JPS Development Foundation
"If We Change Ourselves, Society Will Also Change"
Boycott This type deshbhakt
1 सिस्टम की कमज़ोरी और 'सॉफ्ट टारगेट' (Soft Target) की राजनीति
प्रशासन अक्सर उन समस्याओं पर तुरंत और कड़े कानून बनाता है जिन्हें लागू करना आसान हो या जहाँ उन्हें सीधे जनता का दबाव झेलना पड़ रहा हो।
कुत्तों के मामले में: चूंकि कुत्ते इंसानी गलियों में रहते हैं, उन्हें पकड़ना, उन पर पाबंदियाँ लगाना या सोसायटियों में नियम बनाना प्रशासन के लिए प्रशासनिक रूप से आसान (Soft Target) होता है।
बंदरों के मामले में: बंदरों को पकड़ने के लिए भारी-भरकम बजट, पिंजरे, लंगूरों की व्यवस्था और सबसे बढ़कर वन विभाग और नगर निगम के बीच आपसी तालमेल चाहिए होता है, जिसकी हमारे सिस्टम में भारी कमी है। इसलिए प्रशासन इस ज़िम्मेदारी को एक-दूसरे पर टालकर (Red Tapism) अपना पल्ला झाड़ लेता है।
2. 'जिम्मेदारी से भागने' का कानूनी बहाना
अदालतें या सरकारें जब किसी गंभीर मुद्दे पर "यह हमारे अधिकार क्षेत्र (Jurisdiction) में नहीं आता" या "इसके लिए वन्यजीव कानून आड़े आ रहे हैं" कहती हैं, तो एक आम पीड़ित नागरिक को यही लगता है कि तंत्र अपनी नाकामी छुपाने के लिए तकनीकी बहानों का सहारा ले रहा है। छत से गिरकर किसी की जान जाना या अपाहिज हो जाना उतनी ही बड़ी त्रासदी है, चाहे वजह कुत्ता हो या बंदर। लेकिन विभागों की आपसी खींचतान में नुकसान हमेशा आम जनता का ही होता है।
3. कानून की किताबी बातें बनाम ज़मीनी हकीकत
भारतीय कानून में कागज़ी तौर पर बहुत बारीक अंतर (घरेलू पशु बनाम वन्यजीव) किए गए हैं। लेकिन एक आम नागरिक जो रोज़ सुबह बंदरों के डर से अपनी छत पर जाने से डरता है या जिसके बच्चे पार्क में सुरक्षित नहीं हैं, उसके लिए यह कानूनी परिभाषाएँ बेमानी हैं। जनता को 'वाइल्डलाइफ एक्ट' की धाराओं से मतलब नहीं है, उन्हें सिर्फ अपनी सुरक्षा से मतलब है।
कड़वा सच: आपकी यह बात सिस्टम की उसी बड़ी खामी पर चोट करती है जहाँ 'सहूलियत के हिसाब से कार्रवाई' की जाती है। जब तक सरकारें वन्यजीव कानूनों में व्यावहारिक संशोधन करके स्थानीय प्रशासन को बंदरों जैसी गंभीर समस्या से निपटने के लिए सीधे अधिकार और संसाधन नहीं देंगी, तब तक जनता को यही लगेगा कि सिस्टम सिर्फ 'आसान रास्तों' को चुनकर अपनी ज़िम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहा है।
"जो कमाने की क्षमता रखता है, बोल सकता है, सोच सकता है और अपने कर्मों के लिए स्वयं उत्तरदायी है, उसे किसी की भी दावत खाने की पूरी स्वतंत्रता है।
पर जो जीव पूरी तरह मनुष्य की दया और संरक्षण पर निर्भर है, उसे भोजन कराने वाले को ही दोषी ठहराया जाएगा।
वाह! सचमुच हम बहुत आधुनिक हो गए हैं।"
क्या इंसाफ सिर्फ़ बेजुबानों के लिए है?
खतरनाक कुत्तों को दया-मृत्यु का इंजेक्शन देने की बात हो रही है...
लेकिन एक सवाल आज भी ज़िंदा है—
जो बलात्कारी हैं,
जो हत्यारे हैं,
जो मासूमों का बचपन और परिवार उजाड़ देते हैं,
और कानून की अदालतों में दोषी भी सिद्ध हो चुके हैं...
क्या उनके लिए भी कभी ऐसा कोई आदेश आएगा?
बेजुबान कुत्तों ने न किसी बेटी की अस्मिता लूटी,
न किसी माँ की गोद उजाड़ी,
न किसी परिवार को मौत के आँसू दिए।
फिर भी मौत उनके हिस्से आई...
और अनेक जघन्य अपराधी आज भी
कानून की लंबी गलियों में
खुली साँस ले रहे हैं।
न्याय का तराजू सबके लिए बराबर होना चाहिए।
JPS DEVELOPMENT FOUNDATION
"संवेदना से सेवा की ओर"
21/05/2026
“बेजुबान कुत्तों को दया-मृत्यु का इंजेक्शन देने का आदेश सुनकर मन प्रश्न करता है—यदि बलात्कारियों, हत्यारों और जघन्य अपराधों में दोषी सिद्ध अपराधियों के लिए भी ऐसा ही कोई आदेश जारी हो जाए, तो शायद ये बेजुबान भी मुस्कुराकर मौत को गले लगा लें। क्योंकि उन्होंने किसी मासूम की अस्मिता नहीं लूटी, किसी परिवार को उजाड़ा नहीं, फिर भी मृत्यु उनके हिस्से आई; जबकि अनेक घोर अपराधी आज भी कानून की लंबी गलियों में सांस ले रहे हैं।”
PETA India
18/05/2026
JPS Development Foundation” के माध्यम से समाजहित में शेल्टर होम, पशु चिकित्सा एवं पुनर्वास केंद्र, बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य तथा पर्यावरण संरक्षण जैसे क्षेत्रों में कार्य करने का संकल्प लिया है।
इन जनसेवा कार्यों को सही दिशा एवं प्रभावी रूप से आगे बढ़ाने हेतु आपके आशीर्वाद, मार्गदर्शन एवं प्रेरणा की आवश्यकता है। कृपया समय निकालकर हमें अपने बहुमूल्य सुझाव एवं मार्गदर्शन प्रदान करने की कृपा करें, ताकि संस्था समाज के लिए बेहतर कार्य कर सके।
सादर
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06/05/2026
🚨 इंसानियत शर्मसार – सख्त कार्रवाई की मांग 🚨
लखनऊ के कृष्णा विहार कॉलोनी, रायबरेली रोड में एक बेहद दर्दनाक और निंदनीय घटना सामने आई है, जहाँ एक कार चालक ने सड़क पर सो रहे बेज़ुबान कुत्ते को जानबूझकर कुचल दिया।
🚗 वाहन संख्या: 21BH 0861 A
यह घटना केवल लापरवाही नहीं बल्कि जानबूझकर की गई क्रूरता (Animal Cruelty) है, जो कि भारतीय कानून के तहत दंडनीय अपराध है।
📜 इस कृत्य पर निम्न धाराओं में कार्रवाई होनी चाहिए:
• Prevention of Cruelty to Animals Act, 1960 – Section 11
• IPC Section 428/429 (जानवर को नुकसान/मृत्यु पहुँचाना)
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आप सभी से निवेदन नहीं, मांग है कि:
✔️ आरोपी की तुरंत पहचान कर गिरफ्तारी की जाए
✔️ CCTV/वीडियो के आधार पर सख्त कानूनी कार्रवाई हो
✔️ भविष्य में ऐसे मामलों के लिए उदाहरण स्थापित किया जाए
अगर आज हम चुप रहे, तो कल इंसानियत पूरी तरह मर जाएगी।
बेज़ुबान के लिए आवाज़ उठाना ही असली मानवता है।
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