Dr Ranjan Baudh
Founder/National President:-- RSS2
{राष्ट्रीय संविधान शिक्षा संघ}
स्थापना:-- #6_दिसंबर_2018
बाबा साहब भीम राव अम्बेडकर जी के पुण्यतिथि पर
15/05/2026
07/02/2026
"जिसने दुख झेले पर उफ़ तक न कहा,
जिसने बाबा साहेब के संकल्प को अपना जिया,
ऐसी त्याग की देवी माता रमाबाई को,
शत-शत नमन और वंदन।"
माता रमाबाई आंबेडकर जी की जयंती पर आप सभी को मंगलकामनाएं! 💐
करोड़ों वंचितों के उद्धार के लिए बाबा साहेब को संबल देने वाली, त्याग की प्रतिमूर्ति माता रमाबाई आंबेडकर जी की जयंती पर उन्हें विनम्र अभिवादन। 🙏💙
07/02/2026
Excited to share that I just got recognized as one of Dr Niranjan Ambedkar 's top fans! 🎉
31/01/2026
"जाति-जाति में जाति हैं, जो केतन के पात,
रैदास मनुष ना जुड़ सके, जब तक जाति न जात।"
समाज में व्याप्त कुरीतियों को दूर कर 'बेगमपुरा' (ऐसा शहर जहाँ कोई दुख न हो) की परिकल्पना करने वाले महान संत गुरु रविदास जी के प्रकाश पर्व की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं! 🌸🧡
26/01/2026
आप सभी देश वासियों को गणतंत्र दिवस पर बहुत बहुत बधाई!
जय भीम
15/01/2026
माननीय बहन जी के जन्मदिन पर बहुत बहुत बधाई!
स्वास्थ्य रहने की कमाना करता हूँ!
06/01/2026
"जय भीम" शब्द के जनक कौन थे?
"जय भीम" आज बहुजन अस्मिता और एकता का प्रतीक बन चुका है. हर बहुजन युवा उत्साह से "जय भीम" के साथ एक-दूसरे का अभिवादन करते हैं. "जय भीम" शब्द की उत्पत्ति महाराष्ट्र में हुई. इस "जय भीम" शब्द के जनक बाबू हरदास एल. एन. थे, जो 1921 में बाबासाहब डाॅ अम्बेडकर के साथ सामाजिक आंदोलन में उतरे. बाबू हरदास का परिवार पढ़ा-लिखा था. पिता लक्ष्मण उरकुडा नगराले रेलवे विभाग में बाबू थे. उस समय देश में वर्णभेद और जाति भेद के कारण भीषण सामाजिक और आर्थिक विषमता फैली हुई थी. सन 1922 में महाराष्ट्र के अछूत संत चोखामेला के नाम पर उन्होंने एक छात्रावास शुरू किया. 1924 में उन्होंने एक प्रिंटिंग प्रेस खरीदी थी और सामाजिक जागृति के लिये "मंडई महात्म्य" नामक किताब सामाजिक जागृति के लिये लिखी थी, साथ ही "चोखामेला विशेषांक" भी निकाला था.
बाबासाहब के आंदोलनों में उन्होंने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया. 1930 के नासिक कालाराम मंदिर सत्याग्रह तथा 1932 में पूना पैक्ट के दौरान उन्होंने बाबासाहब के साथ महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
"जय भीम" का संबोधन पहली बार उनके मन में एक मुस्लिम व्यक्ति को देखकर आया. उस समय कार्यकर्त्ताओं के साथ घूमते हुये रास्ते में एक मुस्लिम को दूसरे मुस्लिम से "अस्सलाम-अलेकुम" कहते हुये सुना. जवाब में दूसरे व्यक्ति ने भी "अलेकुम-सलाम" कहा. तब बाबू हरदास ने सोचा कि हमें एक दूसरे से क्या कहना चाहिये? उन्होंने कार्यकर्त्ताओं से कहा, "मैं 'जय भीम' कहूँगा और आप 'बल भीम' कहिये. उस समय से ये अभिवादन शुरू हो गया, पर बाद में 'बल भीम' प्रचलन से गायब हो गया, केवल 'जय भीम' ही प्रचलन में रहा. 1933-34 में बाबू हरदास ने समता सैनिक दल को 'जय भीम' का नारा नागपुर में दिया. इस तरह 'जय भीम' हर जगह छा गया. बाद में डाॅ अम्बेडकर ने खुद भी 1949 में अपने पत्रों में जय भीम लिखना और कहना शुरू कर दिया था. 12 जनवरी 1939 को उनका परिनिर्वाण हो गया था. उस दिन उनको श्रद्धांजलि देते समय बाबासाहब ने कहा था, "बाबू हरदास के रूप में मेरा दाहिना हाथ चला गया.
जय भीम जय भीम जय संविधान जय भारत 🙏
संस्थापक- राष्ट्रीय संविधान शिक्षा संघ RSS2
Dr Ranjan Baudh
03/01/2026
ज्ञान और समानता की अलख जगाने वाली, समाज में बदलाव की नींव रखने वाली, अंधकार में शिक्षा की ज्योत जलाने वाली, भारत की प्रथम शिक्षिका क्रांतिज्योति माता सावित्रीबाई फुले जी को उनकी जयंती पर शत-शत नमन एवं विनम्र श्रद्धांजलि!
#सावित्रीबाई
01/01/2026
शौर्य, स्वाभिमान और साहस की विजय गाथा! 🔥
आज 1 जनवरी को राष्ट्रीय संविधान शिक्षा संघ भीमा कोरेगांव के उन 500 वीर योद्धाओं को कोटि-कोटि नमन करता हूँ जिन्होंने विषम परिस्थितियों में अपनी वीरता से इतिहास की धारा बदल दी।
यह केवल एक युद्ध की जीत नहीं थी, बल्कि यह मानवीय गरिमा और आत्मसम्मान की जीत थी। आइए, हम सब मिलकर इन महान पूर्वजों के बलिदान को याद करें और उनके द्वारा दिखाए गए 'न्याय और समानता' के मार्ग पर चलने का संकल्प लें।
📍 संगठन: राष्ट्रीय संविधान शिक्षा संघ
विजय दिवस अमर रहे! शौर्य दिवस की हार्दिक मंगलकमाना !
#शौर्य_दिवस #भीमा_कोरेगांव
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