Kusumbhatt
उत्तराखंडी लोकगायिका , काव्य और सहित्य लेखन , संगीतकार , Gazal & bhajn singer Also
18/06/2026
"जय कंडोलिया महोत्सव पौड़ी" कवि सम्मेलन....
बहुत वर्षों बाद इस मंच पर आकर ऐसा लगा जैसे कोई बेटी आती है बरसों बाद अपने मायके और मिटाती है बरसों की खुद।
इस जसीली की धरती ने बहुत कुछ दिया। यह सांस्कृतिक नगरी पौड़ी मेरी कर्म स्थली रही है मैंने यहां से बहुत कुछ सीखा और अपनी संगीत की यात्रा आरंभ की। मेरे लिए बहुत सुखद अवसर था कि जिन लोगों को मैंने बचपन से सुना जिनसे कुछ न कुछ प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से सीखा|
मेरे गुरुजन सभी लोग मेरे सम्मुख थे और मुझे उनके साथ उनके सामने काव्य पाठ करने का अवसर मिला इससे अधिक अभिभूत करने वाला क्षण और क्या हो सकता है। बहुत-बहुत धन्यवाद आभार इस कवि सम्मेलन के संयोजक आदरणीय मनोज रावत "अंजुल" भाई जी जो खुद भी एक वरिष्ठ रंग कर्मी है जिन्होंने मुझ पर अपना विश्वास बनाए रखा और मुझे इस कवि सम्मेलन में आमंत्रित किया। एक बार फिर से मेरे इस प्यारे शहर को बारंबार प्रणाम।
17/06/2026
https://youtu.be/Mi5eM9htkns?si=SHIblAw3wn9JLqd2
Baba Kandoliya lagi Paraj New Garhwali Bhajan || lyrics: Dr. Kusum Bhatt "Shobhni" Baba Kandoliya lagi Paraj New Garhwali Bhajan || lyrics: Dr. Kusum ...
16/06/2026
यह शहर हमेशा से ही मेरा जान रहा है ।
इस शहर के बारे में एक कहावत है कि" यहां के पत्थर भी कलाकार होते है। मैं बात कर रही हूं सांस्कृतिक नगरी "पौड़ी "की।
यह सांस्कृतिक नगरी पौड़ी मेरा कर्म क्षेत्र रही। मैंने अपने जीवन में जो भी कुछ सीखा यहां के गुणी जनों से और अपने महान गुरु जनों से ही सीखा। जिस मंच पर हम कभी प्रतिभाग करते थे। आज जय कंडोलिया पौड़ी महोत्सव के अवसर पर निर्णायक मंडल के तौर पर शामिल होने का सुखद अवसर मिला। मेरे पास शब्द नहीं है इन भावनाओं को अभिव्यक्त करने के लिए । बहुत-बहुत धन्यवाद वरिष्ठ रंगकर्मी मनोज रावत" अंजुल "भाई जी जिन्होंने मुझे इस जिम्मेदारी के लायक समझा।
इस शहर ने हमेशा बहुत मान सम्मान दिया और प्यार दिया उसके लिए मैं हमेशा ऋणी रहूंगी
16/06/2026
इससे अधिक सुखद अवसर क्या होगा कि अपनी गृह नगरी पौड़ी में है अपनों के बीच काव्य पाठ का अवसर मिल रहा है। अब तक उन्होंने मेरे गीतों को हमेशा सुना अब रूबरू होने का अवसर है कविता के माध्यम से ।मिलते हैं.....
https://youtu.be/Mi5eM9htkns?si=gJqvr-2JZWjdYMjI
"बाबा" तुम पौड़ी वासियों के जीवन का वह अध्याय हो जो हमने कभी किसी को नहीं बताया। लेकिन जब भी कोई कष्ट और पीड़ा हुई तो सबसे पहले तुम्हारा नाम पुकारा। हमने तुम्हें कभी सिर्फ "देव" नहीं माना।
किसी ने तुम्हें अपना भाई माना, तो किसी ने अपना बेटा ,और किसी ने न्यायकारी न्यायाधीश, जिसका कोई नहीं था उसने अपना सर्वत्र तुम्हें माना। कई बार तो तुमसे झगड़ा भी किया की "सुनता क्यों नहीं बहुत देर लगा दी"
और यह सब क्यों न हो क्योंकि हम सब तुम पर अपना एक अधिकार मानते हैं. क्योंकि तुम ही तो हो पौड़ी के रक्षाकारी ऊंची धार पर विराजमान भूमी का भूमियाल हे" कंडोलिया ठाकुर महाराज" सब की रक्षा करना
https://youtu.be/Mi5eM9htkns?si=gJqvr-2JZWjdYMjI
https://youtu.be/Mi5eM9htkns?si=ODRFm_wvJuzWiOLf
हे ठाकुर महाराज.....
जो भी गलतियां होंगी क्षमा चाहूंगी एक ध्याण की ओर से यह भेंट आपके चरणों में।
09/06/2026
https://youtu.be/Mi5eM9htkns?si=KKKlwgUCKh3PSIgX
।जय बाबा कंडोलिया ठाकुर!
"भारी खुद लगी च आज कंडोल़्या़... 🌲🙏"जब भी पहाड़ से दूर परदेस में दिल उदास होता है, तो सबसे पहले पौड़ी के राजा, हमारे न्यायकारी 'बाबा कंडोलिया' की याद आती है। ऊंचे-ऊंचे पहाड़ों और घने जंगलों के बीच वास करने वाले बाबा, अपने हर भक्त की पुकार सुनते हैं। बाबा कंडोलिया सबकी मनोकामना पूरी करें और सबको सुखी रखें।
हे ......ठाकुर महाराज......🙏✨"तेरी धूनी तेरी आग, सब तै माथा दे दे भाग, बाबा कंडोल़्या़...
न्याय के राजा, पौड़ी के भूम्याल - बाबा कंडोलिया ठाकुर महाराज! 🔱"बाबा कन्डोलिया, लागी गै पराज कंडोल़्या़। भारी खुद लगी च आज कंडोल़्या़..."इन पंक्तियों में जो दर्द और श्रद्धा है, वह केवल एक गढ़वाली ही समझ सकता है। बाबा कंडोलिया सिर्फ एक देवता नहीं, बल्कि पूरे पौड़ी क्षेत्र के रक्षक और न्याय के देवता हैं। घने देवदार के जंगलों के बीच बसा उनका यह पावन धाम हर अशांत मन को सुकून देता है।आइए आज बाबा के इस सुंदर भजन को सुने और उनकी कृपा के भागीदार बनें। मेरी ओर से एक छोटी सी भेंट बाबा कंडोलिया के चरणों में जो भी गलती होगी माफी चाहूंगी।बोलो कंडोलिया महाराज की... जय! 🙌✨बाबा की धूनी का आशीर्वाद हम सब पर बना रहे। 🌸वीडियो को शेयर करें और बाबा का आशीर्वाद अपने अपनों तक पहुंचाएं!कमेंट में लिखें: जय बाबा कंडोलिया ठाकुर महाराज! 👇
https://youtu.be/x-WCg7gqfDI?si=z8fhDSkUcizQlqcn
यदि आपने अभी तक पायश जी द्वारा रचित यह अद्भुत गजल नहीं सुनी है, तो जरूर सुनें और अपनी प्रतिक्रिया देकर हमें प्रेरित करें ताकि भविष्य में और भी बेहतर करने की प्रेरणा मिल सके।
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