Sky Rajasthan

Sky Rajasthan

Share

राजस्थान की संस्कृति, परिवेश, पहनावा, मारवाड की आन-बान और शान, मरुधर रा धोरा, माटी और महल. आपणीं....

31/08/2026

वो 27 अगस्त 2019… जब एक छात्र ने इतिहास लिखने की शुरुआत की

27 अगस्त 2019 मतदान का दिन था। इस बार मन पहले ही तय कर चुका था कि मतदान करने जरूर जाना है। लेकिन मतदान से ठीक एक दिन पहले, 26 अगस्त को, बालेसर कॉलेज से जुड़े कुछ पुराने साथी और मुख्यधारा की राजनीति में सक्रिय वरिष्ठ लोगों ने मुझसे आग्रह किया कि मैं अपने गांव से बालेसर कॉलेज में पढ़ने वाले छात्रों की जिम्मेदारी संभालूं और मतदान के दिन वहीं मौजूद रहूं।

बालेसर कॉलेज से मेरा अपना भी पुराना रिश्ता था। मैं वहां का पूर्व छात्र था और उस समय मेरे गांव के करीब दर्जनभर विद्यार्थी वहां पढ़ रहे थे। इसलिए उनकी बात में तर्क भी था।

उनका कहना था कि जोधपुर विश्वविद्यालय चुनाव में वैसे भी दो राजपूत प्रत्याशी मैदान में हैं और जीत की संभावना लगभग नहीं के बराबर है। ऐसे में मेरा बालेसर कॉलेज में रहना ज्यादा उपयोगी रहेगा।

लेकिन मन शायद पहले ही अपना फैसला कर चुका था।

रविन्द्र सिंह भाटी के वे शब्द बार-बार याद आ रहे थे—

"राजपूत हो, छाती ठोककर जीतोला।"

"एड़ी-चोटी रो जोर लगाणो है, यूनिवर्सिटी जीतोला।"

और फिर वह भरोसा—

"गिनती रा ग्यारह दिन।"

शायद उस समय इन शब्दों का महत्व पूरी तरह समझ में नहीं आ रहा था। लेकिन भीतर कहीं यह जरूर महसूस हो रहा था कि इस चुनाव को केवल एक सामान्य छात्रसंघ चुनाव की तरह नहीं देखा जा रहा।

इसीलिए मतदान वाले दिन सुबह ही गांव से जोधपुर के लिए निकल पड़ा।

कुछ ही समय बाद न्यू कैंपस के सेकंड गेट पर पहुंच गया। वहां माहौल बिल्कुल सामान्य नहीं था। भारी पुलिस जाब्ता तैनात था और कैंपस के भीतर-बाहर चुनावी गर्मी साफ महसूस की जा सकती थी।

छात्र राजनीति का चुनाव था, लेकिन उस दिन वातावरण किसी बड़े राजनीतिक मुकाबले से कम नहीं लग रहा था।

न्यू कैंपस में एक खास समूह के छात्रों का प्रभाव माना जाता था। इसी माहौल के बीच कुछ शरारती तत्व छात्रों के आईडी कार्ड पर 'सिंह' नाम देखकर उन्हें परेशान कर रहे थे और कई छात्रों के आईडी कार्ड तक लेकर भाग रहे थे।

एहतियात के तौर पर मैंने भी अपना आईडी कार्ड गले में डालने की बजाय शर्ट की जेब में रख लिया था।

लेकिन गेट पर एक अलग ही घटना हो गई।

जब एक पुलिसकर्मी की नजर मुझ पर पड़ी और उसे मेरे गले में आईडी कार्ड दिखाई नहीं दिया, तो शायद उसे लगा कि मैं भी उन शरारती लोगों में से हूं। वह डंडा लेकर मेरी तरफ दौड़ पड़ा।

उस समय क्या स्थिति थी, यह वही समझ सकता है जो उस माहौल में मौजूद रहा हो।

मैंने तुरंत जेब से अपना आईडी कार्ड निकाला और पुलिसकर्मी को दिखाया।

आईडी कार्ड देखते ही स्थिति साफ हुई और इस तरह डंडे की मार से बच गया।

आज उस घटना को याद करता हूं तो हंसी भी आती है।

लेकिन उस समय दिल की धड़कन कुछ ज्यादा ही तेज थी।

गेट के अंदर प्रवेश किया तो मतदान के लिए लंबी कतार लगी हुई थी। सैकड़ों छात्र अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। हर चेहरे पर चुनाव का उत्साह था और कैंपस का माहौल लगातार गर्म होता जा रहा था।

इसी भीड़ में अचानक एक चेहरा नजर आया।

मुस्कुराता हुआ चेहरा।

बिना किसी डर के छात्रों के बीच घूमता हुआ एक युवा।

हर छात्र से हाथ मिलाना, बात करना और मतदान की अपील करना।

वह कोई और नहीं, रविन्द्र सिंह भाटी थे।

उस समय शायद बहुत कम लोगों ने सोचा होगा कि यह युवा आगे चलकर राजस्थान की राजनीति में इतनी बड़ी पहचान बनाएगा।

लेकिन उस दिन उसके भीतर आत्मविश्वास जरूर दिखाई दे रहा था।

वह किसी बड़े राजनीतिक दल के बैनर के सहारे नहीं खड़ा था। उसके साथ जो सबसे बड़ी चीज थी, वह थी छात्रों के बीच उसका जुड़ाव और खुद पर भरोसा।

फिर मेरी मतदान की बारी आई।

अलग-अलग पदों के लिए कई बैलेट पेपर दिए गए थे। सच कहूं तो उस समय मेरा ध्यान बाकी उम्मीदवारों पर बिल्कुल नहीं था।

मुझे बस रविन्द्र सिंह भाटी का नाम दिखाई दिया।

मोहर लगाई और मतदान पूरा कर दिया।

बाकी पदों पर कौन उम्मीदवार था, कौन किस पद के लिए चुनाव लड़ रहा था—उस समय मुझे ज्यादा जानकारी नहीं थी। इसलिए बाकी जगह बस अपनी समझ से मोहर लगाई और बाहर निकल आया।

कभी-कभी जिंदगी के कुछ फैसले इतने सहज होते हैं कि बाद में उनका महत्व समझ आता है।

उस दिन भी शायद ऐसा ही था।

मतदान केंद्र से बाहर निकलने के बाद संयोग से पड़ोसी गांव सुवेरी के मूलाराम से मुलाकात हो गई। वह 12वीं कक्षा में मेरा सहपाठी रहा था।

करीब पांच साल बाद उससे मुलाकात हो रही थी।

पुराना दोस्त मिल जाए तो चुनाव और राजनीति से ज्यादा पुरानी यादें ताजा हो जाती हैं। थोड़ी बातचीत हुई और फिर हम साथ चल पड़े।

इसके बाद मतदान केंद्र से रवसा स्थित चुनावी कार्यालय तक का सफर मैंने अपने पुराने स्कूली साथी मूलाराम और मेघवाल समाज के सात-आठ अन्य साथियों के साथ तय किया।

यहीं पर एक ऐसी चीज दिखाई दी जिसने मेरे मन में चुनाव के नतीजे को लेकर तस्वीर लगभग साफ कर दी।

रास्ते में मेघवाल समाज के साथियों के बीच रविन्द्र सिंह भाटी को लेकर जो उत्साह दिखाई दे रहा था, वह सामान्य राजनीतिक समर्थन जैसा नहीं लग रहा था।

लोगों में चर्चा थी।

उत्साह था।

और सबसे बड़ी बात—भाटी के प्रति एक अपनापन दिखाई दे रहा था।

उसी समय मन में ख्याल आया कि शायद यह लड़का मुकाबला जीत चुका है।

नतीजा अभी आया नहीं था।

लेकिन माहौल बहुत कुछ कह चुका था।

फिर आया 28 अगस्त 2019।

उगते सूरज के साथ वह दिन भी किसी सामान्य दिन की तरह शुरू हुआ था। लेकिन दोपहर तक यह दिन पश्चिमी राजस्थान की छात्र राजनीति के इतिहास में दर्ज हो चुका था।

जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर में एक युवा ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में छात्रसंघ अध्यक्ष का चुनाव जीत लिया।

नाम था—

रविन्द्र सिंह भाटी।

यह केवल एक छात्रसंघ चुनाव की जीत नहीं थी।

एक ऐसे युवा की जीत थी जिसने बिना किसी बड़े राजनीतिक दल के सहारे विश्वविद्यालय की राजनीति में अपनी जगह बनाई थी।

जिसने छात्रों के बीच जाकर चुनाव लड़ा।

जिसने अपने तरीके से अभियान चलाया।

और जिसने अंततः विश्वविद्यालय के सबसे महत्वपूर्ण छात्र पद पर जीत हासिल की।

उस समय शायद किसी को अंदाजा नहीं था कि यह जीत आगे चलकर एक बहुत बड़ी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत बनने वाली है।

आज सात साल पीछे मुड़कर देखते हैं तो 27 और 28 अगस्त 2019 के वे दिन अलग ही दिखाई देते हैं।

तब एक छात्रसंघ अध्यक्ष का चुनाव था।

आज वही रविन्द्र सिंह भाटी राजस्थान विधानसभा में शिव क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।

राजनीति में किसी व्यक्ति की यात्रा एक दिन में नहीं बनती। उसके पीछे कई छोटे-छोटे पड़ाव होते हैं—कुछ फैसले, कुछ संघर्ष, कुछ रिश्ते और कुछ ऐसे मौके जिन्हें उस समय सामान्य समझ लिया जाता है।

27 अगस्त को किया गया वह मतदान भी शायद उसी कहानी का एक छोटा-सा हिस्सा था।

और आज जब सात वर्ष पहले की वह इंस्टाग्राम स्टोरी अचानक सामने आई, तो लगा जैसे समय ने कुछ पल के लिए पीछे मुड़कर देखने का मौका दे दिया हो।

वही न्यू कैंपस...

वही सेकंड गेट...

वही लंबी कतार...

वही चुनावी हलचल...

वही मुस्कुराता हुआ युवा...

और फिर अगले दिन आया वह परिणाम, जिसने कहानी की दिशा बदल दी।

इतिहास बनने के समय किसी को पता नहीं होता कि वह इतिहास बन रहा है।

उस दिन भी शायद किसी ने नहीं सोचा होगा कि विश्वविद्यालय का यह चुनाव आने वाले वर्षों में पश्चिमी राजस्थान की राजनीति की एक चर्चित कहानी बन जाएगा।

लेकिन आज पीछे मुड़कर देखें तो लगता है—

कभी-कभी बड़े राजनीतिक सफर की शुरुआत बहुत छोटी जगह से होती है।

एक विश्वविद्यालय से।

एक चुनाव से।

कुछ दोस्तों से।

कुछ नारों से।

और एक ऐसे विश्वास से, जो उस समय केवल एक युवा के भीतर था।

27 अगस्त को मतदान हुआ था...
28 अगस्त को परिणाम आया था...
और शायद उसी के साथ एक राजनीतिक यात्रा ने अपना पहला बड़ा पड़ाव पार किया था।

22/08/2026

‘मैं मदन दिलावर जी से क्षमा मांगता हूं,’ कंवरपुरा स्कूल विवाद के बीच CJP प्रवक्ता आशुतोष रांका ने क्यों ...

Ashutosh Ranka ने एक इंटरव्यू के दौरान राजस्थान शिक्षा मंत्री Madan Dilawar से माफी मांगते हुए सरकारी स्कूलों को लेकर तंज कसा। इंटरव्यू के दौरान की यह क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है।

जयपुर में शुक्रवार को हुए कंवरपुरा स्कूल विवाद के बाद सियासत गरमा गई है। इस मामले को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने राजस्थान सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं, लेकिन इसी बीच एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि मैं मदन दिलावर जी से क्षमा मांगता हूं। यह क्लिप सोशल मीडिया से काफी वायरल हो रही है और लगातार चर्चा का विषय बनी हुई। आइए जानते हैं कि आरोप-प्रत्यारोपों के बीच अचानक आशुतोष रांका ने ये बात क्यों कही?

आशुतोष रांका ने क्या-क्या कहा?
आशुतोष रांका ने इंटरव्यू के दौरान कही इस बात की पूरी क्लिप अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के हैंडल X पर पोस्ट की है। दरअसल, इस वीडियो में वह राज्य शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के बयान का जवाब दे रहे थे। वीडियो में वह तंज कसते हुए कहते नजर आ रहे हैं, “मदन दिलावर जी ने बिल्कुल सही कहा। तबेले के अंदर एक बहुत बड़ा डिजिटल क्लासरूम चल रहा था, जिसमें 56 इंच की टीवी स्क्रीन लगी हुई थी। वहां हमारे बच्चों को आधुनिक तकनीक और AI सेमीकंडक्टर के बारे में पढ़ाया जा रहा था। मैथ्स और साइंस की पढ़ाई हो रही थी। इंटरनेट और लाइब्रेरी की सुविधा मौजूद थी। शानदार बेंच लगी हुई थीं और बहुत अच्छी पढ़ाई चल रही थी, जिसमें हम लोगों ने व्यवधान डालने का काम किया।”

राजस्थान में CJP के आंदोलन का असर! जर्जर स्कूल ज़मींदोज़- नए सिरे से बनना शुरू, आशुतोष रांका ने शेयर की तस्वीरें

उन्होंने आगे तंज कसते हुए कहा, “बहुत सही कह रहे हैं मदन दिलावर जी। भैंसों के तबेले में यह पहला वर्ल्ड क्लास क्लासरूम था, जिसमें CJP ने व्यवधान डाला। यह ऐसा मॉडल है, जिसे सभी को अपनाना चाहिए, जहां एक तरफ भैंस हो, उसका चारा हो और उसके बगल में बच्चों को पढ़ाया जाए। हमारे बच्चों को जिस तरह विश्वस्तरीय शिक्षा दी जा रही है, उस मॉडल में हमने व्यवधान डाला, इसके लिए हम माफी मांगना चाहते हैं।”

मदन दिलावर के इस बयान पर था आशुतोष रांका का तंज
राजस्थान शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने CJP पर हमला बोलते हुए कहा कि “कॉकरोच पार्टी का चरित्र सबने जंतर-मंतर पर देखा है।” उन्होंने आरोप लगाया कि ये लोग कांग्रेस के समर्थन से काम कर रहे हैं और इस तरह का व्यवहार कोई बर्दाश्त नहीं करता। दिलावर ने कहा कि गांव वालों को डर है कि ऐसे लोग स्कूलों में जाएंगे तो माहौल खराब होगा और बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होगी। उन्होंने दावा किया कि राजस्थान के अलग-अलग स्कूलों से व्यवधान की शिकायतें मिल रही हैं, जिसे सरकार किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगी।

जानें पूरा मामला
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की ओर से सरकारी स्कूलों की स्थिति और बच्चों की पढ़ाई से जुड़े मुद्दों को लेकर अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत CJP की टीम शुक्रवार सुबह जयपुर के एक सरकारी स्कूल में पहुंची थी। टीम स्कूल की व्यवस्थाएं और बच्चों की पढ़ाई का माहौल देखने गई थी। इसी दौरान वहां मौजूद लोगों और CJP टीम के बीच विवाद हो गया। मामला इतना बढ़ गया कि धक्का-मुक्की और मारपीट की स्थिति बन गई।

घटना का वीडियो सामने आने के बाद मामला चर्चा में आ गया। इसी को लेकर अब मदन दिलावर और CJP के नेताओं के बीच बयानबाजी भी शुरू हो गई है। बता दें कि आशुतोष रांका ने मामले में 48 घंटों के अंदर मदन दिलावर के इस्तीफे की मांग भी की।

मदन दिलावर की सोशल मीडिया पोस्ट
शनिवार को मदन दिलावर ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा कि राजस्थान के सरकारी स्कूलों को बेहतर, सुरक्षित और आधुनिक बनाने के लिए लगातार काम किया जा रहा है।

उन्होंने स्कूलों में भवन, कक्षा-कक्ष, स्मार्ट क्लास, लैब और दूसरी जरूरी सुविधाओं के विस्तार का जिक्र किया। पोस्ट में उन्होंने कहा कि स्कूलों की कमियां सामने रखना लोकतांत्रिक प्रक्रिया है, लेकिन उनका समाधान बातचीत, सहयोग और सकारात्मक भागीदारी से ही हो सकता है।

22/08/2026

CJP सिर्फ BJP शासित राज्यों में ही क्यों जाती है?’ पार्टी प्रवक्ता आशुतोष रांका ने बताया स्कूलों के निरीक्षण .....

Ashutosh Ranka CJP statement: राजस्थान में स्कूलों के निरीक्षण के दौरान सीजेपी कार्यकर्ता और पार्टी प्रवक्ता आशुतोष रांका हुए हमले के बाद से मामला तूल पकड़ लिया है। पार्टी के संस्थापक और समर्थक इस घटना की निंदा करते हुए आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग कर रहे हैं। इसी बीच एक सवाल खड़ा हो गया कि आखिर कॉकरोच जनता पार्टी के लोग केवल उन्हीं राज्यों में स्कूलों का निरीक्षण करने के लिए क्यों जा रहे हैं, जहां पर भाजपा की सरकार है।

आपको बता दें कि एबीपी के टीवी डिबेट में बैठे पार्टी प्रवक्ता आशुतोष रांका से सवाल किया गया कि सीजेपी भाजपा शासित राज्यों में ही क्यों जा रहा है, आप लोग रांची प्रदर्शन में क्यों नहीं गए? इसका जवाब देते हुए आशुतोष ने कहा कि मेरा जन्म जयपुर में हुआ है, इसलिए मैं अपने घर से शुरुआत कर रहा हूं। अभिजीत दीपके महाराष्ट्र के हिंगोली से आते हैं इसलिए उन्होंने वहां से 'स्कूल ठीक करो' अभियान चलाया। वहीं, सौरव दिल्ली से हैं इसलिए वे वहां से शुरुआत करते हैं।

स्कूलों के निरीक्षण के लिए आशुतोष रांका फिर तैयार, जयपुर में हमले के बाद CJP का बड़ा ऐलान

मारपीट करने वाले भाजपा के गुंडे थे- आशुतोष
CJP के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने हमले को लेकर BJP पर निशाना साधते हुए कहा कि यह BJP का पुराना तरीका है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब CJP शिक्षा व्यवस्था की कमियों और सरकारी स्कूलों की बदहाल स्थिति को सामने लाने की कोशिश करती है, तो उनके खिलाफ लोगों को भेजकर डराने या रोकने का प्रयास किया जाता है।

रांका ने कहा कि CJP लगातार टूटे हुए स्कूलों, बंद पड़े स्कूलों और असुरक्षित कक्षाओं का मुद्दा उठा रही है, लेकिन इन समस्याओं पर BJP का कोई नेता जवाब देने को तैयार नहीं है। जब उनसे पूछा गया कि क्या वह हमले में शामिल लोगों को BJP के गुंडे कह रहे हैं, तो रांका ने कहा कि वह बिना आधार के कोई बात नहीं करते। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने इस संबंध में तस्वीरें भी पोस्ट की हैं और लोगों को खुद उन तस्वीरों के आधार पर संबंधित लोगों के राजनीतिक संबंधों की जांच करनी चाहिए।

'स्कूल ठीक करो' अभियान जारी रहेगा- रांका
जयपुर में जर्जर सरकारी स्कूलों का निरीक्षण करने पहुंची CJP की टीम पर हुए हमले के बाद भी संगठन ने अपने अभियान को रोकने से इनकार कर दिया है। घटना के बाद CJP के राजस्थान संयोजक आशुतोष रांका ने कहा कि इस तरह की घटनाओं से संगठन डरने वाला नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकारी स्कूलों की वास्तविक स्थिति सामने लाने और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर स्कूल निरीक्षण अभियान आगे भी जारी रहेगा। रांका के मुताबिक, बच्चों को बेहतर और सुरक्षित स्कूल उपलब्ध कराना जरूरी है और इसके लिए CJP जमीनी स्तर पर जाकर स्कूलों की स्थिति का जायजा लेती रहेगी।

17/08/2026

IAS तुकाराम मुंढे बोले- लोग मुझे अहंकारी समझते हैं, लेकिन…, आलोचकों को दिया करारा जवाब

महाराष्ट्र में अपनी बेबाक और सख्त कार्यशैली के लिए चर्चित आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे एक बार फिर सुर्खियों में हैं। खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग (FDA) की जिम्मेदारी संभालने के बाद मिलावटखोरों और स्वच्छता नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ उनकी कार्रवाई चर्चा का विषय बनी हुई है। तुकाराम मुंढे की गिनती उन अधिकारियों में होती है, जो अपनी स्पष्ट और कड़े फैसले लेने वाली कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं।

हालांकि, उनकी बेबाक कार्यशैली को लेकर कई बार सवाल भी उठते रहे हैं। अब तुकाराम मुंढे ने खुद इस पर अपनी बात रखी है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग उन्हें अहंकारी समझते हैं, लेकिन वह अहंकारी नहीं बल्कि स्पष्टवादी हैं। उन्होंने यह भी कहा कि स्पष्टवादिता और अहंकार के बीच बहुत बारीक अंतर होता है।

‘मैं अहंकारी नहीं हूं...’
एक इंटरव्यू में IAS तुकाराम मुंढे ने कहा, जब कोई अधिकारी मजबूती से अपनी भूमिका रखता है और स्थापित व्यवस्था के दबाव में आए बिना नियमों के मुताबिक काम करता है, तो उसके बारे में गलत धारणा बनाई जा सकती है। ऐसे अधिकारी की छवि खराब करने या उसके बारे में गलत संदेश फैलाने की कोशिश भी होती है।

डोमिनोज पिज्जा पर तुकाराम मुंडे का बड़ा एक्शन, मुंबई के 3 आउटलेट्स सील, किचन में मिलीं गंभीर खामियां

IAS Tukaram Mundhe domino pizza action
मुंढे ने कहा कि उनकी कार्यशैली का आधार ईमानदारी और पारदर्शिता है। वह अपनी बात स्पष्ट रूप से रखते हैं और अपने कर्तव्य के प्रति ईमानदार रहना ही उनकी प्राथमिकता है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी व्यक्ति की देहभाषा या उसके व्यवहार को देखकर उसके व्यक्तित्व का गलत अर्थ निकालना उचित नहीं है।

उनका यह बयान उन लोगों के लिए सीधा जवाब माना जा रहा है, जो उनकी सख्त और बेबाक शैली को अहंकार से जोड़ते हैं।

अन्न एवं औषधि प्रशासन में मिलावटखोरों पर सख्ती
तुकाराम मुंढे ने जब से अन्न एवं औषधि प्रशासन विभाग की जिम्मेदारी संभाली है, तब से मिलावट और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर उनकी चर्चा हो रही है। खाद्य पदार्थों में मिलावट से लेकर नागरिकों के स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में प्रशासन की सख्ती को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

मुंढे की कार्यशैली में समय की पाबंदी, अनुशासन और नियमों का सख्ती से पालन प्रमुख माना जाता है। यही वजह है कि प्रशासनिक व्यवस्था में उनकी अलग पहचान बनी हुई है।

लगातार तबादलों के बावजूद नहीं बदली कार्यशैली
तुकाराम मुंढे महाराष्ट्र में अपनी लगातार होने वाली तबादलों के कारण भी लंबे समय से चर्चा में रहे हैं। उनके अब तक के 21 वर्षों के करियर में 25 बार तबादला हो चुका है। उनकी सख्त प्रशासनिक शैली और नियमों के साथ किसी तरह का समझौता नहीं करने की छवि के कारण उन्हें कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलीं और कई बार उनके तबादले भी हुए।

उनकी पहचान एक ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी के तौर पर बनी है। समय पर काम करना, प्रशासनिक जिम्मेदारियों को पूरी गंभीरता से निभाना और भ्रष्टाचार तथा मिलावट के खिलाफ सख्त रुख अपनाना उनकी कार्यशैली का हिस्सा रहा है।

महाराष्ट्र के छोटे से गांव से IAS बनने का सफर
तुकाराम मुंढे का जन्म महाराष्ट्र के बीड जिले के ताडसोना गांव में एक सामान्य किसान परिवार में हुआ था। बचपन से ही उनका जुड़ाव गांव की संस्कृति और वारकरी परंपरा से रहा है।

उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला परिषद स्कूल से की। इसके बाद उच्च शिक्षा के लिए वह छत्रपति संभाजीनगर पहुंचे। डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर मराठवाड़ा विश्वविद्यालय से उन्होंने राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की।

वर्ष 2005 में वह भारतीय प्रशासनिक सेवा में शामिल हुए। इसके बाद करीब दो दशक के प्रशासनिक करियर में उन्होंने अपनी स्पष्टवादिता, अनुशासन और कड़े फैसलों के कारण अलग पहचान बनाई।

आज तुकाराम मुंढे की कार्यशैली को लेकर राय अलग-अलग हो सकती है। कुछ लोग उनकी सख्ती को प्रशासन के लिए जरूरी मानते हैं, जबकि कुछ लोग उनकी बेबाक शैली पर सवाल उठाते हैं। लेकिन इतना तय है कि उनकी हर नई जिम्मेदारी और कार्रवाई पर महाराष्ट्र की जनता की नजर रहती है।

आयुर्वेदिक दवा कंपनियों पर तुकाराम मुंडे की FDA का बड़ा एक्शन, 10 के लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द, 135 को नोटिस

17/08/2026

15 अगस्त पर शराब के नशे में स्कूल पहुंचा प्रिंसिपल! मुंह के बल गिरा; ग्रामीणों ने गद्दे पर बैठाकर ........

राजस्थान के बाड़मेर जिले के अंबाबाड़ी स्थित राजकीय विद्यालय से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। जहां स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर विद्यालय के प्रधानाचार्य पर शराब के नशे में स्कूल आने का आरोप लगा है। इस घटना से आक्रोशित ग्रामीणों और अभिभावकों ने स्कूल में जमकर हंगामा किया। घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

स्वतंत्रता दिवस पर नशे में धुत दिखे हेड मास्टर
प्राप्त जानकारी के अनुसार, 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान जब बच्चे और उनके अभिभावक स्कूल परिसर में मौजूद थे, तब प्रधानाचार्य कथित तौर पर शराब के नशे में धुत्त होकर पहुंचे। बताया जा रहा है कि नशे की हालत में संतुलन बिगड़ने से वे रास्ते में गिर भी गए, जिससे उनके हाथ और चेहरे पर चोटें आईं। इसके बाद ग्रामीणों ने उन्हें उठाकर एक जगह बैठाया और जमकर खरी-खोटी सुनाई।

ग्रामीणों और पंचायत अध्यक्ष का फूटा गुस्सा
वायरल वीडियो के अनुसार, ग्रामीणों और पंचायत अध्यक्ष ने प्रधानाचार्य के प्रति गहरा आक्रोश जताया। ग्रामीणों ने कहा, पूरा गांव आपसे नाराज है। आप बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं और 15 अगस्त जैसे पवित्र राष्ट्रीय पर्व के दिन भी पीकर आ गए। अगर पीना ही था तो स्कूल नहीं आना चाहिए था। आक्रोशित ग्रामीणों ने उनसे तुरंत पद से इस्तीफा देने की मांग की और स्कूल के मुख्य द्वार पर ताला जड़ा। जब ग्रामीणों ने शिक्षक से जवाब मांगा तो उन्होंने बेपरवाही से कहा, हां, मेरे को जो भी मानो।

शिक्षा विभाग ने दिए जांच के निर्देश
मामले की गंभीरता को देखते हुए ब्लॉक शिक्षा अधिकारी ने संज्ञान लिया है। ब्लॉक शिक्षा अधिकारी का कहना है कि पूरे मामले की विभागीय जांच करवाई जा रही है। जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषी पाए जाने पर संबंधित प्रधानाचार्य के खिलाफ नियमानुसार सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, राजस्थान पत्रिका इस वायरल वीडियो की सत्यता और प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।

17/08/2026

खेत में 5 लाख रुपए दबाकर भूल गया किसान, जुताई के दौरान मिली रकम; नोटों को चट कर गई दीमक .......

चोरों से बचाने के लिए खेत की मिट्टी में दबाकर रखी रकम किसान को वापस तो मिल गई, लेकिन तब तक उसकी बड़ी कीमत चुकानी पड़ी। बालोतरा जिले के पचपदरा क्षेत्र में प्लॉट बेचकर मिली लाखों रुपए की रकम को किसान मांगीलाल मेघवाल ने पॉलिथीन की थैली में भरकर खेत में दबा दिया था। कुछ समय बाद वह उस जगह को भूल गया और काफी तलाश के बावजूद पांच लाख रुपए से भरी थैली नहीं मिली।

बारिश के मौसम में खेत की जुताई के दौरान अचानक वही थैली मिट्टी में नजर आई। किसान ने उसे बाहर निकाला तो रकम की हालत देखकर उसके होश उड़ गए। थैली में रखी करीब 75 प्रतिशत रकम दीमक चट कर चुकी थी। बड़ी मात्रा में नोट गलकर मिट्टी में तब्दील हो चुके थे। कई नोटों के केवल छोटे-छोटे टुकड़े ही बचे थे। जिस रकम को किसान ने चोरों से बचाने के लिए सुरक्षित समझकर खेत में छिपाया था, वही रकम मिट्टी के नीचे पड़े-पड़े खराब हो गई। राजस्थान में सभवत: ऐसा पहला मामला माना जा रहा है।

याद नहीं रही जगह, तलाशता रहा रकम
किसान के मुताबिक उसने प्लॉट बेचने से मिली रकम को चोरों से सुरक्षित रखने के लिए बैंक के बजाय खेत में छिपाकर रखा था। रकम को पॉलिथीन की थैली में भरकर मिट्टी में दबा दिया गया। बाद में वह उस जगह को भूल गया। इसके बाद किसान ने काफी तलाश की, लेकिन उसे पैसों की थैली नहीं मिल सकी। बारिश के बाद खेत की जुताई शुरू हुई तो मिट्टी के भीतर दबाई गई थैली अचानक सामने आ गई। थैली मिलने पर किसान को उम्मीद थी कि उसकी रकम सुरक्षित मिल जाएगी, लेकिन उसे खोलने के बाद सामने आया दृश्य उसकी उम्मीदों के बिल्कुल उलट था। मेहनत और जमीन के सौदे से जुटाई गई रकम का बड़ा हिस्सा दीमक के कारण नष्ट हो चुका था।

रकम मिली, लेकिन बचा बहुत कम
घटना के बाद खेत में मिले नोटों के टुकड़ों और खराब हो चुकी करेंसी की तस्वीरें सामने आई हैं। तस्वीरों में नोटों की खराब हालत पूरे मामले की कहानी बयां कर रही है। किसान के लिए यह रकम मिलना राहत के बजाय बड़ी पीड़ा लेकर आया, क्योंकि चोरों से बचाने के लिए छिपाई गई रकम का करीब तीन-चौथाई हिस्सा उसके हाथ में आने से पहले ही नष्ट हो चुका था। यह घटना किसान की उस पीड़ा को सामने लाती है, जिसमें रकम को सुरक्षित रखने की कोशिश आखिरकार उसके बड़े नुकसान का कारण बन गई।

17/08/2026

MLA रविंद्र सिंह भाटी के वीडियो से सोशल मीडिया पर छिड़ी रार, पूछा- क्या यही है आजादी का 80वां साल .........

स्वतंत्रता दिवस के मौके पर शिव क्षेत्र से MLA रविंद्र सिंह भाटी का एक वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है। आजादी के 80 साल बाद भी स्कूलों की स्थिति को लेकर गंभीर सवाल किए जा रहे हैं। वहीं कुछ यूजर्स रविंद्र सिंह भाटी पर भी सवाल खड़े करते नजर आए।

जिले के शिव विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर सीमावर्ती इलाके के एक सरकारी स्कूल में पहुंचकर शिक्षा व्यवस्था की बदहाल तस्वीर सामने रखी। राजकीय प्राथमिक विद्यालय थानाणी, ग्राम द्राभा, गड़रारोड में बच्चों के साथ स्वतंत्रता दिवस मनाने पहुंचे भाटी ने स्कूल की स्थिति का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया। वीडियो सामने आने के बाद शिक्षा व्यवस्था और सरकारों की कार्यप्रणाली को लेकर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है।

रविंद्र सिंह भाटी ने अपने एक्स हैंडल पर वीडियो साझा करते हुए बताया कि वह भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा से करीब 15 से 20 किलोमीटर अंदर स्थित एक ऐसे विद्यालय में 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहे हैं, जो घास-फूस के झोपड़े में संचालित हो रहा है। वीडियो में स्कूल की स्थिति दिखाते हुए उन्होंने सवाल उठाया कि आजादी के 80 साल बाद भी देश के सीमावर्ती क्षेत्रों में बच्चों को पढ़ने के लिए बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं।

जयपुर-दिल्ली में बैठे लोगों से भाटी का सवाल?
भाटी ने कहा कि यह सवाल केवल एक स्कूल का नहीं, बल्कि देश की शिक्षा व्यवस्था का है। उन्होंने पूछा कि आजादी के 80 साल बाद क्या हमारी शिक्षा व्यवस्था वास्तव में सही दिशा में आगे बढ़ रही है? उन्होंने जयपुर और दिल्ली में बैठे लोगों से सवाल करते हुए कहा कि क्या वे अपने बच्चों को ऐसे विद्यालय में पढ़ने के लिए भेजेंगे।

पिछली सरकारों के कार्यों पर प्रश्न?
विधायक ने पिछले कई दशकों में सत्ता में रही सरकारों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि आखिर 80 वर्षों में इन विद्यालयों के लिए क्या किया गया? एक तरफ देश को विश्वगुरु बनाने की बात होती है, चांद तक पहुंचने और बड़ी उपलब्धियों का जिक्र किया जाता है, लेकिन दूसरी तरफ देश के बच्चे आज भी घास-फूस के स्कूलों में पढ़ने को मजबूर हैं।

राइजिंग राजस्थान का किया जिक्र
रविंद्र सिंह भाटी ने 'राइजिंग राजस्थान' और 'वर्ष 2047 तक विकसित भारत' के लक्ष्य का भी जिक्र किया। उन्होंने सवाल किया कि जब राजस्थान में बड़े निवेश और विकास की बातें हो रही हैं तथा भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य रखा गया है, तो क्या ऐसी स्कूल व्यवस्था के साथ यह लक्ष्य हासिल किया जा सकता है?

स्कूलों की हालत पर गंभीर सवाल
उन्होंने कहा कि देश की सीमाओं को मजबूत करना जरूरी है, लेकिन सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों के भविष्य को मजबूत करना भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने स्कूल की स्थिति को गंभीर विषय बताते हुए पूछा कि क्या ऐसी परिस्थितियां शर्मनाक नहीं हैं। इसके बाद उन्होंने देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दीं। वीडियो में बच्चे भारत माता की जय के नारे लगाते हुए भी नजर आए।

कुछ यूजर्स ने एमएलए को भी निशाने पर लिया?
भाटी के वीडियो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर शिक्षा व्यवस्था को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कई लोग सरकारों से सवाल कर रहे हैं, जबकि कुछ यूजर्स ने विधायक की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। एक यूजर ने टिप्पणी करते हुए कहा कि 'करीब ढाई साल से विधायक रहने के दौरान यदि भाटी इस विद्यालय के लिए एक-दो कमरे बनवाकर वहीं स्वतंत्रता दिवस मनाते तो यह ज्यादा बेहतर होता।'

लोग लगातार शेयर कर रहे वीडियो
अब यह वीडियो सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर तेजी से साझा किया जा रहा है। एक तरफ लोग सीमावर्ती क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों की स्थिति और बच्चों को मिलने वाली सुविधाओं पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर भाटी से भी पूछा जा रहा है कि जनप्रतिनिधि के तौर पर वे इस स्कूल की स्थिति सुधारने के लिए क्या कदम उठाएंगे। ऐसे में स्वतंत्रता दिवस पर सामने आया यह वीडियो शिक्षा व्यवस्था के साथ-साथ जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी को लेकर भी नई बहस खड़े कर रहा है।

17/08/2026

अचानक बदली आरक्षण लॉटरी की तारीख, ग्रामीण क्षेत्रों में आचार संहिता को लेकर बढ़ी अटकलें

Rajasthan Panchayat Election 2026: राजस्थान सरकार ने जिला परिषद सदस्यों, प्रधान, पंचायत समिति सदस्यों, सरंपच और वार्ड पंचों के आरक्षण की लॉटरी की नई तारीखें तय कर दी हैं। वहीं, 309 निकायों के 10,245 वार्डों के आरक्षण की लॉटरी आज निकाली जाएगी।

राजस्थान सरकार ने जिला परिषद सदस्यों, प्रधान, पंचायत समिति सदस्यों, सरंपच और वार्ड पंचों के आरक्षण की लॉटरी की नई तारीखें तय कर दी हैं। जिला स्तर पर जिला परिषद सदस्य, प्रधान और पंचायत समिति सदस्यों के लिए आरक्षण लॉटरी अब अगले माह 17 सितंबर को निकाली जाएगी। जबकि उपखंड स्तर पर सरपंच और वार्ड पंच के आरक्षण की लॉटरी 18 सितंबर को निकाली जाएगी। वहीं, 309 निकायों के 10,245 वार्डों के आरक्षण की लॉटरी आज निकाली जाएगी।

पहले लॉटरी 17 और 18 अगस्त को निकाला जाना प्रस्तावित था। अचानक लॉटरी की तिथि बदलने से पंचायतीराज संस्थाओं के आरक्षण की लॉटरी करीब एक माह आगे खिसकने के बाद अब ग्रामीण क्षेत्र में आचार संहिता लागू होने को लेकर भी नई अटकलें शुरू हो गई है। ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार, 13 अगस्त को जिला प्रमुख पदों के आरक्षण लॉटरी प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है। पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव द्वितीय चरण में संभावित होने के कारण जिला स्तर पर जिला परिषद सदस्य और प्रधान पद तथा उपखंड स्तर पर सरपंच एवं वार्ड पंच के आरक्षण की लॉटरी की तारीखें निर्धारित की गई है।

आचार संहिता को लेकर भी बढ़ी अटकलें
यदि नगरीय निकाय और पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव अलग-अलग चरण में होते हैं, तो ग्रामीण क्षेत्रों में नगरीय निकाय चुनाव के साथ ही आचार संहिता लागू नहीं होगी। ऐसी स्थिति में पंचायत क्षेत्रों में विकास कार्यों की रफ्तार पर चुनावी बंदिशों का तत्काल असर नहीं पड़ेगा। हालांकि, ग्रामीण क्षेत्र में आचार संहिता कब और किस स्तर पर लागू होगी, यह स्थिति राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से जारी होने वाले अंतिम चुनाव कार्यक्रम के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट होगी।

बिना ठोस कारण बताए लॉटरी स्थगित करने पर चर्चाएं तेज
पंचायतीराज विभाग ने अचानक एक दिन पहले पंचायतीराज संस्थाओं के वार्डों की लॉटरी को 1 महीने आगे खिसकाने के पीछे कोई ठोस कारण नहीं बताया है। लॉटरी स्थगित करने को लेकर पंचायतीराज विभाग के आदेश में हाईकोर्ट के नवंबर तक पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव करवाने के फैसले की पालना करने के संकल्प का हवाला दिया है। पंचायतीराज विभाग के आदेश में पंचायतीराज चुनाव शहरी निकायों के बाद दूसरे फेज में होने की संभावना का हवाला दिया है। एक तरफ विभाग ने हाईकोर्ट के आदेशों की पालना करने की बात कही है, दूसरी तरफ पंचायतीराज चुनाव दूसरे फेज में होने की संभावना के कारण लॉटरी को एक महीने आगे खिसकाया है।

निकायों की लॉटरी आज
राज्य की 309 निकायों के 10,245 वार्डों के आरक्षण की लॉटरी सोमवार को निकाली जाएगी। निकायों के चुनाव पहले चरण में होंगे। आरक्षण का निर्धारण होते ही भाजपा और कांग्रेस में टिकट के दावेदारों का गणित बदल जाएगा। जिन वार्डों में आरक्षण की स्थिति बदलेगी, वहां कई निवर्तमान पार्षदों और संभावित प्रत्याशियों को नए वार्ड तलाशने पड़ सकते हैं, जबकि लंबे समय से चुनाव की तैयारी कर रहे नए चेहरों के लिए भी मौका बन सकता है।

13/08/2026

राजस्थान के इतिहास में कुछ ऐसे शासक हुए हैं जिनका मूल्यांकन केवल उनके राजमहलों और शाही जीवन से नहीं, बल्कि उनके द्वारा किए गए उन कामों से होना चाहिए जिनका असर आम जनता की कई पीढ़ियों तक दिखाई देता है। बीकानेर के महाराजा गंगा सिंह जी का नाम ऐसे ही दूरदर्शी शासकों में लिया जाता है।

गंग नहर को बीकानेर की धरती तक लाने के कारण उन्हें अक्सर "कलियुग का भागीरथ" कहा जाता है। लेकिन उनकी उपलब्धियां केवल पानी तक सीमित नहीं थीं। जिस समय पश्चिमी राजस्थान का बड़ा हिस्सा रेगिस्तान, रेत और कठिन आवागमन के लिए जाना जाता था, उस समय बीकानेर रियासत में रेलवे का विस्तार करना अपने आप में बहुत बड़ी चुनौती थी।

आज हम जिस रेल नेटवर्क को सामान्य सुविधा मानते हैं, उसके पीछे कभी ऐसे दौर की मेहनत थी जब मरुस्थल में एक-एक किलोमीटर रेल लाइन बिछाना किसी बड़े अभियान से कम नहीं था।

बीकानेर रेलवे का इतिहास महाराजा गंगा सिंह के शासन से पहले ही शुरू हो चुका था। 1891 में बीकानेर रेलवे स्टेशन की स्थापना हुई थी और बीकानेर को जोधपुर-बीकानेर रेलवे से जोड़ने की प्रक्रिया ने रियासत को व्यापक रेल नेटवर्क से जोड़ने की नींव रखी। स्टेशन के निर्माण में बीकानेर के प्रसिद्ध व्यापारी राय दीवान बहादुर सर कस्तूरचंद डांगा के योगदान का भी उल्लेख मिलता है।

लेकिन महाराजा गंगा सिंह के शासनकाल में इस नेटवर्क का जिस स्तर पर विस्तार हुआ, उसने बीकानेर रियासत की तस्वीर बदल दी।

रेगिस्तान में रेल लाइन बिछाना आज भी आसान काम नहीं है। उस समय तो आधुनिक मशीनरी और तकनीक भी उपलब्ध नहीं थी। रेत के धोरों, तेज हवाओं, पानी की कमी और दूर-दराज के इलाकों के बीच रेलवे का विस्तार करना बहुत बड़ी प्रशासनिक और इंजीनियरिंग चुनौती थी।

इसके बावजूद बीकानेर स्टेट रेलवे का नेटवर्क लगातार बढ़ता गया।

समय के साथ बीकानेर से सूरतगढ़, बठिंडा, हिसार, रतनगढ़, सरदारशहर, कोलायत, श्रीगंगानगर और अनूपगढ़ जैसे दूरस्थ क्षेत्रों को रेलवे से जोड़ने का काम हुआ। इन रेल लाइनों ने केवल यात्रियों को सुविधा नहीं दी, बल्कि व्यापार, कृषि, सैन्य गतिविधियों और दूर-दराज के गांवों के बीच संपर्क को भी मजबूत किया।

बीकानेर रियासत के लिए रेलवे का अर्थ केवल रेलगाड़ी चलाना नहीं था।

रेल का मतलब था—रेगिस्तान की दूरी कम होना।

रेल का मतलब था—व्यापार का विस्तार।

रेल का मतलब था—लोगों और बाजारों के बीच नया संपर्क।

और रेल का मतलब था—एक ऐसे क्षेत्र को आधुनिक परिवहन व्यवस्था से जोड़ना, जहां पहले लंबी दूरी तय करना बेहद कठिन था।

महाराजा गंगा सिंह की दूरदर्शिता का एक और महत्वपूर्ण उदाहरण लालगढ़ रेलवे वर्कशॉप है। 1920 के दशक में बीकानेर में रेलवे संसाधनों और मरम्मत की सुविधा विकसित की गई। इससे रेल व्यवस्था को स्थानीय स्तर पर तकनीकी आधार मिला और बड़ी संख्या में लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा हुए।

यानी सोच केवल यह नहीं थी कि रेल बाहर से आए और चली जाए।

सोच यह थी कि रेल व्यवस्था के लिए आवश्यक ढांचा भी बीकानेर में तैयार हो।

यही किसी दूरदर्शी नेतृत्व की पहचान होती है।

महाराजा गंगा सिंह का समय उस दौर का था जब देश में अंग्रेजी शासन था और विभिन्न रियासतें अपनी-अपनी परिस्थितियों के अनुसार विकास की योजनाएं बना रही थीं। ऐसे समय में बीकानेर जैसे मरुस्थलीय क्षेत्र में पानी, रेलवे और बुनियादी ढांचे पर जोर देना दूरगामी सोच को दर्शाता है।

गंग नहर और रेलवे—इन दोनों को साथ रखकर देखें तो महाराजा गंगा सिंह की विकास सोच को बेहतर ढंग से समझा जा सकता है।

एक तरफ पानी लाकर रेगिस्तान की भूमि को कृषि के योग्य बनाने का प्रयास हुआ।

दूसरी तरफ रेल के माध्यम से उन इलाकों को बाजारों और बड़े शहरों से जोड़ने का प्रयास हुआ।

पानी आया तो खेती बढ़ी।

रेल आई तो अनाज और अन्य सामान को दूर तक पहुंचाने की संभावना बढ़ी।

इस तरह बुनियादी ढांचे की दो अलग-अलग कड़ियां एक-दूसरे की ताकत बन गईं।

इतिहास का एक दिलचस्प पहलू यह भी है कि लालगढ़ पैलेस के आसपास तक रेलवे लाइन पहुंची थी और महाराजा की यात्राओं के लिए विशेष रेल सुविधा का उपयोग किया जाता था। आज उस पुराने रेल मार्ग का अधिकांश हिस्सा इतिहास बन चुका है, लेकिन महाराजा गंगा सिंह की रेल यात्राओं से जुड़ा रेलवे कोच आज भी उनके दौर की याद दिलाता है।

जब हम आज की राजनीति और प्रशासन को देखते हैं, तो अक्सर विकास की बड़ी-बड़ी योजनाओं की घोषणाएं सुनाई देती हैं। लेकिन महाराजा गंगा सिंह के समय की कई परियोजनाओं को देखकर यह समझ आता है कि दूरदर्शिता केवल घोषणा करने का नाम नहीं है।

दूरदर्शिता का मतलब है—

आज ऐसी नींव रखना जिसका फायदा आने वाली पीढ़ियां उठाएं।

रेगिस्तान में रेल की पटरियां बिछाना उस समय शायद उतना ही कठिन लगता होगा जितना आज किसी बड़े मरुस्थलीय क्षेत्र में नई परिवहन व्यवस्था खड़ी करना।

इसीलिए महाराजा गंगा सिंह का नाम आज भी बीकानेर के इतिहास में सम्मान के साथ लिया जाता है।

हालांकि इतिहास को समझते समय एक बात का ध्यान रखना जरूरी है। बीकानेर की रेलवे व्यवस्था का विकास किसी एक व्यक्ति के प्रयास से नहीं हुआ। इसमें रियासती प्रशासन, इंजीनियरों, रेलवे कर्मचारियों, श्रमिकों, व्यापारियों और विभिन्न संस्थाओं की भी महत्वपूर्ण भूमिका थी। लेकिन इस पूरी प्रक्रिया को दिशा देने वाले शासक के रूप में महाराजा गंगा सिंह की भूमिका निश्चित रूप से महत्वपूर्ण रही।

उनकी सबसे बड़ी विशेषता शायद यही थी कि उन्होंने बीकानेर की भौगोलिक कठिनाइयों को केवल समस्या के रूप में नहीं देखा।

उन्होंने उन्हें चुनौती के रूप में देखा।

जहां रेगिस्तान था, वहां पानी लाने की कोशिश की।

जहां दूरी थी, वहां रेल पहुंचाने की कोशिश की।

जहां आवागमन कठिन था, वहां परिवहन का ढांचा खड़ा करने की कोशिश की।

और जहां रोजगार की जरूरत थी, वहां औद्योगिक और रेलवे ढांचा विकसित करने की कोशिश की।

आज जब बीकानेर और आसपास के क्षेत्रों की रेलवे सुविधाओं, नई रेल लाइनों और पुराने मार्गों की चर्चा होती है, तो स्वाभाविक रूप से उस दौर की याद आती है जब सीमित संसाधनों के बावजूद मरुस्थल में रेलवे का विस्तार किया जा रहा था।

महाराजा गंगा सिंह का इतिहास हमें एक बात जरूर सिखाता है—

बड़ा काम हमेशा बड़े संसाधनों से नहीं होता, कई बार बड़ी सोच ही सबसे बड़ा संसाधन होती है।

रेगिस्तान में बिछी वे पुरानी रेल पटरियां केवल लोहे की पटरियां नहीं थीं। वे उस दौर की दूरदृष्टि, मेहनत और विकास की सोच की निशानी थीं।

और शायद इसी वजह से बीकानेर के इतिहास में महाराजा गंगा सिंह का नाम आज भी केवल एक महाराजा के रूप में नहीं, बल्कि मरुधरा को आधुनिक बुनियादी ढांचे से जोड़ने वाले दूरदर्शी शासक के रूप में लिया जाता है।

गंग नहर की धारा हो या रेगिस्तान में दौड़ती रेल...

दोनों के पीछे एक ही सोच दिखाई देती है—

बीकानेर की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों को उसकी कमजोरी नहीं, उसकी ताकत में बदलना।

यही महाराजा गंगा सिंह की सबसे बड़ी विरासतों में से एक है।

Category

Website

Address


Blue City
Jodhpur
342001

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Sky Rajasthan posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Subscribe

We will notify you when anything happens in Jodhpur.