Deepak Rupak aap
Politician
12/09/2026
बिहार की राजनीति में जनता दल (यूनाइटेड) यानी JD(U) को लेकर यह सवाल अक्सर उठता है कि नीतीश कुमार के बाद पार्टी का क्या होगा और क्या इसका नाम भी 'JDU (नीतीश)' जैसा हो जाएगा।राजनीतिक विश्लेषकों और मौजूदा परिस्थितियों के अनुसार, भविष्य में ऐसी संभावना से पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता है, जिसके तीन मुख्य कारण हैं:चेहरा-केंद्रित पार्टी: लोजपा (रामविलास) या शिवसेना (UBT) की तरह, JD(U) पूरी तरह से नीतीश कुमार के चेहरे और उनकी राजनीतिक साख पर टिकी हुई है। उनके बिना पार्टी के अस्तित्व की कल्पना करना फिलहाल मुश्किल है।उत्तराधिकारी का अभाव: पार्टी में नीतीश कुमार के बाद कोई ऐसा सर्वमान्य नेता नहीं है जिसके पीछे पूरी पार्टी खड़ी हो सके। ऐसे में उनके सक्रिय राजनीति से हटने या किसी अन्य परिस्थिति में पार्टी में बिखराव और गुटबाजी होना स्वाभाविक है।नाम की जरूरत: अगर भविष्य में पार्टी दो धड़ों में बंटती है, तो असली JDU होने का दावा करने के लिए चुनाव आयोग के नियमों के तहत दोनों गुटों को अलग नाम और पहचान (जैसे JDU-नीतीश) मिल सकती है।
आप बिहार राजनीति के इस बदलते समीकरण को किस नजरिए से देखते हैं? क्या आपको लगता है कि नीतीश कुमार के बाद पार्टी को संभालने वाला कोई मजबूत उत्तराधिकारी उभर कर सामने आएगा?
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