RISHIV
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21/06/2026
अरे, भाई... "योगा" नहीं, #योग! 🙏🙏🙏
आजकल जहाँ भी जाइए, एक ही शब्द बार-बार सुनाई देता है... "योगा"।
योगा डे, योगा क्लास, योगा टीचर, योगा मैट, योगा स्टूडियो...
यह सब सुनते-सुनते अब स्थिति यह हो गई है कि यदि कोई शुद्ध रूप से "योग" कह दे तो कई लोगों को वह असामान्य लगने लगता है।
प्रश्न यह है कि आखिर ऐसा हुआ कैसे?
क्या हमारे ऋषियों ने "योगा" शब्द दिया था?
क्या पतंजलि ने #योगसूत्र नहीं, योगासूत्र लिखा था?
क्या गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने "योगा" का उपदेश दिया था?
नहीं।
तो, फिर यह "योगा" आया कहाँ से?
#भाषा की एक छोटी-सी भूल, जो धीरे-धीरे संस्कृति की बड़ी विकृति बन गई...
"योग" संस्कृत का शब्द है। हजारों वर्षों से भारत की दार्शनिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का अभिन्न अंग है।
जब यह शब्द पश्चिमी देशों तक पहुँचा, तो उसे अंग्रेज़ी में ' ' लिख दिया गया। यह केवल वर्तनी (Spelling) थी, शब्द नहीं। लेकिन अंग्रेज़ी भाषा के अपने उच्चारण नियम हैं। इसलिए उन्होंने Yoga को "योगा" बोलना शुरू कर दिया। यह उनकी भाषायी सीमा थी, उनकी गलती नहीं।
वास्तविक विडम्बना तब शुरू हुई जब भारत के शिक्षित वर्ग ने भी उसी विदेशी उच्चारण को अपनी भाषा में वापस आयात कर लिया।
और धीरे-धीरे "योग" स्वयं अपने ही घर में "योगा" बन गया।
कल्पना कीजिए... यदि कोई आपसे कहे: "आज मैं रामा की पूजा करके आया हूँ।"
या
"कृष्णा ने अर्जुना को गीता सुनाई थी।"
तो आपको कैसा लगेगा?
अजीब लगेगा।
क्यों?
क्योंकि हम जानते हैं कि मूल शब्द #राम है, रामा नहीं।
मूल शब्द #कृष्ण है, कृष्णा नहीं।
फिर जब बात "योग" की आती है तो वही संवेदनशीलता अचानक कहाँ चली जाती है?
क्या केवल इसलिए कि गलती अंग्रेज़ी में लिखी गई थी?
यह केवल उच्चारण का प्रश्न नहीं है!
बहुत से लोग कहेंगे — "अरे, इससे क्या फर्क पड़ता है? भावना तो वही है।"
फर्क पड़ता है।
और बहुत गहरा पड़ता है।
क्योंकि शब्द केवल ध्वनियाँ नहीं होते, वे अवधारणाएँ (Concepts) भी होते हैं।
"योग" केवल शरीर को मोड़ने की कुछ क्रियाओं का नाम नहीं है।
योग का अर्थ है: आत्म-अनुशासन, चित्त की स्थिरता, इन्द्रिय-निग्रह, आत्मबोध, एकत्व, समत्व, जीवन की समग्र साधना...
जब "योग" केवल "योगा" बन जाता है, तो उसके साथ जुड़ी हुई पूरी दार्शनिक परंपरा भी धीरे-धीरे जिमनास्टिक और फिटनेस के बाज़ार में सिमटने लगती है।
शब्द बदलता है, फिर अर्थ बदलता है, फिर पहचान बदल जाती है।
सबसे अधिक चिंता की बात क्या है?
यह नहीं कि कोई विदेशी "योगा" कहता है। वह अपनी भाषा के अनुसार बोल रहा है।
#चिंता की बात यह है कि हम स्वयं अपने शब्दों को पहचानना छोड़ रहे हैं।
हमारे पास डिग्रियाँ हैं। हमारे पास इंटरनेट है। हमारे पास आधुनिक शिक्षा है।
लेकिन क्या हमारे पास अपनी भाषा के प्रति उतनी ही सजगता है?
यदि कोई व्यक्ति "शेक्सपियर" को बार-बार गलत बोले, तो अंग्रेज़ तुरंत सुधार देंगे। यदि कोई फ्रांसीसी शब्द का गलत उच्चारण करे, तो फ्रांस के लोग तुरंत ध्यान दिलाएँगे।
लेकिन भारत में अपनी ही भाषायी विरासत के साथ लापरवाही को अक्सर "आधुनिकता" समझ लिया जाता है।
#समस्या अज्ञान नहीं, आत्मविस्मृति है...
यह लेख किसी का उपहास उड़ाने के लिए नहीं है। क्योंकि अधिकांश लोग जानबूझकर ऐसा नहीं करते।
उन्हें कभी बताया ही नहीं गया कि "Yoga" अंग्रेज़ी वर्तनी है और "योग" उसका मूल शब्द।
समस्या अज्ञान नहीं है। समस्या यह है कि हम धीरे-धीरे अपनी जड़ों को अंग्रेज़ी के चश्मे से देखने लगे हैं।
और जब कोई समाज अपनी भाषा को दूसरे की दृष्टि से देखने लगता है, तब वह केवल शब्द नहीं खोता... वह अपनी सांस्कृतिक स्मृति भी खोने लगता है।
अब क्या किया जाए?
बहुत सरल।
आज से... इंग्लिश में Yoga लिखना पड़े तो लिखिए। लेकिन हिन्दी में योग ही लिखिए। "योगा क्लास" नहीं, योग कक्षा कहिए। "योगा टीचर" नहीं, योग शिक्षक कहिए। "योगा डे" नहीं, योग दिवस कहिए।
और सबसे महत्वपूर्ण— जब भी किसी को "योगा" कहते सुनें, उसे उपहास से नहीं, प्रेमपूर्वक यह बताइए कि मूल शब्द योग है।
#निष्कर्ष
सभ्यताएँ युद्धों से कम और विस्मृति से अधिक नष्ट होती हैं। जब कोई समाज अपने शब्दों का सही अर्थ, सही रूप और सही उच्चारण भूलने लगता है, तो धीरे-धीरे वह अपनी पहचान भी भूलने लगता है।
इसलिए यह केवल "योग" और "योगा" का विवाद नहीं है। यह प्रश्न है कि क्या हम अपनी विरासत को उसके वास्तविक स्वरूप में पहचानना चाहते हैं, या फिर उसे विदेशी उच्चारणों और बाज़ारू सुविधाओं के अनुसार बदलते रहना चाहते हैं।
आइए, कम से कम अपने शब्दों के प्रति ईमानदार बनें।
योग, योग ही है। वह कभी "योगा" नहीं था, और न कभी होगा।
हम सभी को 12वें #अंतरराष्ट्रीय #योग #दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं! 😇🙏💐🚩🧘🏻♀️🧘🏻♀️
21/06/2026
12th was celebrated with great enthusiasm at RISHIV today... 😇🙏🧘🏻♀️
21/06/2026
11/06/2026
Our young at RISHIV: Centre for Vedic Research, Yoga and Naturopathy, Varanasi 🙏😇🧘
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