Kusumbhatt
उत्तराखंडी लोकगायिका , काव्य और सहित्य लेखन , संगीतकार , Gazal & bhajn singer Also
20/09/2026
📚 उत्तराखंड के साहित्य के लिए एक ऐतिहासिक दिन! ✨19 सितंबर 2026 को दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र, देहरादून में हमारे वरिष्ठ कवि, संवेदनशील संपादक और प्रखर रंगकर्मी मदनमोहन डुकलाण जी के जन्मदिवस के अवसर पर उनके शानदार गढ़वाली ग़ज़ल संग्रह 'हवै जाज सी उड़दन सुख' का भव्य लोकार्पण हुआ।मदनमोहन डुकलाण जी का संपूर्ण जीवन कला, रंगमंच और गढ़वाली संस्कृति को समर्पित रहा है। उनकी कलम से निकली हर पंक्ति केवल शब्दों का मेल नहीं, बल्कि अपने गाँव, बचपन की यादों और विस्थापन के दर्द का एक बहुत ही सजीव और मार्मिक दस्तावेज है। उन्होंने गढ़वाली ग़ज़ल को उर्दू की नकल से बाहर निकालकर उसे अपनी मौलिक जमीन और एक नया कैनवास देने का जो साहसिक और अनूठा प्रयोग किया है, वह वाकई वंदनीय है! कार्यक्रम में कई वरिष्ठ जन और साहित्यकारो की उपस्थिति ने हाल को साहित्यिक ऊर्जा से भर दिया।
कार्यक्रम दाे सत्रों में रहा कार्यक्रम की अध्यक्षता उत्तराखंड के सिरमौर आदरणीय लोकप्रिय लोकगायक श्री नरेन्द्र सिंह नेगी जी द्वारा की गई। वही जागर सम्राट पद्मश्री प्रीतम भरतवाण जी, श्री गणेश खुगशाल 'गणी'जी व श्री अनिल रतूड़ी जी ने मुख्य अतिथि के रूप में मंच को सुशोभित किया। किताब की समीक्षा करते हुवे डॉ. जगदम्बा प्रसाद कोटनाला जी ने पुस्तक के गहरे दार्शनिक और साहित्यिक महत्व पर प्रकाश डाला।
दूसरे सत्र ग़ज़ल गुमणाट': मुझे भी उनके द्वारा लिखी अमर रचना "मेरी मां"को गाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।वरिष्ठ संगीतकार आलोक मलासी जी के निर्देशन में ,तीष्ठव बड़ौनी जी के तबले की थाप , अमित कपूर जी के मधुर गिटार की संगत, किशन महिपाल जी, गिरीश सुन्दरियाल,जी और संगीता ढौंडियाल जी की सुरीली आवाज़ों ने शानदार संगीतमय प्रस्तुतियों से सभागार में समां बांध दिया!
और अंत में आदरणीय नरेंद्र सिंह नेगी जी ने तो उनकी कालजई रचना"आंदी जांदी सांस छैं तू" गाकर पूरी सभा को सम्मोहित कर दिया। और साथ ही जीवन को देखने व जीने का एक नया दर्शन दिया।
जब दून पुस्तकालय जैसे मंच ऐसे दिग्गज रचनाकारों और क्षेत्रीय भाषा को प्रमोट करते हैं, तो यह हर पहाड़ी के लिए अपनी जड़ों से जुड़ने का एक खूबसूरत अवसर बन जाता है। आदरणीय डुकलाण जी को इस युगदायी कृति के लिए हृदय से ढेरों बधाइयाँ और शुभकामनाएं! 💐 और मुझे इस भव्य आयोजन का हिस्सा बनने के लिए एक बार फिर से आपका बहुत-बहुत आभार🙏🏻
उत्तराखंड के जाने-माने संगीतकार गायक आदरणीय आलोक मालासी जी। आदरणीय नरेंद्र सिंह नेगी जी के स्वरों से व आदरणीय मदन मोहन डुकलान जी की कलम से निकली कालजई रचना "आंदी जांदी सांस" की धुन भी इन्होंने ही तैयार की है।💐🙏🏻
आदरणीय लोक गायक किशन महिपाल जी
"मेरी मां" आदरणीय मदन मोहन डुकलान जी की कालजई रचना और मेरे द्वारा स्वरबद्ध करने का प्रयास। मां और मां के साथ संपूर्ण पहाड़
उपमा अलंकार का इससे सुंदर उदाहरण मुझे आज तक कही देखने को नहीं मिला।
उत्तराखंड के सिरमौर आदरणीय नरेंद्र सिंह नेगी जी का व्यक्तव्य 🙏🏻
पद्मश्री आदरणीय प्रीतम भारतवाण जी व आदरणीय अनिल रतूड़ी जी का वक्तव्य
लोकार्पण.....
सबसे पहली सुमिरदु
हे हरिं नारैण तुम्हारी खट्यू मां ....
फिर सुमिरन करदु गुरु
जौंन या विद्या पढ़ाई या वाणी सिखाई ...
#पांडव #उत्तराखंड #लोककला #द्रोपती #नारायण
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