Lokdal
This is Official page of Lok Dal. Lok Dal (People's Party), a political party in India structured by Late Ch. He has also been the M.L.C. in U.P.
Charan Singh (Former Prime Minister of India). Sunil Singh, a dynamic youth leader, is the National President of Party belongs to a patriotic family. He is an Engineering graduate and has done Masters in Business Management. State Assembly. He claims to be carrying on the political legacy of Charan Singh. The party's official electoral symbol is a “Khet Jotata hua Kisan”( A farmer ploughing the field). Lok Dal Party, formed in the year 1980 is a galaxy of very prominent political leaders of our country, say, Hemwati Nandan, Devi Lal, Mulayam Singh Yadav, Nitish Kumar, Karpuri Thakur, Sharad Pawar, Rajendra Singh, Ram Vilas Paswan, Jorge Farnandes, Viju Patnayak, Beni Prasad Verma, Quazi Rashid Masood and many more.
06/09/2026
E20 इथेनॉल स्कैम: जनता की गाड़ी तबाह, किसान ठगा गया, मुट्ठीभर नेता मालामाल!
भाइयो-बहनो,
मोदी सरकार ने देश की जनता को जबरन E20 पेट्रोल पीने पर मजबूर कर दिया। शुद्ध पेट्रोल का विकल्प छीन लिया गया। गाड़ियां खराब हो रही हैं, माइलेज घट गया और देश को करीब 88,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो गया।
कहा गया था कि इससे किसान को फायदा होगा। हकीकत ये है:
• गन्ना किसान को MSP की कानूनी गारंटी आज तक नहीं मिली।
• मिल मालिक चीनी बनाने की जगह इथेनॉल बनाकर दोगुना मुनाफा कमा रहे हैं।
• देश में चीनी की कमी हो गई, अब अमेरिका से 0% ड्यूटी पर चीनी आने वाली है — फायदा अडानी-अंबानी जैसे व्यापारियों को।
• सरकारी चावल सस्ता बेचकर इथेनॉल बनाया जा रहा है। मक्का भी अब अमेरिका से आएगा।
• इथेनॉल बनाने में पानी बर्बाद हो रहा है।
कुछ नेताओं के परिवार की कंपनियां 18 करोड़ से 600 करोड़ तक पहुंच गईं। यही इस नीति की असली वजह है।
लोकदल की साफ मांग है: 👉 पूरे E20 स्कैम की CBI जांच हो। 👉 गन्ना किसान को तुरंत ₹800 प्रति क्विंटल मिले।
चौधरी चरण सिंह के नाम पर रैली निकालने वाले अब बताएं — क्या वो किसान को दोगुना दाम दे सकते हैं? नहीं दे सकते।
अब और बर्दाश्त नहीं।�अभी नहीं तो कभी नहीं।
Ethanol पर BJP सरकार को घेरा! Sunil Chaudhary ने Press Conference में लगाए बड़े आरोप | Lok Dal ...
🚜 चीनी–इथेनॉल नीति पर लोकदल के गंभीर सवाल
लोकदल ने सरकार से पूछा—गन्ना किसान और आम उपभोक्ता के सामने चीनी–इथेनॉल का पूरा हिसाब कब रखा जाएगा?
अगर गन्ने और चीनी से इथेनॉल उत्पादन से इतना बड़ा आर्थिक लाभ हो रहा है, तो उस लाभ में गन्ना किसान का हिस्सा कितना है और आम उपभोक्ता को राहत क्यों नहीं मिल रही?
लोकदल की मांग है कि सरकार सार्वजनिक करे—
🔹 चीनी उत्पादन और इथेनॉल उत्पादन का पूरा वर्षवार हिसाब
🔹 चीनी मिलों को होने वाले लाभ और किसानों को मिलने वाले भुगतान का विवरण
🔹 चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी के वास्तविक कारण
🔹 चीनी के आयात की आवश्यकता क्यों पड़ी और इससे किसे लाभ होगा
🔹 इथेनॉल नीति से सरकार, मिलों और किसानों को वास्तविक आर्थिक लाभ कितना हुआ
लोकदल का सवाल साफ है—नीति किसानों के हित में है या कुछ चुनिंदा चीनी मिलों और पूंजीपतियों के लाभ के लिए?
सरकार को आंकड़े छिपाने के बजाय किसान और उपभोक्ता के सामने पूरा सच और पूरा हिसाब रखना चाहिए।
— लोकदल
किसान • मजदूर • आम जनता की आवाज़
#लोकदल #सुनीलसिंह #गन्नाकिसान #चीनी #इथेनॉल #किसान #महंगाई #चीनीआयात #किसानकीआवाज
लोकदल अध्यक्ष सुनील सिंह की प्रेस वार्ता
04/09/2026
🔥 सहारनपुर में जयंत चौधरी ने फिर लोकदल का नाम चुराया, चरण सिंह की विरासत को NDA की दुकान बना दिया 🔥
चौधरी सुनील सिंह�राष्ट्रीय अध्यक्ष, लोकदल
सहारनपुर की रैली में जयंत चौधरी ने एक भाषण में चार बार “लोकदल” कहा।�कहा — विरोधियों की जुबान से लोकदल का नाम नहीं हट रहा।�कहा — इसलिए लोकदल बना।�कहा — यह लोकदल की मीटिंग है।
सच्चाई यह है:
चौधरी चरण सिंह जी कभी RLD के सदस्य नहीं रहे।�निधन 1987 में हुआ।�RLD 1996 में बनी।�नाम लेकर NDA का प्रचार करना विरासत नहीं, नाम चोरी है। चरण सिंह जी की स्मृति को सत्ता की दुकान बनाना उनकी मानहानि है।
और जो बातें जयंत चौधरी ने जानबूझकर नहीं कीं, वही किसान की असली लड़ाई है:
❌ भारत-अमेरिका सौदा — किसान संगठन जिसे किसान-विरोधी बता रहे हैं, उस पर एक शब्द नहीं। मंत्री हैं, फिर भी सौदे की कीमत किसान क्यों चुकाए — यह सवाल गायब।
❌ MSP की कानूनी गारंटी — चरण सिंह की राजनीति का मूल यही था कि किसान को फसल का हक कानून से मिले। जयंत गन्ना के आंकड़े गिनाते हैं, कानूनी गारंटी की मांग नहीं उठाते। वोट के समय वादा, सत्ता में चुप्पी।
❌ चीनी पर शून्य ड्यूटी आयात — सरकार ने करीब 10 लाख टन कच्ची चीनी ड्यूटी-फ्री आने दी। चीनी सस्ती करो, उपभोक्ता खुश करो — और गन्ना किसान की कीमत कमजोर करो। सहारनपुर में रसगुल्ला-चीनी महंगी बताकर सपा पर हमला, आयात से किसान कैसे कमजोर होगा — यह नहीं बताया।
❌ इथेनॉल — जयंत कह रहे हैं इथेनॉल से किसान समृद्ध। हकीकत यह है कि चीनी मिलों ने गन्ना इथेनॉल में मोड़ा, चीनी कम हुई, कीमत बढ़ी, फिर आयात खोलना पड़ा। फायदा मिल मालिक और फैक्ट्री का, किसान को सिर्फ “राष्ट्रीय नीति” का लेक्चर। इथेनॉल किसान का नहीं, मिल मालिक का बिजनेस मॉडल बन गया है।
गन्ना उत्पादन बढ़ा कहना आसान है।�किसान की आय, कर्ज, MSP कानून, आयात और सौदे पर चुप रहना — यही RLD की नई राजनीति है।
लोकदल नाम उनकी पार्टी का नहीं है।�चरण सिंह की लड़ाई उनकी गठबंधन की नौकरी नहीं है।
किसान को नकली वकील नहीं चाहिए।�किसान को वह आवाज चाहिए जो नाम चुराए नहीं, हक मांगे।
लोकदल वही आवाज है।�अब और बर्दाश्त नहीं।
#लोकदल #चरणसिंहकीविरासत ानूनीगारंटी #किसानविरोधीसौदा
04/09/2026
🔥 लोकदल को 5 साल में 25 लाख भी नहीं… गुजरात की कागज़ी पार्टियों को हज़ारों करोड़!! ये चंदा नहीं, लोकतंत्र की हत्या है।
देखो फर्क।�चौधरी चरण सिंह की लोकदल — कभी राष्ट्रीय दल, किसान की असली आवाज —�पिछले पांच साल में 25 लाख का चंदा भी नहीं मिला।
और बाकी?
पिछले 5 साल (2020-21 से 2024-25) का घोषित बड़ा चंदा (₹20,000+):
• BJP — लगभग 10,130 करोड़�(477 + 615 + 720 + 2,244 + 6,074 करोड़)
• कांग्रेस — लगभग 1,049 करोड़
• AAP — लगभग 125 करोड़
• 2024-25 में DMK — 366 करोड़, TMC — 185 करोड़, YSRCP — 140 करोड़
• समाजवादी पार्टी — पांच साल में महज ~2 करोड़�(50 लाख + 27 लाख + 47 लाख + 93 लाख)
एक साल 2024-25 में अकेले BJP को 6,074 करोड़ — बाकी राष्ट्रीय दलों के योग से 10 गुना ज्यादा।�सपा जैसे बड़े क्षेत्रीय दल को साल में 1 करोड़ भी नहीं। लोकदल को 25 लाख भी नहीं।
अब BBC वाली सच्चाई देखो।�गुजरात की कागज़ी पार्टियां — चुनाव नहीं लड़तीं, दफ्तर बंद, बोर्ड तक नहीं —�एक ही साल 2023-24 में:
• आम जनमत पार्टी — 620 करोड़
• सत्यवादी रक्षक — 330 करोड़
• स्वतंत्रता अभिव्यक्ति — 219 करोड़
• गरीब कल्याण — 138 करोड़
छह में से ज्यादातर गुजरात में रजिस्टर्ड। चार का अड्डा एक ही इलाके में।�IT विभाग 5,591 करोड़ फर्जी डोनेशन की बात कह चुका है।
सवाल एक ही है:�किसान की पार्टी को 25 लाख भी नहीं,�सपा को साल में 1 करोड़ भी नहीं,�कागज़ी दलों को सैकड़ों करोड़,�सत्ताधारी दल को पांच साल में दस हजार करोड़ से ज्यादा?
इलेक्टोरल बॉन्ड बंद हुआ तो नया रास्ता निकाल लिया — ट्रस्ट, कागज़ी पार्टी, रसीद, नकद वापसी।�ये पूरी BJP पार्टी नहीं।�गुजराती चेहरे इस तंत्र के मालिक हैं — लोकतंत्र के हत्यारे।
असली दल भूखा। नकली दल अमीर।�ये लोकतंत्र नहीं, लूट का मॉडल है।
खाते खोलो।�पैसे का असली मालिक बताओ।�हिसाब दो।
अब नहीं तो कभी नहीं।
— लोकदल
#कागजीपार्टियां #10130करोड़ #कालाधनसफेद #गुजरातकनेक्शन #लोकतंत्रकीहत्या #लोकदल #किसानपार्टी
BBC Investigation: भारत की वो 'पेपर पार्टियां' जो बमुश्किल चुनाव लड़ती हैं पर करोड़ों चंदा पाती हैं पिछले लोकसभा चुनाव से पहले, साल 2023-24 के वित्त वर्ष में कई ऐसे छो...
04/09/2026
🔥🔥 दिल्ली पुलिस का नंगा गुंडा राज! मुख्यमंत्री से सवाल पूछा तो दो महिला पत्रकारों को थाने में दंडों से पीटा, नाम “खान” सुनते ही और बर्बर हो गई!
लोकदल की ओर से
यह मोदी सरकार का असली चेहरा है — सवाल पूछने वाली महिला पत्रकारों को पीटना, नाम सुनकर नफरत निकालना, फिर “भ्रामक बयान” कहकर बच निकलना।
कल साकेत थाने में 4PM की पत्रकार शाहीन खान और नफीसा खान के साथ जो हुआ, वह सिर्फ पुलिस अत्याचार नहीं, लोकतंत्र पर सीधा हमला है।
मैक्स हॉस्पिटल साकेत में गृह मंत्री अमित शाह और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का कार्यक्रम था। पत्रकार सवाल पूछने गईं। दिल्ली पुलिस ने उन्हें घसीटकर थाने पहुंचाया, कमरे में बंद किया, दंडे मारे, थप्पड़ जड़े। हाथ-पैर पर निशान बनाए। नफीसा को बेहोश हालत में छोड़ दिया।
शाहीन खान कैमरे के सामने कह रही हैं — पूरा मेंटली-फिजिकली असॉल्ट करने के बाद नाम पूछा जा रहा है। मेरा नाम खान है… मेरे नाम में खान आता है… इसलिए दंडे मारे गए, थप्पड़ जड़े गए। नफरत निकाली गई।
पुलिस का जवाब? स्कूटर खड़ी कर दी थी, वीवीआईपी रूट रोका था। यानी सवाल पूछना अब जुर्म है। “खान” नाम सुनते ही मार और तेज हो जाती है।
यह वही दिल्ली पुलिस है जो गृह मंत्रालय के अधीन है। अमित शाह की पुलिस। रेखा गुप्ता की सरकार। मोदी का राज। छात्रों को पीटो, किसानों को कुचलो, पत्रकारों को दंडे मारो — यही इनकी नीति है।
लोकदल साफ कहता है:
• साकेत थाने के एसएचओ समेत सभी शामिल पुलिसकर्मियों पर तुरंत एफआईआर दर्ज हो, सस्पेंड किए जाएं।
• स्वतंत्र जांच हो।
• गृह मंत्री और दिल्ली की मुख्यमंत्री जवाब दें।
• प्रेस की आजादी पर हमला बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
आज पत्रकार को पीटा, कल आम आदमी को पीटेंगे। यह तानाशाही का रास्ता है।
लोकदल इस बर्बरता की कड़ी निंदा करता है और पीड़ित पत्रकारों के साथ खड़ा है। न्याय चाहिए, माफी नहीं। लड़ाई जारी रहेगी।
#दिल्ली_पुलिस_गुंडा_राज� #पत्रकारिता_की_हत्या� #खान_नाम_की_सजा� � � � � �
— लोकदल
निपेंद्र मिश्रा गए तो जितेंद्र मिश्रा आए!
राम मंदिर के प्रबंधन में एक मिश्रा गए, तो दूसरे मिश्रा आ गए। अब नए CEO के रूप में डिफेंस से जुड़े अधिकारी की नियुक्ति हुई है।
उम्मीद है कि राम भक्तों के साथ अब कोई धोखा नहीं होगा और मंदिर से जुड़े पैसों में हुई कथित गड़बड़ियों का पैसा वापस राम भक्तों को मिल जाएगा।
राम के नाम पर आस्था रखने वाली जनता को आखिर कब मिलेगा उसके सवालों का जवाब?
धर्म आस्था का विषय है, राजनीति और पैसों के खेल का नहीं।
— लोकदल
#लोकदल #राममंदिर #रामभक्त #अयोध्या #सवाल_जवाब_दो
02/09/2026
7.8% GDP का झूठ पकड़ा गया! मोदी सरकार आंकड़ों से जनता को बेवकूफ बना रही है!! 🔥🔥🔥
देश के युवा बेरोज़गार सड़कों पर हैं, रुपया 96-97 पर लुढ़क चुका है, लोग परिवार का सोना गिरवी रखकर गुजारा कर रहे हैं और विदेशी पूंजी भाग रही है — ऊपर से सरकार 7.8% GDP ग्रोथ का ढोल पीट रही है।
ये ग्रोथ नहीं, आंकड़ों की ठगी है।
पूर्व वित्त सचिव साफ बोल रहे हैं — असली आंकड़ा सिर्फ 2.6% है।�पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार का शोध कहता है पिछले एक दशक में औसत ग्रोथ महज 4-4.5% रही। IMF ने भी हमारे आंकड़ों को C ग्रेड दिया था।
ये हकीकत है:
• युवा बेरोज़गारी 16.2%, शहरी युवाओं में 18.2%, युवा महिलाओं में 20% से ऊपर
• 8.7 करोड़ युवा न पढ़ रहे, न काम कर रहे
• नेट FDI 28 अरब डॉलर से गिरकर 1 अरब पर आ गया
• रुपया एशिया की सबसे कमजोर मुद्राओं में
• गोल्ड लोन 50% उछला
• 5 साल में 9 लाख भारतीयों ने नागरिकता छोड़ दी
• मैन्युफैक्चरिंग 75 साल बाद भी GDP का सिर्फ 14%
• विश्व निर्यात में भारत का हिस्सा घटा है
डिफ्लेटर कम करके और बेस ईयर बदलकर आंकड़े चमकाए गए। जनता पिस रही है, सरकार झूठ बोल रही है।
लोकदल का संदेश साफ है — आंकड़ों का खेल बंद करो, सच्ची अर्थव्यवस्था सुधारो। युवाओं को रोजगार दो, किसानों को न्याय दो।
अभी नहीं तो कभी नहीं!
Did India's GDP Grow At A Phenomenal 7.8%? | Decoding The Math Behind This Miracle | Akash Banerjee The Modi Govt claims that India's GDP grew by a stunning 7.8 in the...
हर तरफ झूठ की गूंज!
GDP के आंकड़ों से लेकर विकास के दावों तक, जनता के सामने सच्चाई से कोसों दूर तस्वीर परोसी जा रही है।
महंगाई बढ़ रही है, रोजगार का संकट है, किसान और आम आदमी परेशान हैं—लेकिन खबरों में सवालों की जगह विज्ञापनों का शोर है।
आपकी सरकार ने देश की खुशियां छीन ली हैं।
आम आदमी के घर का बजट बिगड़ गया, युवाओं के सपने टूट रहे हैं और छोटे कारोबार संकट में हैं।
याद रखिए—आर्थिक संकट को झूठे आंकड़ों और विज्ञापनों से नहीं छिपाया जा सकता।
जनता को प्रचार नहीं, सच्चाई चाहिए।
जनता को जुमले नहीं, रोजगार चाहिए।
जनता को आंकड़ों की बाजीगरी नहीं, राहत चाहिए।
अब झूठ नहीं चलेगा, जनता सच्चाई पूछेगी।
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