BenZil
न तो सत्यता की प्रतिमूर्ति हूं और
न ही निष्कपटता की प्रतिछाया हूं
30/12/2024
01/11/2024
तिमिर को हाथ मलता छोड़ आया हूँ
दिया इक घर में जलता छोड़ आया हूँ
चला आया हूँ घर से तन को बस लेकर
वहीं मन को तड़पता छोड़ आया हूँ
इसी उम्मीद में कल फिर से निकलेगा
मै सूरज आज ढलता छोड़ आया हूँ
हमारी आँख से लूटे गए तो क्या ?
हजारों ख़्वाब पलता छोड़ आया हूँ
सितारा मेरी क़िस्मत का भी चमकेगा
मै इक जुगनू चमकता छोड़ आया हूँ
यहाँ शबनम की बूंदे भी हैं तरसाती
वहाँ सावन बरसता छोड़ आया हूँ
जो जाता ही नही है गांव तक मेरे
नगर का वो मै रस्ता छोड़ आया हूँ
कहीं पथरा न जाएं उनकी वो आँखें
मै जिनको राह तकता छोड़ आया हूँ
नही आया अभी तक शेर ए मक़्ता है
ग़ज़ल उसको जो पढ़ता छोड़ आया हूँ
BenZil
Website
Address
Ayodhya
Alerts
Be the first to know and let us send you an email when BenZil posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.