Ashta Chakra

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Truth is one but the wise speak of it in many ways. Spirituality, Awakening, Religion and Ayurveda

Ashta Chakra aims to promote and spread the principles of Santana Dharma, the Hindu religion among the general public by sharing knowledge from ancient sacred vedic texts of India including Vedas, Shrimad Bhagwad Gita, Ramayana, Upanishads, Puranas, Discourses of eminent Saints and other character-building books & magazines. Our objective is to bring together Spirituality, Yoga and Ayurveda with a focus on bringing together ancient Vedic traditions and medicines inspired from Ayurveda. We have a mission to bring together the best of ancient traditions and modern medicine for a healthy and fulfilling life. Our products are sourced from the finest ingredients that come from Himalayas, with the focus on quality, purity, and effectiveness. We strive for the betterment of life and the well-being of all with a focus to promote the art of living as propounded in the Shrimad Bhagwad Gita and other sacred Vedic texts of India for peace and happiness and the ultimate upliftment of mankind. We believe that everyone has the right to have a life of dignity and peace. We intend to contribute in creating a society where people of all communities live with dignity in peace and harmony. Veda means the knowledge of the true nature of life, vedic means relating with the truth concerning the true meaning of life. If a person realizes the true meaning of life, they can function perfectly according to natural laws. In this way all the aspects of life will be spontaneously harmonious. At Ashta Chakra we intend to provide a broad range of resources, supplements and medicines for Indian and International audience. Our focus on Vedic knowledge systems of Ayurveda along with the background system of ‘Sanatana Dharma’ to create a platform for people to share their knowledge and experiences.

Photos from Ashta Chakra's post 31/10/2024

सुबह की कोमल रौशनी में, आकाश ने अपनी दिव्यता से दरवाज़े खोले और माँ लक्ष्मीजी अपने कमल के आसन पर विराजमान होकर भक्तों के बीच उतरीं। उनके शांत और करुणामय मुखमंडल तथा सुनहरे आभूषणों ने सूर्य की किरणों को समेटते हुए एक गर्माहट भरी आभा बिखेरी, जिससे चारों ओर शांति और समृद्धि का वातावरण फैल गया। फूलों की पंखुड़ियाँ हल्की हवा में तैर रही थीं, और माता लक्ष्मी ने अपनी हथेलियों को आशीर्वाद की मुद्रा में फैलाया।

एक-एक करके, अलग-अलग स्थानों से आए हुए लोग उनके पास पहुँचे, उनकी आँखों में उम्मीद और इच्छाएँ झलक रही थीं। उनमें से एक किसान आगे बढ़ा, जिसके हाथ मेहनत की कठोरता को दर्शा रहे थे। उसने फुसफुसाते हुए एक समृद्ध फसल की कामना की। लक्ष्मीजी की दृष्टि कोमल हो गई, और उन्होंने प्राचीन आशीर्वादों में फल-फूल और उन्नति का वरदान दिया, जिससे उनके खेत हरे-भरे और उपजाऊ हो गए। उनके स्पर्श से सूखी ज़मीन में जीवन आ गया, और वो उपजाऊ भूमि में बदल गई।

उसी समय, भगवान विष्णु वहां प्रकट हुए, उनके मुख पर भी वही शांति दिखाई दे रही थी। “लक्ष्मी,” उन्होंने कहा, उनकी आवाज में एक संतुलन था, “तुमने मानवों को शांति और समृद्धि दी है, लेकिन संतुलन भी आवश्यक है। क्या वे तुम्हारे उपहारों का महत्व समझ पाएंगे अगर उन्होंने कभी कठिनाइयों का सामना नहीं किया?”

लक्ष्मी मुस्कुराईं, उनकी आँखों में ज्ञान और करुणा का प्रकाश था। “विष्णु,” उन्होंने उत्तर दिया, “समृद्धि केवल धन में नहीं होती, बल्कि यह ज्ञान, दया और विनम्रता में भी होती है। मैं उन्हें उतना ही देती हूँ जितना उनके जीवन में उन्नति के लिए आवश्यक है। जीवन की कठिनाइयाँ भी उपहार हैं, जो उन्हें धैर्य और कृतज्ञता सिखाती हैं।”

अपने हाथों की एक कोमल लहर के साथ, उन्होंने वहाँ उपस्थित लोगों पर एक स्वर्णिम आभा बिखेरी। सभी व्यक्ति, उनकी इस आशीर्वाद को महसूस करते हुए, आदरपूर्वक उनके समक्ष नतमस्तक हो गए। उनके दिलों में एक नई दिशा और उद्देश्य का जन्म हुआ। लक्ष्मीजी के उपहार केवल धन नहीं, बल्कि शक्ति, प्रेम, और जीवन की क्षणिक खुशियों का मूल्य समझने की बुद्धि थे।

जैसे ही संध्या का समय हुआ, माँ लक्ष्मीजी वापस उठीं, और उनका दिव्य रूप इस बात की याद दिला गया कि सच्ची समृद्धि केवल भौतिक संपत्तियों में नहीं, बल्कि आत्मा की समृद्धि में होती है। एक अंतिम दृष्टि के साथ, वे अदृश्य हो गईं, और वहाँ उपस्थित लोग उनके आशीर्वाद से आलोकित और कृतज्ञ हो गए, हर आत्मा माँ लक्ष्मी की दिव्य कृपा से सदा के लिए परिवर्तित हो गई।

🌸 माँ लक्ष्मी का प्रेरणादायक मंत्र 🌸

ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः।

हे माँ लक्ष्मी, कृपा करके मेरे जीवन में समृद्धि, शांति, और सुख का वरदान दें। आपकी कृपा से मेरा घर धन-धान्य से परिपूर्ण हो, मेरा हृदय प्रेम और करुणा से भरा हो। आपके आशीर्वाद से मुझे जीवन में संतुलन और आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त हो, ताकि मैं सदैव आपकी कृपा के साथ आगे बढ़ता रहूं। आपकी दिव्य ऊर्जा मेरे जीवन में प्रकाश फैलाए और मुझे हर चुनौती का सामना करने की शक्ति दे।

ॐ महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णुपत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात्।

इस मंत्र में माँ लक्ष्मी को विष्णु की पत्नी और दिव्य शक्ति के रूप में सम्मान दिया गया है और उनसे हमारे जीवन को प्रेरित करने की प्रार्थना की गई है। हम माँ लक्ष्मी से ज्ञान और ऊर्जा प्राप्त करने की प्रार्थना कर रहे हैं।

इस प्रार्थना और मंत्र में माँ लक्ष्मी से आशीर्वाद मांगते हुए समृद्धि, शांति, प्रेम, करुणा, और आध्यात्मिक शक्ति की कामना की गई है, ताकि हमारा जीवन सुखमय और संतुलित रहे।

ॐ महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णुपत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात्।

इस मंत्र में माँ लक्ष्मी को विष्णु की पत्नी और दिव्य शक्ति के रूप में सम्मान दिया गया है और उनसे हमारे जीवन को प्रेरित करने की प्रार्थना की गई है। हम माँ लक्ष्मी से ज्ञान और ऊर्जा प्राप्त करने की प्रार्थना कर रहे हैं।

इस मंत्र में माँ लक्ष्मी से आशीर्वाद मांगते हुए समृद्धि, शांति, प्रेम, करुणा, और आध्यात्मिक शक्ति की कामना की गई है, ताकि हमारा जीवन सुखमय और संतुलित रहे।

#लक्ष्मी #दीवाली #शान्ति #दीपावली #शांति #संतुलना #सकून्ता #दिव्य स्मृति #भक्ति

31/10/2024

✨🌟 आप सभी को अष्टाचक्र की ओर से दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं 🌟✨

आपके जीवन में दीपावली का यह प्रकाश पर्व अनगिनत खुशियों और सफलता की उज्जवल किरणें लेकर आए। माँ लक्ष्मी और भगवान गणेश की कृपा से आपका हर दिन मंगलमय और सुख-समृद्धि से परिपूर्ण हो।

🎉 🪔 🏡 शुभ दीपावली! 🏡 🪔 🎉

#दीपावली #शुभकामनाएं

24/10/2024

भविष्य बद्री: कलियुग का अंत और धर्म की पुनर्स्थापना की भविष्यवाणी

हिमालय की शांत और दिव्य गोद में, एक ऐसा स्थान छिपा है जो समय की परतों में बसा हुआ है - भविष्य बद्री। यह सिर्फ एक तीर्थ स्थान नहीं, बल्कि आने वाले समय की एक झलक है। माना जाता है कि जब समय का चक्र अपने अंत की ओर बढ़ेगा, जब धर्म पर संकट गहरा होगा, तब यहीं से पुनः धर्म की स्थापना होगी। यही स्थान भगवान विष्णु का अगला धाम बनेगा, जहां से वो अपने कल्कि अवतार में प्रकट होकर अधर्म का नाश करेंगे।

आज हम आपको भविष्य बद्री की उसी कहानी से रूबरू करवाने जा रहे हैं, जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। #भविष्य_बद्री #पंच_बद्री_यात्रा #हिमालय_तीर्थ #आध्यात्मिक_यात्रा #हिंदू_पौराणिक_कथा #कलयुग_का_अंत #विष्णु_अवतार #कल्कि_अवतार #हिमालयी_मंदिर
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#हिमालय_की_पवित्र_भूमि

अष्टाचक्र: वैदिक ज्ञान, योग और ध्यान से जीवन में संतुलन कैसे पाएं #अष्टाचक्र #वैदिकज्ञान #योग 20/10/2024

वैदिक ज्ञान, योग और ध्यान से जीवन में संतुलन कैसे पाएं ?

अष्टाचक्र: वैदिक ज्ञान, योग और ध्यान से जीवन में संतुलन कैसे पाएं #अष्टाचक्र #वैदिकज्ञान #योग नमस्कार! आज के वीडियो में हम बात करेंगे "अष्टाचक्र" के सिद्धांतों पर, जो प्राचीन वैदिक ज्ञान, योग, ध्यान और आयुर्वेद.....

04/10/2024

कुरुक्षेत्र की रणभूमि: दुर्योधन की गुरु द्रोणाचार्य से वार्ता

इस वीडियो में हम उस महत्वपूर्ण क्षण को देखते हैं, जब कुरुक्षेत्र की युद्धभूमि पर दुर्योधन अपने गुरु द्रोणाचार्य से मिलकर पांडव सेना की शक्ति का वर्णन करता है। इस वार्ता के माध्यम से महाभारत के युद्ध की शुरुआत होती है।

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04/10/2024

माता ब्रह्मचारिणी की तपस्या और शिव से विवाह | नवरात्रि का दूसरा दिन |

माता ब्रह्मचारिणी की कठोर तपस्या और अडिग भक्ति का प्रतीक है नवरात्रि का दूसरा दिन। जानिए कैसे माता ने हजारों वर्षों तक तपस्या कर भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त किया और संयम, धैर्य, और समर्पण की मिसाल कायम की।

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03/10/2024

क्या हम अपने मन को स्थिर कर सकते हैं? क्या हम सांसारिक कर्मों के अधीन होकर ईश्वर से जुड़ सकते हैं? क्या हम वैदिक ज्ञान से अपने जीवन को बदल सकते हैं?

Photos from Ashta Chakra's post 09/09/2024

गणेश पूजा: चतुर्थी से विसर्जन तक का महत्व

गणेश पूजा, हिंदू धर्म में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और पवित्र उत्सव है। गणेश चतुर्थी से लेकर गणेश विसर्जन तक का यह पर्व न केवल भक्तों के लिए खुशी और उल्लास का समय होता है, बल्कि यह उनके जीवन में सुख, समृद्धि और शांति लाने का भी वचन देता है। गणेश चतुर्थी की पूजा के दौरान भगवान गणेश की आराधना, उनकी पूजा और विसर्जन की प्रक्रिया, सभी का महत्वपूर्ण धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। इस लेख में हम गणेश पूजा के महत्व को विस्तार से समझेंगे, साथ ही हिन्दू ग्रंथों से उद्धरण प्रस्तुत करेंगे जो इस पर्व की महत्वता को स्पष्ट करेंगे।

गणेश चतुर्थी, भगवान गणेश के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। यह उत्सव श्रावण मास की चतुर्थी को मनाया जाता है, जो आमतौर पर अगस्त या सितंबर में आता है। भगवान गणेश, जिन्हें विघ्नहर्ता और बुद्धि, समृद्धि और भाग्य के देवता के रूप में पूजा जाता है, की आराधना इस दिन विशेष रूप से की जाती है।

हिंदू ग्रंथों में गणेश पूजा के महत्व का स्पष्ट उल्लेख मिलता है। गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की पूजा करने से जीवन की समस्त बाधाएं समाप्त हो जाती हैं और व्यक्ति को समृद्धि और सुख की प्राप्ति होती है। यह मान्यता भी है कि गणेश पूजा के माध्यम से व्यक्ति की सभी इच्छाएं पूर्ण होती हैं और उसे मानसिक शांति मिलती है।

श्लोक संदर्भ:

1. गणेश स्तोत्र - गणेश चतुर्थी पर:


गणपति महाकाय सुर्यकोटी समप्रभ:
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा


इस श्लोक में भगवान गणेश की महिमा का वर्णन किया गया है। इसमें कहा गया है कि भगवान गणेश की महाकाय और सूर्य के समान प्रभा वाले स्वरूप की पूजा करने से सभी विघ्न दूर हो जाते हैं और सभी कार्य सफल होते हैं।

2. गणेश अस्तक्शर मंत्र:


ॐ गं गणतये नमः


यह मंत्र गणेश पूजा का एक प्रमुख मंत्र है और इसे भगवान गणेश की उपासना के दौरान उच्चारित किया जाता है। यह मंत्र भगवान गणेश की कृपा प्राप्त करने के लिए प्रयोग में लाया जाता है।

गणेश पूजा की विधि विभिन्न चरणों में विभाजित होती है:

1. गणेश चतुर्थी की तैयारी:
गणेश चतुर्थी के दिन, घर या मंदिर में गणेश प्रतिमा स्थापित की जाती है। इस अवसर पर विशेष पूजा और आरती की जाती है। भक्त गणेश की प्रतिमा को फूल, फल, मोदक, और अन्य भोग अर्पित करते हैं।

2. नित्य पूजा:
पूजा के दौरान भगवान गणेश के विभिन्न मंत्रों का उच्चारण किया जाता है। विशेष रूप से "ॐ गणपतये नमः" और "गणपति स्तोत्र" का जाप किया जाता है। इसके अतिरिक्त, गणेश अष्टकशरी मंत्र का भी उच्चारण किया जाता है।

3. भजन और कीर्तन:
पूजा के दौरान गणेश भजन और कीर्तन का आयोजन किया जाता है। यह धार्मिक उत्सव और सामूहिक आराधना का हिस्सा होता है, जो सभी भक्तों को एकत्र करता है और सामूहिक पूजा का आनंद प्रदान करता है।

विसर्जन: गणेश पूजा की समाप्ति

गणेश पूजा के समापन पर, गणेश विसर्जन की प्रक्रिया होती है। विसर्जन, गणेश चतुर्थी के दसवें दिन, गणेश चतुर्थी के समाप्त होने के दिन, समुद्र, नदी या अन्य जलस्रोत में भगवान गणेश की प्रतिमा को विसर्जित करने का कार्य होता है। विसर्जन के साथ ही भगवान गणेश को उनके निवास स्थान पर लौटने के लिए विदा दी जाती है। इस प्रक्रिया के दौरान भक्त गणेश को भावुक विदाई देते हैं और उनके अगले वर्ष आने की कामना करते हैं।

श्लोक संदर्भ:

1. विसर्जन श्लोक:


असतो मा सद्गमय
तमसो मा ज्योतिर्गमय
मृत्योर मा अमृतं गमय


इस श्लोक में भगवान गणेश से यह प्रार्थना की जाती है कि वे हमें अंधकार से प्रकाश की ओर, मृत्यु से अमृत की ओर ले जाएं। यह श्लोक विसर्जन के समय आशा और प्रार्थना का प्रतीक होता है।

उपसंहार

गणेश पूजा, चतुर्थी से विसर्जन तक, न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान है बल्कि यह जीवन में नई शुरुआत, समृद्धि और सुख-शांति की कामना का प्रतीक भी है। गणेश पूजा के दौरान भगवान गणेश की आराधना, भक्ति और श्रद्धा के साथ की जाती है, जो भक्तों के जीवन को सकारात्मक ऊर्जा और खुशहाली से भर देती है। हिंदू ग्रंथों और श्लोकों के माध्यम से गणेश पूजा के महत्व को समझना और इसका पालन करना, सभी भक्तों के लिए एक महत्वपूर्ण अनुभव है। इस प्रकार, गणेश चतुर्थी से विसर्जन तक का पर्व धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

संदर्भ:

स्रोत: भारत सरकार की वेबसाइट
https://devasthan.rajasthan.gov.in/List_of_festivals_year_2018.asp
हिंदू ग्रंथों में गणेश पूजा का उल्लेख

स्रोत: हिंदू धार्मिक ग्रंथ
https://www.scribd.com/document/463997173/puja-mantra-docx

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