Naam Mahima
vrindavan
09/07/2026
अगर चिंतन में श्री राम नाम आ गया और शरीर छूटा तो श्री राम जी को प्राप्त हो जाओगे ये कलियुग है और भक्ति सिद्ध होना बहुत कठिन है एक मात्र नाम का सहारा ले लो निरंतर नाम जप करो जो जितना अधिक नाम जप करेगा उसे उतनी अधिक भागवतिक शक्ति प्राप्त होगी जितनी अधिक भागवतिक शक्ति प्राप्त होगी उतने अधिक निर्विकार होते जाओगे जय सियाराम 🌹🙏
01/07/2026
जो ब्रह्ममुहूर्त में उठकर श्री राम नाम जप करता है, उसके मुख पर एक दिव्य तेज आ जाता है नाम जप से ही तेज आता है इस कलियुग में नाम जप ही सर्वोत्तम साधन है
नाम जप करना आसान नहीं है यही सबसे बड़ी साधना है इसीलिए शुरुआत में मन भागता है, पर बार-बार करने से मन लग जाता है अन्य साधन करने से कुछ नहीं होता, कलियुग में बस नाम ही है जिस दिन समझ में आ गया कि रात-दिन नाम जप में लगना है,
उसका शरीर, चेहरा, वाणी सब दिव्य हो जाते हैं उसके दर्शन मात्र से लोग आकर्षित हो जाते हैं नाम जप करिए, विश्वास करिए यही सबसे बड़ा है ये पढ़ने को मिल रहा है ये भी बहुत कृपा है लग जाएं अभी से ही, नियमपूर्वक नाम में लग जाओ जय सियाराम जय जय सियाराम 🙏 ⛳
#सियाराम
16/06/2026
मनुष्य शरीर ही एकमात्र ऐसा रथ है, जिस पर सवार होकर जीव आत्मा का परमात्मा से मिलन सम्भव है दूसरों को दुःख दोगे तो भजन में मन नहीं लगेगा, और सुख दोगे तो भजन में मन लगेगा, दूसरों को दुःख देने से हृदय कठोर होता है, और सुख देने से हृदय पिघलता है पिघले हुए हृदय में भगवान की भक्ति जम जाती है जय सियाराम जय जय सियाराम 🌹🙏
15/06/2026
14/06/2026
श्री महाराज जी :- चिंतन में बहुत बड़ी शक्ति है , मनुष्य जैसा चिंतन करता है उसकी रूचि वैसी हीं हो जाती है, उसका चित्त वैसा हीं हो जाता है। जीव अगर भगवान का चिंतन करता है तो उसके मन का अटैचमेंट भगवान और गुरू से हो जाता है
और जो संसार या संसार के जिस किसी बिषय, बस्तुओं तथा व्यक्ति का चिंतन करता है तो उसके मन का अटैचमेंट उसी बिषय , वस्तू और व्यक्ति से हो जाता है , अत: सबकुछ मन के चिंतन पर निर्भर है । जैसा चिंतन वैसा रूचि , जैसी रूचि वैसा व्यक्तित्व और संगति , जैसा व्यक्तित्व वैसी आदत , वैसा व्यवहार तथा वैसा हीं सोंच । जैसा सोंच वैसा कर्म , जैसा कर्म वैसे फल की प्राप्ति । जैसा फल वैसा भोग । सब मनुष्य के अपने चिंतन के उपर डिपेंड है
श्री कृपालु जी महाराज ( साधन साध्य पत्रिका के "चिंतन धारा" से )
14/06/2026
गुरूदेव जैसे हम लोग संसार में रहते हैं, और भी बहुत सारे लोग हैं जो अलग लग आफिस में काम करते हैं, तो उनका एक संशय बड़ा रहता है कि जैसे दीक्षा लेने पर इसमें खाने के नियम होते हैं, तो कभी गलती से प्याज लहसुन खा लिया तो..
गुरूदेव जी - कोई बात नहीं, हाँ, ये बात जरूर है कि गलती से हम मांस नहीं खायें, गलती से हम अंडा ना खाएं, लेकिन अगर प्याज लेहसुन पड़ा हुआ भोजन मिल गया है, और उसे पा लिया है, तो देखो हम आपसे स्पस्ट कहते हैं, कि प्याज लेशुन पाना कोई पाप नहीं है, क्योंकि इसमें किसी की हत्या नहीं है, जैसे आलू पैदा होती है, ऐसे ही ये प्याज लहसुन पैदा होता है पर ये घोर तमो गुणी है इसलिए हमारे संतों ने हमारे भगवत समाज ने इसे त्याग किया है कि ये तमो गुण प्रमात पैदा कर देगा पाप प्रवत्ती पैदा कर देगा इसलिए इसका त्याग किया गया है यदि आप दीक्षा लिये हो ना पाओ बहुत अच्छा है लेकिन सर्विश में हो आपकी रशोई में वही बनता है तो आप भगवन नाम ले कर पाओ और खुब नाम जप करो मंत्र जप करो
इसलिए कह रहा हूँ कि कम से कम नाम जप और मंत्र जप तो होगा आप उसके लिए कि जब हम प्याज लेशन छोड़ेंगे तब हम नाम जप करेंगे तो पता नहीं हम जिएं कि न जिएं प्याज लहसुन को निमित मना कर हमारा जीवन बीतता चला जा रहा है,
नहीं, बिल्कुल ऐसा नहीं, बहुत से विद्यार्थी हैं, बहुत से हमारे सर्विश्मैन हैं, बहुत से व्यापारी हैं, जो देश विदेश जाते हैं, हम ये प्रार्थना करेगे, कि आप मांश्र मत खाओ, आप शराब मत पियो, आप अंडा मत खाओ, इसमें दूसरे जीवों की हिंसा है,
लेकिन अगर कहीं ऐसा कोशिश करो कि प्याज लहसुन न पाओ, लेकिन अगर ऐसा है, कि आप बिना प्याज लहसुन के भोजन मिलता ही नहीं है, तो आप आओ, और राधा राधा जपो, आपका मंगल होगा, आपका कल्यान होगा, निश्चित समझो, आप इसमें डरो मत, हर हर महादेव 🙏⛳
( परम पूज्य संत श्री प्रेमानंद जी महाराज )
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