DIAL 007
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25/08/2026
27/07/2026
पिछले कई वर्षों से सोच रहा था कि राम के बारे में लिखूँ...
आज खुद को रोक नहीं पा रहा हूँ।
चलो, आज लिख ही देता हूँ।
आज पूरा भारत जिस "राम-राम" का उच्चारण कर रहा है, वह केवल एक आवेग, भावना या चरित्र नहीं है। "राम" न तो कोई नारा है और न ही किसी गुलामी का प्रतीक।
राम को समझना है तो पहले अपने जीवन में "राम" शब्द का बोध लाना होगा।
वैसे तो किसी के लिए राम एक पात्र हैं, किसी के लिए भगवान, किसी के लिए नारा, किसी के लिए संस्कृति, किसी के लिए शत्रु और किसी के लिए एक बीता हुआ शब्द।
पर जितना मुझे राम और "राम" शब्द समझ आया है, उसमें एक पूरा युग समाया हुआ है।
राम कौन हैं? यदि आज मैं यह समझा पाया, तो मेरा जीवन धन्य हो जाएगा।
राम वह पुत्र हैं, जो अपने पिता की कठिन और अनुचित प्रतीत होने वाली आज्ञा भी नहीं टालते।
राम वह भाई हैं, जो अपने भाई के लिए एक क्षण में समस्त वैभव त्यागकर वनवास और कठिन जीवन स्वीकार कर लेते हैं।
राम वह पति हैं, जो लोकमर्यादा और राजधर्म की रक्षा के लिए अपने जीवन के प्राण समान धर्मपत्नी से भी वियोग सह लेते हैं।
राम वह शासक हैं, जो अपनी प्रजा के हित के लिए अपना सर्वस्व अर्पित कर देते हैं।
राम वह हैं, जो सर्वोच्च होने के बाद भी स्वयं को प्रतिदिन कसौटी पर कसते हैं।
राम वह श्रेष्ठ पुत्र हैं, जिन्हें अपने पिता की मर्यादा से बढ़कर न राज्य चाहिए, न वैभव।
राम वह भाई हैं, जो अपने छोटे भाइयों के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर देते हैं।
राम वह पिता हैं, जो चाहें तो अपने पुत्रों को राज्य दे दें, पर उन्हें भी अपनी योग्यता सिद्ध करने का अवसर देते हैं, क्योंकि संसार का हर पिता अपनी संतान को स्वयं से श्रेष्ठ देखना चाहता है।
राम वह मित्र हैं, जो मित्रता निभाने के लिए अजनबियों और शक्तिशाली शत्रुओं से भी टकरा जाते हैं।
राम वह भगवान हैं, जो अपने भक्त को अपने परिवार से भी ऊपर स्थान देते हैं।
राम वह शासक हैं, जो अपनी प्रजा के हित के आगे अपने व्यक्तिगत सुख-दुःख का त्याग कर देते हैं।
राम वह शब्द हैं, जिनका स्मरण जीवन के अंतिम क्षणों में भी मन को शांति और मुक्ति की आशा से भर देता है।
राम वह मित्र हैं, जिन्होंने मित्रता की परिभाषा बदल दी।
राम वह आधार हैं, जिनके सामने हर निराधार को सहारा मिल जाता है।
राम वह प्रत्यंचा हैं, जिनके सामने हर शस्त्र निष्प्रभ हो जाता है।
सच तो यह है, मित्रों, सदियाँ बीत जाएँगी राम की गाथा सुनाते-सुनाते।
और विश्वास मानिए, जिसने भी राम के किसी एक भी चरित्र को अपने जीवन में उतार लिया, वह राम के अत्यंत निकट पहुँच जाएगा, क्योंकि यह कलियुग है।
आज मेरे चारों ओर केवल रावण जैसे स्वभाव दिखाई देते हैं। मैं भी उन्हीं में से एक हूँ, पर मुझे खोजने पर भी एक राम नहीं मिला।
जानते हैं क्यों?
क्योंकि राम एक ही थे, राम एक ही हैं और राम एक ही रहेंगे।
जिस तरह से सीजेपी का दिल्ली में प्रदर्शन हुआ, वह वाकई काबिले-तारीफ़ है। जिस-जिस तरह के संवाद हुए, वे तो चमत्कारिक थे। ऐसा लगा जैसे सारे भारतवर्ष की प्रतिभाएँ वहीं जाकर सिमट गई हैं। 5 साल के बच्चे से लेकर 75 साल के बुज़ुर्ग, युवा नेता और नेत्रियों ने जो संवाद स्थापित किया, उसे देखकर तो वाकई में जेन-ज़ी की परिभाषा चरितार्थ हो गई।
पर जब इन लोगों के कृत्य देखे जाएँ, तो इनसे शर्म नहीं आएगी, इनसे घिन आएगी। इन लोगों के नंगे नाच के आगे नीट स्टूडेंट कहीं खो गए।
सरकार को गाली देना, प्रधानमंत्री की माँ-बहन करना, भारतीय सेना को माँ-बहन की गालियाँ देना, ब्राह्मणवाद, हिंदू धर्म को गालियाँ देना, और ऐसी-ऐसी गालियाँ जो यहाँ लिखी नहीं जा सकतीं, लड़कियों द्वारा तख्तियों पर जो लिखकर प्रदर्शित किया गया, वह वाकई में न केवल शर्मनाक है, बल्कि हमें सोचने पर मजबूर करता है कि क्या ऐसी सोच के लोग भी इस देश में हैं।
यह शायद इसलिए भी किया गया कि लोग इनके सरजील इमाम और उमर खालिद को समर्थन करने वाली घटनाएँ भूल जाएँ।
देश को गुमराह करने के लिए हर विपक्षी पार्टी का नेता वहाँ पहुँचा और धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफ़ा माँगा, पर वहीं जहाँ पंजाब में और कर्नाटक में पेपर लीक हुए, उसके लिए शायद इन आतंकवादी प्रदर्शनकारियों के मुँह में दही जम गया, क्योंकि फंडिंग तो वही पार्टियाँ कर रही थीं, विदेशी ताकतों से पैसा लेकर।
यह उस ख़तरे की घंटी है, जहाँ आगे चलकर अपनी किसी भी अनुचित माँग को मनवाने के लिए यह पूरी टोली वहाँ पहुँचेगी, फिर से नंगा नाच करने।
सरकार को चाहिए, एक-एक, मतलब एक-एक ऐसे तथाकथित लोगों को चिन्हित करे जिन्होंने पुलिस को मारा और ऊपर लिखी हरकतें कीं, तभी कुछ हो सकता है, वरना अब इस देश का भगवान मालिक है।
मेरी इस पोस्ट पर कमेंट ज़रूर आएँगे कि पुलिस ने मारा, तो ऐसे लोगों के लिए एक ही शब्द है, शुरुआत कहाँ से हुई, यह पूरे देश ने देखा है। और ध्यान रहे, इसका हिसाब तो होगा। असली जेन-ज़ी अभी शांत है, उसे उकसाने का काम मत करो, वह जिस आवाज़ उठाएगा, आपके जैसे लोगों की पैंट घर बैठे गीली कर देगा।
एक महत्वपूर्ण बात, आज बीजेपी की सरकार अधिकांश राज्यों में इसलिए है, क्योंकि इस पार्टी ने देश के कोने-कोने में बैठकर जनता से संवाद किया है। दूसरी पार्टियों ने सिर्फ ईवीएम को दोष दिया है।
मैं मध्य प्रदेश का रहने वाला हूँ। 1996 से लेकर बीजेपी के शासन में आने से पहले तक मध्य प्रदेश की सड़कों के हाल, शिक्षा के हाल, चिकित्सा के हाल देखे हैं, और बीजेपी के आने के बाद आज हो रहे विकास कार्य भी।
पर ऐसा नहीं है कि मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार नहीं है, बल्कि पर्याप्त है। ऐसे नेताओं को भी चिन्हित किया जाना चाहिए जो आज भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। जब 75 साल पुरानी कांग्रेस लुप्त होती जा रही है, तो बीजेपी को तो अभी सिर्फ 15 साल हुए हैं। विकास कराइए, पर भ्रष्टाचार रहित।
जय हिंद।
जय श्री राम।
22/07/2026
हैं दैनिक भास्कर के पत्रकार और उनकी पत्रकारिता...
इन्हें शायद वह नहीं दिखा, जहाँ एक लड़का पैंट की ज़िप खोलकर सरेआम अपना निजी अंग दिखा रहा था।
इस दैनिक भास्कर के पत्रकार को वह नहीं दिखा, जहाँ एक प्रदर्शनकारी सीधे मोदी जी की माँ के बारे में अभद्र टिप्पणी कर रहा था।
इस दैनिक भास्कर के पत्रकार को वह नहीं दिखा, जहाँ एक महिला पत्रकार का सरेआम अपमान किया गया।
इस भास्कर और उसके पत्रकारों को वह भी नहीं दिखा, जहाँ रैपिड एक्शन फोर्स के एक जवान और एक सिपाही को गिराकर पीटा गया।
यही हैं ये पत्रकार और अख़बार वाले...
एक किस्सा याद आता है। मेरे एक परिचित इंदौर भास्कर कार्यालय गए थे और उन्होंने भाजपा के एक बड़े नेता के खिलाफ़ सबूतों के साथ खबर प्रकाशित करने की बात कही। तब उसी भास्कर के एक कथित सम्मानित व्यक्ति ने कहा था, "नहीं छाप सकते, उनके यहाँ से 10 लाख रुपये का विज्ञापन आता है।"
दिखाना है तो सच दिखाइए—दोनों पक्षों का। वरना ऐसी पत्रकारिता अपनी जेब में ही रखिए।
जंतर-मंतर अब आंदोलन का नहीं, बल्कि नेताओं की राजनीति का अखाड़ा बन गया है। ध्यान रखिए, सरकार का विरोध करना पूरी तरह जायज़ है और हम भी उसके पक्ष में हैं। लेकिन इस वीडियो में जो दिखाई दे रहा है, उससे साफ़ है कि यह कभी छात्र आंदोलन था ही नहीं। इसकी आड़ में सबके नकाब उतरकर सामने आ गए हैं।
ऐसे लोगों ने छात्रों के नाम को बदनाम कर दिया है। ये छात्र हो ही नहीं सकते।
20/07/2026
इस फोटो में जो महिला दिख रही है, वो सोनम वांगचुक की पत्नी है, और उसकी तरफ से देश के महान हृदय वाले वकील कपिल सिब्बल खड़े हैं।
ज़्यादा कुछ नहीं कहूँगा, ये वही कपिल सिब्बल हैं, जो कभी याकूब मेमन की फाँसी रुकवाने आते हैं, कभी अरविंद केजरीवाल की, कभी सोरेन परिवार की, तो कभी मनीष सिसोदिया की।
आज सोनम वांगचुक के लिए खड़े हैं।
कुल मिलाकर या तो ये और इनके क्लाइंट वाकई में देशभक्त हैं, वो भी सच्चे, या फिर ये वाकई में देश को तोड़ना चाहते हैं। ध्यान रहे, ये वही वांगचुक हैं, जो कांग्रेस विधायक के बेटे हैं, और कश्मीर को देश का हिस्सा नहीं मानने की कोशिश कर रहे हैं। फैसला आपके हाथ में है।
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