Advocate Rajneesh Kumar
I have been practicing and handling cases independently with a result oriented approach, both processionally and ethically.
CBSE की 3-लैंग्वेज पॉलिसी पर सुप्रीम कोर्ट ने उठाए सवाल, केंद्र से पुनर्विचार को कहा
https://hindi.livelaw.in/supreme-court/supreme-court-cbse-three-language-policy-546714
चेक बाउंस मामले में कंपनी को आरोपी न बनाना CrPC की धारा 319 के तहत समन भेजकर ठीक नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट
https://hindi.livelaw.in/supreme-court/failure-to-add-company-as-accused-in-cheque-dishonour-case-cant-be-cured-by-summoning-it-under-s319-crpc-supreme-court-544435
01/08/2026
S. 125 CrPC | पति शुरुआती में ही पत्नी का एक्स्ट्रा-मैरिटल अफेयर साबित कर दे तो पत्नी को अंतरिम गुज़ारा-भत्ता देने से इनकार किया जा सकता है: सुप्रीम कोर्ट
S. 125 CrPC | पति शुरुआती में ही पत्नी का एक्स्ट्रा-मैरिटल अफेयर साबित कर दे तो पत्नी को अंतरिम गुज़ारा- सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (31 जुलाई) को कहा कि CrPC की धारा 125 के तहत पत्नी को अंतरिम गुज़ारा-भत्ता देने से इनकार किया जा स...
30/07/2026
S.457 CrPC | ज़ब्त गाड़ियों को अंतरिम तौर पर वापस पाने के लिए सिर्फ़ रजिस्ट्रेशन सर्टिफ़िकेट ही एकमात्र आधार नहीं: सुप्रीम कोर्ट
S.457 CrPC | ज़ब्त गाड़ियों को अंतरिम तौर पर वापस पाने के लिए सिर्फ़ रजिस्ट्रेशन सर्टिफ़िकेट ही एकमात सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (27 जुलाई) को कहा कि CrPC की धारा 451 और 457 के तहत गाड़ियों की अंतरिम कस्टडी (अस्थायी कब्ज़े) के अधिक.....
पिता का अपनी नाबालिग संतान को उसकी माँ की कस्टडी से ले जाना किडनैपिंग नहीं: झारखंड हाईकोर्ट
https://hindi.livelaw.in/jharkhand-high-court/father-taking-away-his-own-minor-child-from-mothers-custody-doesnt-constitute-kidnapping-jharkhand-high-court-543333?fbclid=IwY2xjawTXfsJleHRuA2FlbQIxMQBzcnRjBmFwcF9pZAwzNTA2ODU1MzE3MjgAAR5qgOcc72aExoPx09Obrvy7m77_edb5GYBAWRy_ZwM0tTM814ciHGZBJ-Z8rA_aem_ZmFrZWR1bW15MTZieXRlcw
आरोपी से मिली फीस पर वकील का बैंक अकाउंट फ्रीज? हाई कोर्ट ने कह दिया, ये गलत है!
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने साफ किया कि किसी अभियुक्त द्वारा अपने वकील को दी गई पेशेवर फीस को केवल इसलिए 'अपराध की आय' नहीं माना जा सकता कि भुगतान करने वाला आरोपी है।
जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस अरुण कुमार की खंडपीठ ने कानपुर के वकील आयुष वाजपेयी की याचिका पर यह टिप्पणी की, जिनका बैंक खाता साइबर सेल ने फर्जी लेनदेन बताकर फ्रीज कर दिया था — जबकि वो रकम असल में उनके मुवक्किल से मिली प्रोफेशनल फीस थी।
कोर्ट ने कहा — एक वकील बड़े घोटाले या धोखाधड़ी के आरोपी का भी बचाव कर सकता है, लेकिन जब तक वकील खुद किसी अपराध में शामिल न हो, उसकी फीस को अपराध की कमाई नहीं कहा जा सकता। फीस का स्रोत चाहे सरकार हो, आम नागरिक हो या आरोपी — वकील की पेशेवर आय और स्रोत में फर्क करना जरूरी है।
कोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए अपर मुख्य सचिव (गृह) से व्यक्तिगत हलफनामा मांगा है कि पुलिस बैंक अकाउंट फ्रीज करने की शक्ति का ऐसा दुरुपयोग कैसे रोकेगी।
अगली सुनवाई 17 जुलाई को —
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