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यह एक बहुत ही प्रभावशाली पल है जो भावनात्मक परिपक्वता की ताकत को दिखाता है। गुस्से या झगड़े में पड़ने के बजाय, वह शांति और पक्के इरादे के साथ आगे बढ़ने का रास्ता चुनता है। यह हमें याद दिलाता है कि मुश्किल पलों में हम कैसा व्यवहार करते हैं, यह बात हालात से कहीं ज़्यादा हमारे व्यक्तित्व को परिभाषित करती है। ऐसी स्थिति में भी इतना संयम बनाए रखना, जो ज़्यादातर लोगों को तोड़कर रख दे, सचमुच प्रेरणादायक है। यह फालतू के ड्रामे के बजाय अपनी शांति को अहमियत देने का एक बेहतरीन उदाहरण है। वह दर्द और धोखे को पीछे छोड़कर, बस खुद को अलग करके उस अध्याय को खत्म करना चुनता है, और सबको दिखाता है कि असली ताकत शालीनता और आत्म-नियंत्रण में है। सिर उठाकर आगे बढ़ना एक साहसी कदम है, जो साबित करता है कि कभी-कभी सबसे असरदार प्रतिक्रिया वह होती है जिसमें आप किसी और को अपनी भावनाओं पर हावी नहीं होने देते। मज़बूत बने रहें, अपने लक्ष्य पर ध्यान दें और अपने भविष्य की ओर बढ़ते रहें।
न्यायिक अधिकारी महोदय, मैं आपको आदेश देता हूँ कि लखनऊ के ACP विकास नगर के ख़िलाफ़ FIR दर्ज करें।" इसके बाद उस व्यक्ति ने कोर्ट में कागज़ फेंके। भारत के सुप्रीम कोर्ट के अंदर का एक नाटकीय दृश्य।
दरवाजे पर लटके बच्चे को बचाने की गुहार?
दिल्ली पुलिस: 1 अभिजीत: 0🤣🔥 नियम सभी पर लागू होते हैं। अभिजीत दिपके को सिर्फ़ 20 जून को विरोध प्रदर्शन करने की इजाज़त मिली थी। पुलिस के मुताबिक, वह इजाज़त उसी दिन खत्म हो गई थी। तब से, उन्होंने बिना नई मंज़ूरी लिए जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन जारी रखा, जिससे लागू नियमों के तहत उनकी भीड़ का जमा होना गैर-कानूनी हो गया। आज पुलिस अधिकारियों से बातचीत के दौरान, दिपके ने सवाल किया कि दूसरे प्रदर्शनकारी समूहों को प्रदर्शन जारी रखने की इजाज़त क्यों दी जा रही है, जबकि उनके प्रदर्शन को रोका जा रहा है। दिपके ने तर्क दिया, "आज रविवार है, भीड़ ज़्यादा है, और आपने 4-5 दूसरे प्रदर्शनकारी समूहों को इजाज़त दी है।" पुलिस ने साफ़ तौर पर जवाब दिया: "आपके पास तो इजाज़त ही नहीं है। दूसरों ने इजाज़त ली है, इसलिए ज़ाहिर है कि उन्हें प्रदर्शन करने की इजाज़त है।" इस बातचीत ने जल्द ही ऑनलाइन लोगों का ध्यान खींचा; कई लोगों ने कहा कि मुद्दा भेदभाव का नहीं, बल्कि ज़रूरी इजाज़त लेने का था। अधिकारियों का कहना है कि हर प्रदर्शनकारी समूह को एक ही कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होता है, चाहे उनका मकसद या समूह का आकार कुछ भी हो। पुलिस की कार्रवाई का समर्थन करने वालों का तर्क है कि सार्वजनिक प्रदर्शनों के नियम कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए होते हैं और सभी पर समान रूप से लागू होने चाहिए। उनका कहना है कि अगर दूसरे समूहों ने ज़रूरी औपचारिकताएं पूरी की हैं, तो उनकी तुलना गैर-कानूनी प्रदर्शन से नहीं की जा सकती। इस घटना ने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है; कई लोगों का कहना है कि दिपके अब उन नियमों को नज़रअंदाज़ करने का नतीजा भुगत रहे हैं, जिनके बारे में उन्हें उम्मीद थी कि अधिकारी उन्हें अनदेखा कर देंगे, जबकि दूसरे लोग प्रदर्शन की इजाज़त और नियमों के समान पालन के बड़े मुद्दे पर चर्चा कर रहे हैं।
ब्रेकिंग न्यूज़, राजस्थान ,
04/07/2026
इलाहाबाद हाईकोर्ट से वाराणसी के मदरसों को बड़ा झटका लगा हैं। हाईकोर्ट ने मदरसों की ATS जांच के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने कहा केवल जांच शुरू किया जाना कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं है। ऐसे में इसे नहीं रोका जा सकता।
मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि इंटेलिजेंस इनपुट के आधार पर यूपी के करीब 4000 संस्थानों की जांच कराई जा रही है। मदरसा प्रबंधन समिति और टीचर्स एसोसिएशन मदारिस अरबिया ने इसके खिलाफ याचिका दाखिल कर रोक लगाने की मांग की थी।
मदरसा प्रबंधन समिति का कहना था कि यह जांच परेशान करने के लिए की जा रही है। साथ ही इसके आधार पर कार्रवाई की जा सकती है। मामले की सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया।
सरकार के 9 दिसंबर 2025 को जारी उस आदेश को चुनौती दी गई थी जिसके तहत मदरसों की एसटीएस द्वारा जांच की जानी थी। हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को कहा कि जांच समिति के सामने अपना जवाब दाखिल करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं।
जस्टिस नीरज तिवारी और जस्टिस विवेक सरन की डबल बेंच ने फैसला सुनाते हुए याचिका खारिज कर दी।
13 वर्षीय बच्ची के मामले में बड़ा प्रदर्शन" या "Justice_for_beti: एक 13 वर्षीय बच्ची के साथ हुई घटना के विरोध में किए जा रहे प्रदर्शन को दर्शाती है।इस छवि में दी गई मुख्य बातें निम्नलिखित हैं:आरोप: इसमें दावा किया गया है में "30 लोगों" ने एक 13 वर्षीय बच्ची की जान ले ली।प्रदर्शन: छवि में सड़कों पर एक 'मौन मार्च' (silent march) में भाग ले रहे लोगों के बड़े समूह की तस्वीरें दिखाई गई हैं।एकता: इसमें इस बात पर जोर दिया गया है कि हिंदू, मुस्लिम, पुलिस और प्रशासन सहित विभिन्न समुदायों और वर्गों के लोग इस मामले के खिलाफ विरोध करने के लिए एक साथ आए हैं।मांग: प्रदर्शनकारी सरकार से अपील कर रहे हैं कि इस मामले में जल्द से जल्द और सबसे सख्त कार्रवाई की जाए।...
मां पर लाठी! कैसा बेरहम इंसान, इंसानियत भी हुई शर्मसार कलयुगी बेटे की बर्बरता ! इंदौर में मां को डंडे से बेरहमी से पीटने वाले सौरभवर्मा का वीडियो वायरल, जनता ने मांगी फांसी अपनी मां को डंडे से पीटने हुए इस लड़के का वीडियो जरूर देखे होंगे ये वीडियो चंदननगर, इंदौर का बताया जा रहा है। लड़के का नाम सौरभ वर्मा है रात के समय सुरेश वर्मा मोहल्ले की महिलाओं के साथ अभद्र व्यवहार कर रहा था। माँ ने उसे टोका (रोका), तो गुस्से में बेटे ने माँ पर हमला बोल दिया, पहले गाल पर थप्पड़ मारा, फिर धक्का देकर दूर धकेल दिया, और रास्ते में डंडे से पीटता हुआ घर से बाहर निकाल दिया। घटना के दौरान कई लोग मौजूद थे, लेकिन किसी ने भी बचाओ नहीं किया। एक शख्स पूरा वीडियो रिकॉर्ड कर रहा था, लेकिन उसने भी रोकने की बजाय सिर्फ रील बनाया
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