैसे लोगे यह कहता हुआ वह आगे बढ़ गया कि दुकानदार की घुड़कियाँ न सुने लेकिन दुकानदार ने घुड़कियाँ नहीं दीं बुलाकर चिमटा दे दिया हामिद ने उसे इस तरह कन्धे पर रखा, मानो बन्दूक है और शान से अकड़ता हुआ संगियों के पास आयाजरा सुनें, सब- के- सब क्या - क्या आलोचनाएँ करते हैं मोहसिन ने हँसकर कहा- - यह चिमटा क्यों लाया पगले ? इसे क्या करेगा? हामिद ने चिमटे को जमीन पर पटक कर कहा-- जरा अपना भिश्ती जमीन पर गिरा दो सारी पसलियाँ चूर- चूर हो जायँ बच्चा की महमूद बोला -- तो यह चिमटा कोई खिलौना है हामिद -- खिलौना क्यों नहीं अभी कन्धे पर रखा बन्दूक हो गयी हाथ में लिया, फकीरों का चिमटा हो गया चाहूँ तो इससे मजीरे का काम ले सकता हूँ एक चिमटा जमा दूँ तो तुम लोगों के सारे खिलौनों की जान निकल जाय तुम्हारे खिलौने कितना ही जोर लगावें, वे मेरे चिमटे का बाल भी बाँका नहीं कर सकते मेरा बहादुर शेर है-- चिमटा सम्मी ने खँजरी ली थी प्रभवित होकर बोला- मेरी खँजरी से बदलोगे दोआने की है हामिद ने खँजरी की ओर उपेक्ष से देखा- मेरा चिमटा चाहे तो तुम्हारी खँजरी का पेट फाड़ डाले बस, एक चमड़े की झिल्ली लगा दी, ढब - बोलने लगी जरा - सा पानी लग जाय तो खतम हो जाय मेरा बहादुर चिमटा, आग में, पानी में, तूफान में बराबर डटा खड़ा रहेगा चिमटे ने सभी को मोहित कर लिया, लेकीन अब पैसे किसके पास धरे हैं फिर मेले से दूर निकल आये हैं, नौ कब के बज गये, धूप तेज हो रही है घर पहुँचने की जल्दी हो रही हैे आप से जिद भी करें, तो चिमटा नहीं मिल सकता है हामिद है बड़ा चालाक इसीलिए बदमाश ने अपने पैसे बचा रखे थे अब बालकों के दो दल हो गये हैं मोहसिन, महमूद, सम्मी और नूरे एक तरफ हैं, हामिद अकेला दूसरी तरफ शास्त्रर्थ हो रहा है मोहसिन ने एड़ी - चोटी का जोर लगा कर कहा-- अच्छा पानी तो नहीं भर सकता हामिद ने चिमटे को सीधा खड़ा करके कहा -- भिश्ती को एक डाँट लगायेगा, तो दौड़ा हुआ पानी लाकर द्रवार में छिड़कने लगेगा मोहसिन परास्त हो गया पर महमूद ने कुमुक पहुँचायी अगर बच्चा पकड़ जायें तो अदालत में बँधे- बँधे फिरेंगे तब तो वकील साहब के ही पैर पड़ेंगे हामिद ने मुँह चिढा़कर कहा, यह बेचारे हम बहादुर रुस्तम- ए- हिन्द को पकड़ेंगे अच्छा लाओ अभी जरा कुश्ती हो जाय इसकी सूरत देखकर दूर से भागेगें पकड़ेंगे क्या बेचारे? मोहसिन को एक नयी चोट सूझ गयी - तुम्हारे चिमटे का मुँह रोज आग मेंजलेगा उसने समझा था कि हामिद लाजवाब हो जायेगाः लेकिन यह बात न हुई हामिद ने तुरन्त जवाब दिया-- आग में बहादुर ही कूदते हैं जनाब, आग में कूदना वह काम है, जो यह रुस्तमे- हिन्द ही कर सकता है महमूद ने एक जोर लगाया-- वकील साहब कुर्सी- मेज पर बैठेंगे, तुम्हारा चिमटा तो बावर्चीखाने में जमीन पर पड़ा रहेगा इस तर्क ने सम्मी और नूरे को भी सजीव कर दिया कितने ठिकाने की बात कही है पटठे ने? चिमटा बावर्चीखाने में पड़े रहने के सिवा और क्या कर सकता है हामिद को कोई फड़कता हुआ जवाब न सूझा तो उसने धाँधली शुरू की- मेरा चिमटा बावर्चीखाने में नहीं रहेगा वकील साहब कुर्सी पर बैठेंगे तो जाकर उन्हें जमीन पर पटक देगा और उनका कानून उनके पेट में डाल देगा बात कुछ बनी नहीं खासी गाली - गलौज थी लेकीन कानून को पेट में डालने वाली बात छा गयी ऐसी छा गयी कि तीनो शूरमा मुँह ताकते रह गये, मानो कोई धेलचा कनकौआ किसी गंडेवाले कनकौए को काट गया हो कानून मुँह से बाहर निकलने वाली चीज है उसको पेट के अन्दर डाल दिया जावे, बेतुकी - सी बात होने पर भी कुछ नयापन रखती है हामिद ने मैदान मार लिया उसका चिमटा रुस्तमे - हिन्द है अब इसमें मोहसिन, महमूद, नूरे, सम्मी किसी को भी आपत्ति नहीं हो सकती विजेता को हारने वालों से जो सत्कार मिलना स्वाभाविक हैं, वह हामिद को भी मिला औरां ने तीन- तीन, चार - चार आने पैसे खर्च कियेः पर कोई काम की चीज न ले सके हामिद ने तीन पैसे में रंग जमा लिया सच ही तो है, खिलौनों का क्या भरोसा ? टूट- फूट जायेंगे हामिद का चिमटा बना रहेगा बरसों सिन्ध की शर्त तय होने लगी मोहसिन ने कहा - जरा अपना चिमटा दो, हम भी देखें, हमारा भिश्ती लेकर देखो महमूद और नूरे ने भी अपने - अपनेखिलौने पेश किये हामिद को इन शतों के मानने में कोई आपत्ति न थी चिमटा बारी - बारी से सबके हाथ में गयाऔर उनके खिलौने बारी- बारी से हामिद के हाथ में आये कितने खूबसूरत खिलौने हैं हामिद ने हारने वाले के आँसू पोंछे -- मैं तुम्हें चिढा़ रहा था, सच! यह लोहे का चिमटा भला इन खिलौनों की क्या बराबरी करेगा ? मालूम होता है अब बोले, अब बोले लेकिन मोहसिन की पार्टी को इस दिलासे से सन्तोष नहीं होता चिमटे का सिक्का खूब बैठ गया है चिपका हुआ टिकट पानी से नहीं छूट रहा है मोहसिन-- लेकिन इन खिलौनों के लिए कोई हमें दुआ तो न देगा महमूद -- दुआ के लिए फिरते हैं उल्टे मार न पडे़ अम्माँ जरूर कहेंगी कि मेले में मिटटी के खिलौने तुम्हें मिले हामिद को स्वीकार करना पड़ा कि खिलौनों को देखकर किसी की माँ गतनी खुश न होंगी, जितनी दादी चिमटे को देखकर होंगी तीन पैसों में ही थी तो उसे सब कुछ करना था और उन पैसों के इस उपयोग पर पछतावे की बिल्कुल जरूरत न थी फिर अब तो चिमटा रुस्तमे - हिन्द है और सभी खिलौनों का बादशाह रास्ते में महमूद को भूख लगी उसके बाप ने केले खने को दिये महमूद ने केवल हामिद को साझी बनाया उसके अन्य मित्र मुँह ताकते रह गये यह उस चिमटे का प्रसाद था ग्यारह बजे गाँव में हलचल मच गयी मेले वाले आ गये मोहसिन की छोटी बहन ने दौड़कर भिश्ती उसके हाथ से छीन लिया और मारे खुशी के जो उछली, तो मियाँ भिश्ती नीचे आ गिरे और सुरलोक सिधारे इस पर भाई - बाहिन में मार- पीट हुई दोनों खूब रोये उनकी अम्मा यह शोर सुनकर बिगड़ीं और दोनों को ऊपर से दो- दो चाँटे और लगाये मियाँ नूरे के वकील का अन्त उसके प्रतिष्ठानुकुल इससे ज्यादा गौरवमय हुआ वकील जमीन पर या ताक पर तोनहीं बैठ सकता
उसकी मर्यादा का विचार तो करना ही होगा दीवार में दो खूटियाँ गाड़ी गयीं उन पर एक लकड़ी का पटरा रखा गया पटरे

Categoría

Página web

Dirección

Santa Ana

Notificaciones

Sé el primero en enterarse y déjanos enviarle un correo electrónico cuando Naim publique noticias y promociones. Su dirección de correo electrónico no se utilizará para ningún otro fin, y puede darse de baja en cualquier momento.

Subscribir

Le avisaremos cuando ocurra algo en Santa Ana.