Workers Unity
मेहनतकश आबादी का अपना मीडिया
03/09/2026
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने गैर-कानूनी हिरासत के लिए योगी सरकार पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया.
नोएडा प्रोटेस्टः आकृति चौधरी की एनएसए हिरासत रद्द, योगी सरकार को लताड़ा, लगाया 5 लाख रु का ज़ुर् इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बुधवार को आकृति चौधरी की राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून (एनएसए) के तहत हिरासत रद्द कर दी है। लाइव ल....
27/08/2026
ये हैं हिसार (हरियाणा) की सफ़ाई कर्मचारी मंजीत कौर। पुलिस की ज़्यादती का सामना करते हुए उनका एक छोटा सा वीडियो वायरल हो गया है।
हिसार की सफ़ाई कर्मचारी मंजीत कौर कौन हैं, जिनका वीडियो सोशल मीडिया पर हो रहा वायरल ये हैं हिसार (हरियाणा) की सफ़ाई कर्मचारी मंजीत कौर। पुलिस की ज़्यादती का सामना करते हुए उनका एक छोटा सा वीडियो वायर....
23/08/2026
नोएडा प्रोटेस्ट के ठीक चार महीने बाद जब पूरे देश 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मना रहा था, सूरत में एम्ब्रॉयडरी के मज़दूरों में बेचैनी छाई हुई थी और 16 अगस्त, दिन रविवार को हज़ारों मज़दूर सड़कों पर उतर आए।
नोएडा में सैलरी की डिमांड के बाद सूरत में संडे की छुट्टी को लेकर सड़कों पर उतरे मज़दूर बीते अप्रैल में जब पूरे देश में आंबेडकर जयंती मनाई जा रही थी, उसके एक दिन पहले यानी 13 अप्रैल को नोएडा में सैलरी बढ़ाए...
21/08/2026
डॉ. तुलसीराम ने नरेंद्र मोदी और संघ परिवार के बारे में आज से 12 साल पहले जो लिखा था, पूरा देश उसका साक्षात् गवाह है। 15 अगस्त 2026 को लाल क़िले की प्राचीर से पीएम नरेंद्र मोदी ने दिमाग़ी नक्सल की बात छेड़ी। डॉ. तुलसीराम के लेख से पता चलता है कि मोदी जिस भाषा का शब्दावली का चुनाव करते हैं उसका स्रोत कहां है।
#संघ
#दलित
मोदी सीएम पीएम बनने से पहले क्या थे और उनके गुजरात मॉडल में दलितों की क्या स्थिति थी?- नज़रिया By डॉ. तुलसीराम (यह लेख दिल्ली से निकलने वाले हिंदी अख़बार जनसत्ता में 4 मई, 2014 को प्रकाशित हुआ था। जेएनयू में प्रोफ़ेस....
02/08/2026
अभिजीत दीपके जब भारत आए तो उनकी तस्वीरें बीआर आंबेडकर की कथित पुस्तक My Autobiography की प्रति हाथ में लिए हुए सामने आईं। ऐसी कोई आत्मकथा आंबेडकर ने उस रूप में नहीं लिखी थी, दरअसल यह पुस्तक प्रभात प्रकाशन द्वारा प्रकाशित है, जो आरएसएस से जुड़ा है और जो संघ साहित्य की प्रकाशित करता है।
इसे दीपके और आरएसएस के बीच वैचारिक संबंध के रूप में नहीं पढ़ा जाना चाहिए। अधिक संभावना यही है कि वे आंबेडकर के वास्तविक लेखन से पर्याप्त परिचित नहीं थे।
लेकिन इसने इस आंदोलन की एक सीमा ज़रूर दिखा दी।
कॉकरोच जनता पार्टी की नियति जंतर मंतर के पुराने आंदोलनों से कितनी अलग होगी? By आनंद तेलतुमड़े यह लेख फ़्रंट लाइन में आठ जुलाई यानी आंदोलन जोर पकड़ने के 10 दिन पहले प्रकाशित हुआ था। इसे यहां अद्य...
01/08/2026
भाजपा और आरएसएस का सांस्कृतिक वर्चस्व पूरी हमलावर भाषा के साथ आया है जिसमें गालियां अभिन्न हिस्सा थीं। इसके बावजूद प्रधानमंत्री का दावा था कि वे हर रोज दो-तीन किलो गालियां खाते हैं।
यह दावा इसलिए करते रहे हैं ताकि भारतीय राजनीति में उन्हें शिष्ट माना जाए। निश्चित ही, औपचारिक स्थलों पर, जैसे युवा-बच्चों के बीच या धार्मिक स्थलों पर एक खास संस्कृत से बोझिल हुई हिंदी में वह बोलते हुए दिखते हैं। भाषा की शुचिता को यहीं से हासिल करते हैं।
इसके बरक्स आप जंतर-मंतर पर युवाओं की भाषा हिंदी, उर्दू और अंग्रेजी से भरी हुई दिखती है। ये आम भाषा है जो दिल्ली जैसे शहर में बोली जा रही है।
जंतर मंतर प्रोटेस्टः सांस्कृतिक प्रतिरोध बनाम प्रतिरोध की संस्कृति- क्या जेन ज़ी की भाषा अभद् By अंजनी कुमार सांस्कृतिक प्रतिरोध तब दुविधाग्रस्त हो जाता है जब उसे जरूरतों से नहीं भाषा की शिष्टता में उलझा दिया ....
28/07/2026
पंजाब में अपनी मांगों को लेकर हड़ताल कर रहे सफाई कर्मचारियों पर बर्बर पुलिस लाठी चार्ज के बाद दबाव में आई भगवंत मान सरकार ने सैलरी डी दोगुना बढ़ाने का एलान किया है।
#पंजाब
#सफ़ाईकर्मचारी
पंजाब में महिला सफ़ाई कर्मचारियों पर लाठीचार्ज से भारी गुस्सा, ‘आप’ सरकार ने सैलरी 20,500 रुपये की पंजाब में अपनी मांगों को लेकर हड़ताल कर रहे सफाई कर्मचारियों पर बर्बर पुलिस लाठी चार्ज के बाद दबाव में आई भगवंत मा.....
27/07/2026
बहुत से बुद्धिजीवी इस बात की तह में गोते लगाते रहे कि अभिजीत दीपके और सोनम वांगचुक को किसने प्लांट किया है? वे किसकी सेवा करने के लिए आये हैं? वे कितनी दूर तक जाएंगे? आदि। इन तर्कों की सीमाएं यही थीं कि वे उस संभावनाओं को नहीं देख रहे थे जो इनके इर्द-गिर्द बन रही थीं।
जंतर मंतर पर कॉकरोच युवा आंदोलन को समझने में बुद्धिजीवियों से कहां चूक हुई? By अंजनी कुमार इस आंदोलन को क्या नाम दिया जाए, इस बात पर भी बहस चल पड़ी है। सोनम वांगचुक अपने गांधीवादी तरीके और संविध...
25/07/2026
क्या ये कॉकरोच मिलकर हमें इस गर्त से निकाल सकते हैं? आसान नहीं होगा। भारत में अब तक हुए जन आंदोलनों के नतीजे उत्साहजनक नहीं रहे हैं। अगर इन्हें टूटे हुए सपनों और महत्वाकांक्षाओं का संक्षिप्त इतिहास कहें, तो ज़्यादा बेहतर होगा।
कॉकरोच आंदोलन को लेकर मशहूर लेखिका अरुंधति रॉय का भ्रम कैसे टूटा? By अरुंधति रॉय बरसों बाद अपने हिंदुस्तानी होने पर इतना गर्व महसूस हो रहा है। जब लगा कि अब कोई उम्मीद नहीं बची है, वो आ ....
25/07/2026
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