Mekchand nirala nirala

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जय भीम जय सतनाम

13/07/2026

एक विश्व प्रसिद्ध वैज्ञानिक जो 14 दिनों से भूख हड़ताल पर है और देश चुप है राष्ट्रीय शर्म की बात है

Photos from Mekchand nirala nirala's post 13/07/2026

अन्ना हजारे ने 11 दिनों के बाद ही अपना आमरण अनशन समाप्त कर दिया था— उनके सामने कांग्रेस सरकार को झुकना पड़ा था।

जबकि सोनम वांगचुक पिछले 14 दिन से आमरण भूख हड़ताल पर हैं— लेकिन BJP सरकार वहां झांकने भी नहीं जा रही है।

सोनम अनशन के लिए गलत सरकार चुन ली— यहां इस्तीफे नहीं होते जी..!!

05/07/2026

पद्म भूषण पद्म विभूषण सम्मानित पंडवानी गायिका तीजन बाई के निधन पर भावपूर्ण श्रद्धांजली।

14/04/2026

क्या आप जानते हैं कि डॉ. भीमराव अंबेडकर जी बीमार होते हुए भी देश के भारतीय संविधान की रचना कर रहे थे… यह सिर्फ एक जानकारी नहीं, बल्कि त्याग और समर्पण की ऐसी सच्ची कहानी है, जो हर इंसान को सोचने पर मजबूर कर देती है। उस समय बाबा साहेब कई गंभीर बीमारियों से जूझ रहे थे—शरीर कमजोर हो चुका था, दर्द लगातार रहता था, लेकिन उनके इरादे पहले से भी ज्यादा मजबूत थे। दिन हो या रात, वे लगातार संविधान के हर एक शब्द, हर एक अधिकार और हर एक कानून पर गहराई से काम करते रहते थे, क्योंकि उनके मन में सिर्फ एक ही विचार था—इस देश का हर इंसान बराबरी और सम्मान के साथ जी सके। कई बार उनके साथियों ने उन्हें आराम करने की सलाह दी, लेकिन बाबा साहेब का जवाब हमेशा यही होता था कि “अगर मैं आज रुक गया, तो देश के करोड़ों लोगों के अधिकार अधूरे रह जाएंगे।” उनकी यही सोच उन्हें बाकी लोगों से अलग बनाती थी। उन्होंने अपनी पीड़ा को कभी अपने कर्तव्य के बीच नहीं आने दिया और एक ऐसा संविधान तैयार किया, जो आज भी हर भारतीय को न्याय, स्वतंत्रता और समानता का अधिकार देता है।
यह कहानी हमें सिखाती है कि महान लोग परिस्थितियों के आगे नहीं झुकते, बल्कि अपने लक्ष्य के लिए हर दर्द सहकर भी आगे बढ़ते हैं।

क्या हम अपने छोटे-छोटे बहानों को छोड़कर अपने कर्तव्यों के लिए उतनी ही ईमानदारी से मेहनत कर पाते हैं?
#जयभीम #भारतीय_संविधान

18/01/2026

सत्ता हमेशा सच्चा से डरती हैं,
इसलिए वह सवाल करने वालों को चुप करता है।

18/01/2026

बाबा बने तो आस्था, अंबेडकर बने तो FIR — ये कैसी दोहरी नीति सरकार की?

जब कोई ढोंगी बाबा बनकर समाज को गुमराह करे तो सब ठीक,
लेकिन संविधान निर्माता अंबेडकर की बात उठे तो FIR तय!
कानून सबके लिए बराबर होना चाहिए, विचारधारा देखकर नहीं।
ये सवाल सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं, लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की आज़ादी का है।

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