Saumya Singh Rajput

Saumya Singh Rajput

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मनमौजी |Soul Writer|Voice of Emotions|✍🏻♾️
! ॐ कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने।
प्रणतः क्लेशनाशाय गोविन्दाय नमो नमः॥🌈🙏🏻✨
💫👣 काशी के वाशी 👣💫

04/09/2026

उम्मीद नहीं विश्वास है मुझे,
कि आप जो करेंगे अच्छा करेंगे। 🥰💗”

अब उम्मीद नहीं रखती गुरुदेव भगवान…
क्योंकि उम्मीद में कहीं न कहीं मन की इच्छा छुपी होती है,
और आपके चरणों में आकर तो मैंने अपनी हर इच्छा ही छोड़ दी है। 🙏🏻

अब जो आप देंगे, उसे प्रसाद समझकर स्वीकार करूँगी,
जो नहीं देंगे, उसमें भी आपकी कोई सीख मानूँगी।
बस इतना विश्वास है कि,मेरे जीवन की कहानी भले मुझे समझ न आए,
लेकिन उसे लिखने वाला मेरा गुरुदेव है…
तो अंत कभी बुरा नहीं हो सकता। 🥺❤️

मेरी प्रार्थनाएँ कम पड़ जाएँ तो कोई बात नहीं,
बस आपकी कृपा की छाया कभी कम मत होने देना।
आपका हाथ सिर पर रहे गुरुदेव,फिर दुनिया की कोई भी ठोकर मुझे हरा नहीं सकती। 🙏🏻🌸
🌍🙏🏻बागेश्वर धाम सरकार 🙏🏻🌍

20/07/2026

वो बार-बार कहते है कि "मेरे पास दूसरों जैसी सुविधाएँ नहीं हैं, इसलिए तुम्हें किसी और को चुन लेना चाहिए।"

शायद उनको लगता है कि मैं भी इस दुनिया की तरह इंसानों को उनकी हैसियत, कमाई, सुविधाओं या भविष्य की गारंटी से तौलती हूँ। लेकिन अगर ऐसा होता, तो मैं उनसे प्रेम ही क्यों करती?

मैंने उनको तब चुना था, जब मेरे पास उनकी सुविधाओं की नहीं, उनके दिल की पहचान थी। मुझे आपका बैंक बैलेंस से नहीं, आपकी बातों से अपनापन मिला। मुझे उनकी चीज़ों से नहीं, उनके साथ से सुकून मिला।

हो सकता है आज आपको लगता हो कि आपके पास मुझे देने के लिए बहुत कुछ नहीं है। लेकिन क्या प्रेम सिर्फ़ वही होता है जो पैसों और सुविधाओं से दिया जाए? क्या एक सच्चा साथ, एक ईमानदार दिल, एक भरोसेमंद कंधा और हर मुश्किल में साथ निभाने का वादा किसी भी सुविधा से छोटा होता है?

मैं यह नहीं कहती कि सुविधाएँ महत्व नहीं रखतीं। वे जीवन को आसान बनाती हैं। लेकिन किसी इंसान की कीमत उनसे तय नहीं की जा सकती। किसी का चरित्र, उसका अपनापन, उसका साथ और उसका सच्चा दिल किसी भी सुविधा से कहीं अधिक मूल्यवान होता है।

अगर प्रेम करने के बाद भी हम एक-दूसरे का साथ सिर्फ़ इसलिए छोड़ दें कि हालात हमारे पक्ष में नहीं हैं, तो फिर प्रेम का अर्थ ही क्या रह जाता है? प्रेम का सबसे सुंदर रूप तो वही है, जो कठिन समय में भी यह कहे— "मैं आपके साथ हूँ।"

इसलिए मुझे किसी और को चुनने के लिए मत कहिए। मैंने आपको किसी तुलना में जीतकर नहीं चुना था। मैंने आपको इसलिए चुना था क्योंकि मेरे दिल ने आपको अपना मान लिया था।

इसलिए खुद को मेरी ज़िंदगी के लायक या नालायक मत समझो। यह फैसला मुझे करने दो आप। अगर मैंने आपको अपने दिल में जगह दी है, तो आपकी कमियों को देखकर नहीं, आपको अपना मानकर दी है।

मैं बस इतना चाहती हूँ कि एक दिन आप यह समझो—प्रेम वहाँ सबसे ज़्यादा सच्चा होता है, जहाँ इंसान को उसकी हैसियत से नहीं, उसके दिल से स्वीकार किया जाता है। और अगर मैंने आपको चुना है, तो आपके पास क्या है, इसके लिए नहीं… बल्कि तुम कौन हो, इसके लिए चुना है।
Soul Word by Saumya✍🏻♾️

21/06/2026

"everything" से "nothing" तक का सफ़र....."♾️🤷🏻✍🏻

यार ऐस थोड़ी होता है कल तक हम सब कुछ थे, और आज कुछ भी नहीं ?
ये "everything" से "something" तक का सफर भी मंजूर था, अगर आप धीरे-धीरे दूर होते,
तो शायद हम भी खुद को समझा लेते।
जब "something" पर ब्रेक लगती, तो बैठकर बात कर लेते, कुछ सवाल पूछ लेते, कुछ जवाब सुन लेते, और अपने दिल को आने वाले खालीपन के लिए तैयार कर लेते।

मगर अपने तो एक पल में फरमान सुना दिया— "अब कुछ नहीं है। " जैसे जो था, वो कभी था ही नहीं। जैसे उन घंटों की बातें, उन रातों की फिक्र, वो इंतजार, वो अपनापन, सब किसी कागज पर लिखी इबारत थी जिसे एक झटके में फाड़ दिया गया।

मैं एक बात आज तक नहीं समझ पाती हूं, लोग जब किसी को अपने दिल में जगह देते हैं, तो उसे सबसे ऊंची मंजिल पर बिठा देते हैं। मगर जब धक्का देते है, तो ये भी नहीं सोचते कि इतनी ऊंचाई से गिरने पर हड्डियां नहीं, इंसान का भरोसा टूटता है।

कोई चेतावनी नहीं, कोई संभालने वाला हाथ नहीं, कोई आखिरी बातचीत तक नहीं,बस एक फैसला,
फिर हम रह जाते हैं, खुद से ही सवाल पूछते हुए, खुद ही जवाब ढूंढ़ते हुए,
खुद ही अपने बिखरे हुए दिल को समझाते हुए। "ये भी नहीं पता कि कब तक ?"

रास्ते पर चलते हुए किसी अनजान से टकरा जाओ, तो वो औपचारिकता में ही सही, "सॉरी" कह देता है, पूछ लेता है— "लगा तो नहीं?"
मगर अपने तो पलटकर ये तक नहीं पूछा— "तुम ठीक हो?"
बस चले गए... और पीछे छोड़ गए हजारों यादें, लाखों सवाल, और एक ऐसा खालीपन जो हर दिन यही पूछता है—
कैसे हुआ ये?

कल तक सब कुछ थे हम, पर आज सब है, पर हम कुछ भी नहीं।

"उफ़्फ़ ये everything से nothing तक का सफ़र"

Saumyaaaa✍🏻💁🏻😐
#रिश्ते

14/06/2026

'बबुआ पर जादू कइले बानी' 🙈💕"
❤️

02/02/2026

____अभी भी अपवित्रता ही कहेंगे ❓____
🙏🏻 एक बार जरूर पढ़िए इसे 🙏🏻

खून ही तो निकल रहा ना ?
उसके लिए तो पैड है, कपड़ा बना है, मेंस्ट्रुअल कप ( Menstrual Cup)है ,टैम्पोन (Tampons), है तो उसे इस्तमाल करो न।
ये स्त्री woman का पार्ट ऑफ़ लाइफ है ,ये तो हर महीने लगा ही रहता है।

लेकिन जब आपके शरीर के किसी हिस्से में खरोच भी लग जाए ,और खून आने लगे तो आप तुरंत हाथों से दबा लेते,उस पर मरहम लगाने लगते हैं, बैंडेज लगाने लगते, हल्दी लगाने लगते हैं ,सारे प्रयास करते हैं खून रोकने के लिए ।

क्योंकि वह खून आपके लिए बहुत पवित्र है , वो शरीर से जाना नहीं चाहिए ,
लेकिन एक महिला का खून जा रहा हो, तब वो अपवित्र हो जाते हैं( impure) हो जाता हैं।

आप सब को पता है पीरियड के शुरुआती दिन के सफर मैं जो blood का flow निकल रहा होता है ना, वो केवल से पानी जैसा खून नहीं आता है।

वॉशरूम में कमोड पर बैठने के बाद में blood flow के साथ (रक्त के थक्के) भी आ रहा होता है,
ये 3,4 दिन कितना दर्दनाक ( )होता है , एक लड़की (women) के लिए जिसे लिखना बताना किसी के बस का नहीं है।

रिसर्च कहता है कि पीरियड्स का पेन #हार्ट_अटैक के पेन की बराबर होता है ।

और आप कितनी आसानी से कहते हो #अपवित्रता तब मुझे लगता है, जब ये आपवित्रता है तो आपके घर में तो बच्चा पैदा होता ही नहीं होगा ना इस अपवित्रता के वजह से ।

बच्चा चाहिए तो पीरियड आना चाहिए लेकिन पीरियड्स आए तो वहां अपवित्रता आ जाती है,

सच में मेरे को यह समझ में नहीं आता।
यह कौन सी अपवित्रता है यार .?

पता है यह आपकी बौद्धिक स्तर का विकास न होने की अपवित्रता है ,यह आपके ओछी मानसिकता की अपवित्रता है यह रूढ़िवादी परंपराओं की अपवित्रता है।

मुझे तो आजकल की लड़कियों का भी समझ में नहीं आता कि इतनी एजुकेटेड होने के बावजूद भी ,आप अभी तक अपवित्रता और पवित्रता के बंधन में फंसे पड़े हो।

आप इतनी अपवित्र हो जाती हो कि आप भगवान के सामने जाना नहीं चाहती ,
आप अपनी परछाई तक पहुंचने नहीं देना चाहती।

शास्त्रों और पारंपरिक मान्यताओं में पीरियड्स (मासिक धर्म) को मुख्य रूप से शारीरिक शुद्धि की एक प्रक्रिया, है ।
एक स्त्री के लिए भगवान से वरदान स्वरुप में मिला है , फिर भी इसे आप अपवित्र मानती हो,
तो सुनो बहन आपकी सोच में अपवित्रता है ,

भगवान ने कभी नहीं कहा कि मेरे सामने मत आओ ,रामायण भागवत गीता जैसे पवित्र ग्रंथों में इसे अपवित्र नहीं बताया गया है ।

आज मैने इसलिए लिखा ना कि मुझे महीने के हर 4 से 5 दिन ये बातें ये, रूढ़ी वादी सोच मेरे को बहुत चुभता (pinch )है ,मुझे बहुत परेशान करता है।.

क्योंकि आए दिन में मेरे घर में भी यही बाते ,यही सोच से में खुद सामना करती हूं ,🥺

यह मत छूना, वह मत करना, ऐसे मत करो भगवान जी के पास मत जाओ, घर में कुछ फंक्शन हो रहा है पूजा हो रहा है तो दूर बैठी रहूं एक बंद कमरे में।

अरे यार इन दिनों हार्मोनल में बदलाव से मूड स्विंग्स के कारण
इतना गुस्सा, चिड़चिड़ापन ,रोना आता ,फिर भी हम खुद को अकेले ही संभालते हैं ,कोई नहीं होता जो इस प्रॉब्लम को समझ पाए और हमारी हेल्प करें ।

इतना कुछ अकेले सहन करने के बाद भी, आप पवित्रता और अपवित्रता वाला लॉजिक घुसेड देते ।

बहुत हो गया यार बंद करो अब तो,🙏🏻
मैं मेरे पीरियड्स में भी कभी कभी मंदिर चली ही जाती हू, मुझे डर नहीं लगता कि कुछ पाप कर रही हूं , या कुछ गलत हो जाएगा मेरे साथ,
कुछ लोगों को मेरी बातें बहुत बुरी लगेगी कुछ लोग ज्ञान भी देंगे।

लेकिन i don't care इस अपवित्रता का लॉजिक ,मेरे परमात्मा के साथ मत जोड़िए 🙏🏻
मेरा और उनका बहुत प्यार कनेक्शन है। मेरे परमात्मा को पीरियड्स के अपवित्रता से कोई दिक्कत नहीं उनके लिए तो मन की पवित्रता ही बहुत जरूरी है।
तो मन को पवित्र रखने की कोशिश करो ,ये समाज तुमको अपनाए या ना अपनाए लेकिन परमात्मा तो इस #पीरियड_के_अपवित्रता के साथ भी तुमको अपना लेंगे! 🫂❤️
क्षत्राणी सौम्या सिंह ✍🏻

05/12/2025

आज हर एक भक्तिपथिक का हृदय आनंद से नृत्य कर रहा है।
पूज्य महाराज जी और माँ को नये जीवन में प्रवेश की बहुत बहुत बधाई। 🙏❣️🤗

26/11/2025

Achha ji je bat 😀🙈

24/11/2025

जितना सफल होना जरूरी है ,
उतना ही जरूरी है सफल होने के बाद विनम्र होना!✍🏻🙃💞
♥️

07/11/2025

जाति धर्म मे बटकर उसका परिणाम तो देख ही रहे हो
सनातन धर्म हमेसा कहता है, हम #एक है और यही बात, 🫂
हमारे पूज्य #गुरुदेव भगवान भी कह रहे की हम सब एक है,
तो आईये इस #धर्म_ध्वज के तले एक हो चले ✊
और जय श्री राम हर हर महादेव🙌, के जय घोस के साथ ,
हम आप सभी हिंदू भाई बहन #सनातन_हिंदू_एकता_पदयात्रा के साक्षी बने।🙌🙌
Saumya Singh Rajput ✍️
बागेश्वर धाम सरकार
#बागेश्वर_धाम_सरकार #दिल्ली #हिंदू #श्रीवृंदावनधाम

Photos from Saumya Singh Rajput's post 31/10/2025

मोहताज नहीं किसी की सिफारिशों के
हमारा वक्त बताएगा हमारी पैरवी कौन करेगा ..🦅
क्षत्राणी सौम्या सिंह ✍🏻💞

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